अल-अंकबूत · 4/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ أَن يَسْبِقُونَا ۚ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ ۝٤
Am hasibal lazeena ya`maloonas sayyiaati any yasbiqoonaa; saaa`a maa yahkumoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या जो लोग बुरे बुरे काम करते हैं उन्होंने ये समझ लिया है कि वह हमसे (बचकर) निकल जाएँगे (अगर ऐसा है तो) ये लोग क्या ही बुरे हुक्म लगाते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अम हसिब – क्या उन्होंने समझ लिया
  • अल्लज़ीना य'मलूनस सय्यिआत – जो लोग बुरे कर्म करते हैं
  • अन यस्बिक़ून – कि वे हमसे आगे निकल जाएँगे (हमें विवश कर देंगे)
  • साअ मा यहकुमून – बहुत बुरा है वह फ़ैसला जो वे करते हैं

तफ़सीर:

क्या उन लोगों ने, जो बुरे कर्म करते हैं — चाहे वह शिर्क हो या अन्य पाप — यह समझ लिया है कि वे अल्लाह को विवश कर देंगे और उसकी पकड़ से बच निकलेंगे? क्या वे यह ख़्याल कर बैठे हैं कि अल्लाह उन्हें पकड़ने पर क़ादिर नहीं होगा और वे अपनी बुराइयों के साथ उसकी सज़ा से भाग निकलेंगे?

यह उनका बिल्कुल ग़लत और बेहूदा ख़्याल है। अल्लाह तआला हर चीज़ पर पूरी ताक़त रखता है। न कोई उससे भाग सकता है, न कोई उसे विवश कर सकता है। वह हर उस चीज़ को जानता है जो उसके बंदे करते हैं, और उसकी पकड़ से बचना नामुमकिन है। यदि वे अपनी मौत तक कुफ़्र और गुनाह पर बने रहें, तो उन्हें अल्लाह की सज़ा से कोई नहीं बचा सकता।

अल्लाह तआला फ़रमाता है: "बहुत बुरा है वह फ़ैसला जो वे करते हैं।" यानी उनका यह अंदाज़ा और यह गुमान कि वे अल्लाह से बच निकलेंगे, कितना बुरा और ग़लत है! यह उनकी नादानी और अहमक़ी की सबसे बड़ी दलील है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त की याद दिलाती है — कि अल्लाह तआला हर चीज़ का निगरान है, और उसकी पकड़ से कोई नहीं बच सकता। जो लोग गुनाहों में डूबे हुए हैं और समझते हैं कि उन्हें कोई पकड़ नहीं सकता, वह बड़ी भूल में हैं। अल्लाह की रहमत बेशक बहुत वसीअ है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख़्त है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने गुनाहों से तौबा करें और अल्लाह की तरफ़ पलटें, क्योंकि वह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है। यह आयत हमें सचेत करती है कि अल्लाह से बचने की कोशिश करना बेकार है — बेहतर है कि हम उसकी तरफ़ दौड़ें, उसकी रहमत के साये में आएँ, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालें। यही कामयाबी की राह है।



📜 आयत 2-6 — सूरा अल-अंकबूत

2أَحَسِبَ النَّاسُ أَن يُتْرَكُوا أَن يَقُولُوا آمَنَّا وَهُمْ لَا يُفْتَنُونَ
क्या लोगों ने ये समझ लिया है कि (सिर्फ) इतना कह देने से कि हम ईमान लाए छोड़ दिए जाएँगे और उनका इम्तेहान न लिया जाएगा
3وَلَقَدْ فَتَنَّا الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۖ فَلَيَعْلَمَنَّ اللَّهُ الَّذِينَ صَدَقُوا وَلَيَعْلَمَنَّ الْكَاذِبِينَ
और हमने तो उन लोगों का भी इम्तिहान लिया जो उनसे पहले गुज़र गए ग़रज़ ख़ुदा उन लोगों को जो सच्चे (दिल से ईमान लाए) हैं यक़ीनन अलहाएदा देखेगा और झूठों को भी (अलहाएदा) ज़रुर देखेगा
4أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ أَن يَسْبِقُونَا ۚ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ
क्या जो लोग बुरे बुरे काम करते हैं उन्होंने ये समझ लिया है कि वह हमसे (बचकर) निकल जाएँगे (अगर ऐसा है तो) ये लोग क्या ही बुरे हुक्म लगाते हैं
5مَن كَانَ يَرْجُو لِقَاءَ اللَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ اللَّهِ لَآتٍ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
जो शख्स ख़ुदा से मिलने (क़यामत के आने) की उम्मीद रखता है तो (समझ रखे कि) ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) मीयाद ज़रुर आने वाली है और वह (सबकी) सुनता (और) जानता है
6وَمَن جَاهَدَ فَإِنَّمَا يُجَاهِدُ لِنَفْسِهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ عَنِ الْعَالَمِينَ
और जो शख्स (इबादत में) कोशिश करता है तो बस अपने ही वास्ते कोशिश करता है (क्योंकि) इसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा सारे जहाँन (की इबादत) से बेनियाज़ है
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 4

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Tuesday, September 29, 2026

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