अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अहसिब – क्या उन्होंने समझ लिया
- अन युतरकू – कि उन्हें छोड़ दिया जाएगा
- अन यक़ूलू आमन्ना – सिर्फ़ यह कहने पर कि हम ईमान लाए
- ला युफ़्तनून – उनकी परीक्षा नहीं ली जाएगी (फ़ित्ना = परीक्षा, आज़माइश)
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में एक बहुत बड़ी हक़ीक़त बयान फ़रमा रहे हैं। वह फ़रमाते हैं: क्या लोगों ने यह समझ लिया है कि सिर्फ़ यह कह देने से कि "हम ईमान लाए", उन्हें छोड़ दिया जाएगा और उनकी कोई परीक्षा नहीं ली जाएगी? हरगिज़ नहीं! यह सोचना बिल्कुल ग़लत है।
यह आयत एक सवालिया अंदाज़ में है, जो लोगों को झिड़कने और उन्हें सचेत करने के लिए है। अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि ईमान का दावा करना आसान है, लेकिन इस दावे की सच्चाई साबित करने के लिए इम्तिहान ज़रूरी है। जिस तरह सोने को आग में डालकर खरा किया जाता है, उसी तरह ईमान के दावे को परीक्षाओं और मुसीबतों के ज़रिए परखा जाता है।
यह परीक्षा कई रूपों में आती है – कभी मुसीबतों और तकलीफ़ों के रूप में, कभी दुश्मनों के डर के रूप में, कभी माल और जान के नुक़सान के रूप में, और कभी ख्वाहिशों और लालच के रूप में। इन सबके ज़रिए अल्लाह यह देखता है कि कौन अपने ईमान पर सच्चा है और कौन सिर्फ़ ज़ुबान से दावा करने वाला है।
प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि मुसीबतें और आज़माइशें अल्लाह की तरफ़ से एक रहमत हैं, न कि अज़ाब। जब अल्लाह किसी बंदे से मुहब्बत करता है, तो उसे परीक्षा में डालता है ताकि उसके दर्जे बुलंद करे। यही वह रास्ता है जिससे हमारा ईमान मज़बूत होता है और हम अल्लाह के और करीब आते हैं।
तो अगर आज आप किसी मुसीबत या परेशानी से गुज़र रहे हैं, तो निराश न हों। यह आपके लिए अल्लाह की तरफ़ से एक इम्तिहान है। सब्र करें, दुआ करें और अल्लाह पर भरोसा रखें। याद रखें, जो लोग इस इम्तिहान में कामयाब होते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बहुत बड़ा इनाम है – जन्नत की नेमतें और अल्लाह की रज़ा। और जो लोग सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं, उनकी हक़ीक़त भी इसी परीक्षा के ज़रिए सामने आ जाती है।
अल्लाह तआला हम सबको सच्चे ईमान की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए और हमें हर परीक्षा में कामयाबी नसीब करे। आमीन।
📜 आयत 1-4 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 2
सूरा आयत 2/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








