Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَكْفُرُونَ – तुम कुफ़्र करते हो (अल्लाह का इनकार करते हो)
- تُتْلَى عَلَيْكُمْ – तुम्हारे सामने पढ़ी जाती हैं
- آيَاتُ اللَّهِ – अल्लाह की आयतें (क़ुरआन की आयतें)
- يَعْتَصِم بِاللَّهِ – अल्लाह को थाम ले, उसकी रस्सी को मज़बूती से पकड़ ले, उसकी ओर रुजू करे
- صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ – सीधा रास्ता, स्पष्ट मार्ग
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालों! यह कैसा अजीब और हैरतअंगेज़ मामला है कि तुम अल्लाह का इनकार करते हो और कुफ़्र का रास्ता अपनाते हो, जबकि तुम्हारे पास वो सब कुछ मौजूद है जो तुम्हें ईमान पर क़ायम रखने के लिए काफ़ी है। अल्लाह की आयतें यानी क़ुरआन की आयतें तुम्हारे सामने लगातार पढ़ी जा रही हैं, और तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल ﷺ मौजूद हैं, जो इन आयतों को समझा रहे हैं और तुम्हें सीधा रास्ता दिखा रहे हैं। ये दोनों चीज़ें — क़ुरआन और रसूल — सबसे बड़ी नेमतें हैं। जब ये तुम्हारे पास हैं, तो कुफ़्र का रास्ता कैसे अपना सकते हो? यह सवाल उन लोगों के लिए है जो ईमान के बाद कुफ़्र की तरफ़ लौट जाते हैं, या जो अहले-किताब के बहकावे में आकर ईमान से हट जाते हैं।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: जो कोई अल्लाह को थाम लेता है — यानी उसकी रस्सी (क़ुरआन और सुन्नत) को मज़बूती से पकड़ लेता है, उस पर भरोसा करता है और उसी की तरफ़ रुजू करता है — तो वह सीधे रास्ते पर चल पड़ा। उसे अल्लाह ने सीधा रास्ता दिखा दिया, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं, कोई गुमराही नहीं। यह रास्ता उसे जन्नत की तरफ़ ले जाता है और उसे गुमराही के अंधेरों से निकालकर हिदायत की रोशनी में ला खड़ा करता है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने हमें दो सबसे बड़ी नेमतें दी हैं — क़ुरआन और सुन्नत। ये दोनों हमारे लिए रहनुमा हैं। जब हम इन्हें थाम लेते हैं, तो हम कभी गुमराह नहीं हो सकते। अल्लाह का क़ुरआन हमारे सामने है, और रसूल ﷺ की सुन्नत हमारे पास है। ये हमारे लिए रोशनी हैं। अगर हम इन पर अमल करें, तो हमारी ज़िंदगी हर पहलू में कामयाब हो सकती है। याद रखिए, अल्लाह की रस्सी को थामना यानी क़ुरआन और सुन्नत पर अमल करना ही हमारी नजात का ज़रिया है। यही वो सीधा रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा। आइए, हम सब इस रस्सी को मज़बूती से थामें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें।
📜 आयत 99-103 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 101
सूरा आल-इमरान आयत 101 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (भला) तुम क्योंकर काफ़िर बन जाओगे हालॉकि तुम्हारे सामने…सूरा आयत 101/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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