आल-इमरान · 101/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
وَكَيْفَ تَكْفُرُونَ وَأَنتُمْ تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ آيَاتُ اللَّهِ وَفِيكُمْ رَسُولُهُ ۗ وَمَن يَعْتَصِم بِاللَّهِ فَقَدْ هُدِيَ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ ۝١٠١
Wa kaifa takfuroona wa antum tutlaa `alaikum Aayaatul laahi wa feekum Rasooluh; wa mai ya`tasim baillaahi faqad hudiya ilaa Siraatim Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
और (भला) तुम क्योंकर काफ़िर बन जाओगे हालॉकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं और जो शख्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَكْفُرُونَ – तुम कुफ़्र करते हो (अल्लाह का इनकार करते हो)
  • تُتْلَى عَلَيْكُمْ – तुम्हारे सामने पढ़ी जाती हैं
  • آيَاتُ اللَّهِ – अल्लाह की आयतें (क़ुरआन की आयतें)
  • يَعْتَصِم بِاللَّهِ – अल्लाह को थाम ले, उसकी रस्सी को मज़बूती से पकड़ ले, उसकी ओर रुजू करे
  • صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ – सीधा रास्ता, स्पष्ट मार्ग

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! यह कैसा अजीब और हैरतअंगेज़ मामला है कि तुम अल्लाह का इनकार करते हो और कुफ़्र का रास्ता अपनाते हो, जबकि तुम्हारे पास वो सब कुछ मौजूद है जो तुम्हें ईमान पर क़ायम रखने के लिए काफ़ी है। अल्लाह की आयतें यानी क़ुरआन की आयतें तुम्हारे सामने लगातार पढ़ी जा रही हैं, और तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल ﷺ मौजूद हैं, जो इन आयतों को समझा रहे हैं और तुम्हें सीधा रास्ता दिखा रहे हैं। ये दोनों चीज़ें — क़ुरआन और रसूल — सबसे बड़ी नेमतें हैं। जब ये तुम्हारे पास हैं, तो कुफ़्र का रास्ता कैसे अपना सकते हो? यह सवाल उन लोगों के लिए है जो ईमान के बाद कुफ़्र की तरफ़ लौट जाते हैं, या जो अहले-किताब के बहकावे में आकर ईमान से हट जाते हैं।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: जो कोई अल्लाह को थाम लेता है — यानी उसकी रस्सी (क़ुरआन और सुन्नत) को मज़बूती से पकड़ लेता है, उस पर भरोसा करता है और उसी की तरफ़ रुजू करता है — तो वह सीधे रास्ते पर चल पड़ा। उसे अल्लाह ने सीधा रास्ता दिखा दिया, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं, कोई गुमराही नहीं। यह रास्ता उसे जन्नत की तरफ़ ले जाता है और उसे गुमराही के अंधेरों से निकालकर हिदायत की रोशनी में ला खड़ा करता है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने हमें दो सबसे बड़ी नेमतें दी हैं — क़ुरआन और सुन्नत। ये दोनों हमारे लिए रहनुमा हैं। जब हम इन्हें थाम लेते हैं, तो हम कभी गुमराह नहीं हो सकते। अल्लाह का क़ुरआन हमारे सामने है, और रसूल ﷺ की सुन्नत हमारे पास है। ये हमारे लिए रोशनी हैं। अगर हम इन पर अमल करें, तो हमारी ज़िंदगी हर पहलू में कामयाब हो सकती है। याद रखिए, अल्लाह की रस्सी को थामना यानी क़ुरआन और सुन्नत पर अमल करना ही हमारी नजात का ज़रिया है। यही वो सीधा रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा। आइए, हम सब इस रस्सी को मज़बूती से थामें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें।



📜 आयत 99-103 — सूरा आल-इमरान

99قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ مَنْ آمَنَ تَبْغُونَهَا عِوَجًا وَأَنتُمْ شُهَدَاءُ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता खुदा की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढूंढो (ढूंढ) के ईमान लाने वालों को उससे क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खुदा उससे बेख़बर नहीं है
100يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تُطِيعُوا فَرِيقًا مِّنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ يَرُدُّوكُم بَعْدَ إِيمَانِكُمْ كَافِرِينَ
ऐ ईमान वालों अगर तुमने अहले किताब के किसी फ़िरके क़ा भी कहना माना तो (याद रखो कि) वह तुमको ईमान लाने के बाद (भी) फिर दुबारा काफ़िर बना छोडेंग़े
101وَكَيْفَ تَكْفُرُونَ وَأَنتُمْ تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ آيَاتُ اللَّهِ وَفِيكُمْ رَسُولُهُ ۗ وَمَن يَعْتَصِم بِاللَّهِ فَقَدْ هُدِيَ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और (भला) तुम क्योंकर काफ़िर बन जाओगे हालॉकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं और जो शख्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया
102يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ حَقَّ تُقَاتِهِ وَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسْلِمُونَ
ऐ ईमान वालों ख़ुदा से डरो जितना उससे डरने का हक़ है और तुम (दीन) इस्लाम के सिवा किसी और दीन पर हरगिज़ न मरना
103وَاعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللَّهِ جَمِيعًا وَلَا تَفَرَّقُوا ۚ وَاذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ كُنتُمْ أَعْدَاءً فَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِكُمْ فَأَصْبَحْتُم بِنِعْمَتِهِ إِخْوَانًا وَكُنتُمْ عَلَىٰ شَفَا حُفْرَةٍ مِّنَ النَّارِ فَأَنقَذَكُم مِّنْهَا ۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और तुम सब के सब (मिलकर) ख़ुदा की रस्सी मज़बूती से थामे रहो और आपस में (एक दूसरे) के फूट न डालो और अपने हाल (ज़ार) पर ख़ुदा के एहसान को तो याद करो जब तुम आपस में (एक दूसरे के) दुश्मन थे तो ख़ुदा ने तुम्हारे दिलों में (एक दूसरे की) उलफ़त पैदा कर दी तो तुम उसके फ़ज़ल से आपस में भाई भाई हो गए और तुम गोया सुलगती हुईआग की भट्टी (दोज़ख) के लब पर (खडे) थे गिरना ही चाहते थे कि ख़ुदा ने तुमको उससे बचा लिया तो ख़ुदा अपने एहकाम यूं वाजेए करके बयान करता है ताकि तुम राहे रास्त पर आ जाओ
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अनुवाद — आल-इमरान 101

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Monday, September 7, 2026

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