आल-इमरान · 102/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ حَقَّ تُقَاتِهِ وَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسْلِمُونَ ۝١٠٢
Yaaa ayyuhal lazeena aamanut taqul laaha haqqa tuqaatihee wa laa tamoontunna illaa wa antum muslimoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमान वालों ख़ुदा से डरो जितना उससे डरने का हक़ है और तुम (दीन) इस्लाम के सिवा किसी और दीन पर हरगिज़ न मरना
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّقُوا اللَّهَ حَقَّ تُقَاتِهِ: अल्लाह से उस तरह डरो जैसा उससे डरने का हक़ है, यानी उसकी पूरी इताअत करो, उसकी नाफ़रमानी से बचो, उसका शुक्र अदा करो और उसे याद रखो।
  • وَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسْلِمُونَ: और तुम हरगिज़ मौत न पाओ मगर इस हालत में कि तुम मुसलमान (अल्लाह के आज्ञाकारी) हो।

तफ़सीर:

ऐ ईमान लाने वालों! तुम अल्लाह से उसका पूरा हक़ अदा करते हुए डरो। यानी उसकी हर हुक्म को मानो और हर मना की हुई चीज़ से बचो। उसकी नेअमतों का शुक्र अदा करो और उसे कभी भूलो नहीं। उसका ज़िक्र अपनी ज़ुबान पर हमेशा ताज़ा रखो और उसकी इबादत में कभी कोताही न करो। यही असली तक़वा है जो दिल को पाक करता है और आत्मा को नेकी की तरफ़ ले जाता है।

और यह भी यक़ीनी बात है कि मौत हर इंसान को आनी है, लेकिन मौत के वक़्त इंसान की हालत सबसे अहम होती है। इसलिए तुम हमेशा इस कोशिश में रहो कि तुम्हारी मौत इस हालत में आए कि तुम मुसलमान हो — यानी अल्लाह के सामने सर झुकाए हुए, उसकी रज़ा पर राज़ी, और उसके दीन पर क़ायम। अपने दिल को ईमान से, अपने अमल को नेकी से और अपनी ज़ुबान को ज़िक्र से सजाओ ताकि जब फ़रिश्ता-ए-मौत आए, तो तुम्हें ईमान की हालत में पाए।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा मुसलमान वही है जो पूरी ज़िंदगी अल्लाह की इताअत में गुज़ारे और अपने आख़िरी साँस तक इसी पर क़ायम रहे। इसलिए आज ही से अपनी ज़िंदगी को सुधार लो, अपने अमल को दुरुस्त कर लो, और अल्लाह से दुआ करो कि वह हमें सच्चा तक़वा अता करे और हमारी मौत ईमान की हालत में करे। यही कामयाबी है, यही सच्ची भलाई है। अल्लाह अपने बंदों से बेहद प्यार करता है और उन्हें उस रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ देता है जो उन्हें जन्नत तक पहुँचाए।

🎧 सुनें

📜 आयत 100-104 — आल-इमरान

100يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تُطِيعُوا فَرِيقًا مِّنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ يَرُدُّوكُم بَعْدَ إِيمَانِكُمْ كَافِرِينَ
ऐ ईमान वालों अगर तुमने अहले किताब के किसी फ़िरके क़ा भी कहना माना तो (याद रखो कि) वह तुमको ईमान लाने के बाद (भी) फिर दुबारा काफ़िर बना छोडेंग़े
101وَكَيْفَ تَكْفُرُونَ وَأَنتُمْ تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ آيَاتُ اللَّهِ وَفِيكُمْ رَسُولُهُ ۗ وَمَن يَعْتَصِم بِاللَّهِ فَقَدْ هُدِيَ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और (भला) तुम क्योंकर काफ़िर बन जाओगे हालॉकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं और जो शख्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया
102يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ حَقَّ تُقَاتِهِ وَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسْلِمُونَ
ऐ ईमान वालों ख़ुदा से डरो जितना उससे डरने का हक़ है और तुम (दीन) इस्लाम के सिवा किसी और दीन पर हरगिज़ न मरना
103وَاعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللَّهِ جَمِيعًا وَلَا تَفَرَّقُوا ۚ وَاذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ كُنتُمْ أَعْدَاءً فَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِكُمْ فَأَصْبَحْتُم بِنِعْمَتِهِ إِخْوَانًا وَكُنتُمْ عَلَىٰ شَفَا حُفْرَةٍ مِّنَ النَّارِ فَأَنقَذَكُم مِّنْهَا ۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और तुम सब के सब (मिलकर) ख़ुदा की रस्सी मज़बूती से थामे रहो और आपस में (एक दूसरे) के फूट न डालो और अपने हाल (ज़ार) पर ख़ुदा के एहसान को तो याद करो जब तुम आपस में (एक दूसरे के) दुश्मन थे तो ख़ुदा ने तुम्हारे दिलों में (एक दूसरे की) उलफ़त पैदा कर दी तो तुम उसके फ़ज़ल से आपस में भाई भाई हो गए और तुम गोया सुलगती हुईआग की भट्टी (दोज़ख) के लब पर (खडे) थे गिरना ही चाहते थे कि ख़ुदा ने तुमको उससे बचा लिया तो ख़ुदा अपने एहकाम यूं वाजेए करके बयान करता है ताकि तुम राहे रास्त पर आ जाओ
104وَلْتَكُن مِّنكُمْ أُمَّةٌ يَدْعُونَ إِلَى الْخَيْرِ وَيَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنكَرِ ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
और तुमसे एक गिरोह ऐसे (लोगों का भी) तो होना चाहिये जो (लोगों को) नेकी की तरफ़ बुलाए अच्छे काम का हुक्म दे और बुरे कामों से रोके और ऐसे ही लोग (आख़ेरत में) अपनी दिली मुरादें पायेंगे
आल-इमरानकुरान सूची
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अनुवाद — आल-इमरान 102

सूरा आल-इमरान आयत 102 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमान वालों ख़ुदा से डरो जितना उससे डरने का…

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Tuesday, August 18, 2026

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