Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَرِيقًا: एक गिरोह या समूह।
- أُوتُوا الْكِتَابَ: वे लोग जिन्हें (तौरात और इंजील) किताब दी गई, अर्थात यहूदी और ईसाई।
- يَرُدُّوكُم: वे तुम्हें लौटा देंगे, पलटा देंगे।
- كَافِرِينَ: इनकार करने वाले, अर्थात ईमान से फिर जाने वाले।
तफसीर:
ऐ ईमान वालो! अगर तुम अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) में से किसी गिरोह की बात मान लो, उनकी सलाह और राय को अपना लो, और उनके कहे पर चलने लगो, तो वे तुम्हें तुम्हारे ईमान के बाद कुफ्र की तरफ लौटा देंगे। उनके दिलों में ईर्ष्या (हसद) और दुश्मनी है, वे चाहते हैं कि तुम सच्चे धर्म से भटक जाओ। वे अपनी बातों और शुब्हात (संदेहों) के जरिए तुम्हारे दीन को कमज़ोर करने की कोशिश करेंगे, ताकि तुम हक़ (सत्य) का इनकार करने लगो, जबकि तुम पहले ईमान ला चुके थे। इसलिए उन पर भरोसा मत करो, न उनकी राय को अपने दीन पर तरजीह दो, और न ही उनकी बातों को अपने दिल में जगह दो। यह एक सख्त चेतावनी है कि उनकी पैरवी करना तुम्हारे ईमान के लिए खतरनाक है।
फ़ायदे:
- मुसलमानों को अपने ईमान की हिफाज़त के लिए हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए, और उन लोगों की बातों से बचना चाहिए जो दीन के दुश्मन हैं।
- यह आयत बताती है कि अहले-किताब की सलाह और मशवरा, चाहे वह किसी भी मामले में हो, अगर दीन से जुड़ी हो तो उसे कबूल करना ईमान के लिए घातक हो सकता है।
- ईमान एक अनमोल नेमत है, इसे बचाए रखने के लिए हर उस चीज़ से दूर रहना ज़रूरी है जो इसे खतरे में डाल सकती है।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे अपने दीन की समझ कुरआन और सुन्नत से हासिल करें, न कि उन लोगों से जो उन्हें गुमराह करना चाहते हैं।
- इससे यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना मेहरबान है कि वह उन्हें पहले से आगाह कर रहा है, ताकि वे उन दुश्मनों के जाल में न फंसें जो उनके ईमान को छीनना चाहते हैं।
📜 आयत 98-102 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 100
सूरा आल-इमरान आयत 100 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमान वालों अगर तुमने अहले किताब के किसी फ़िरके…सूरा आयत 100/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 98–102. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


