ऐ ईमान वालों अगर तुमने अहले किताब के किसी फ़िरके क़ा भी कहना माना तो (याद रखो कि) वह तुमको ईमान लाने के बाद (भी) फिर दुबारा काफ़िर बना छोडेंग़े
📜
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
فَرِيقًا: एक गिरोह या समूह।
أُوتُوا الْكِتَابَ: वे लोग जिन्हें (तौरात और इंजील) किताब दी गई, अर्थात यहूदी और ईसाई।
يَرُدُّوكُم: वे तुम्हें लौटा देंगे, पलटा देंगे।
كَافِرِينَ: इनकार करने वाले, अर्थात ईमान से फिर जाने वाले।
तफसीर:
ऐ ईमान वालो! अगर तुम अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) में से किसी गिरोह की बात मान लो, उनकी सलाह और राय को अपना लो, और उनके कहे पर चलने लगो, तो वे तुम्हें तुम्हारे ईमान के बाद कुफ्र की तरफ लौटा देंगे। उनके दिलों में ईर्ष्या (हसद) और दुश्मनी है, वे चाहते हैं कि तुम सच्चे धर्म से भटक जाओ। वे अपनी बातों और शुब्हात (संदेहों) के जरिए तुम्हारे दीन को कमज़ोर करने की कोशिश करेंगे, ताकि तुम हक़ (सत्य) का इनकार करने लगो, जबकि तुम पहले ईमान ला चुके थे। इसलिए उन पर भरोसा मत करो, न उनकी राय को अपने दीन पर तरजीह दो, और न ही उनकी बातों को अपने दिल में जगह दो। यह एक सख्त चेतावनी है कि उनकी पैरवी करना तुम्हारे ईमान के लिए खतरनाक है।
फ़ायदे:
मुसलमानों को अपने ईमान की हिफाज़त के लिए हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए, और उन लोगों की बातों से बचना चाहिए जो दीन के दुश्मन हैं।
यह आयत बताती है कि अहले-किताब की सलाह और मशवरा, चाहे वह किसी भी मामले में हो, अगर दीन से जुड़ी हो तो उसे कबूल करना ईमान के लिए घातक हो सकता है।
ईमान एक अनमोल नेमत है, इसे बचाए रखने के लिए हर उस चीज़ से दूर रहना ज़रूरी है जो इसे खतरे में डाल सकती है।
यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे अपने दीन की समझ कुरआन और सुन्नत से हासिल करें, न कि उन लोगों से जो उन्हें गुमराह करना चाहते हैं।
इससे यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना मेहरबान है कि वह उन्हें पहले से आगाह कर रहा है, ताकि वे उन दुश्मनों के जाल में न फंसें जो उनके ईमान को छीनना चाहते हैं।
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता खुदा की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढूंढो (ढूंढ) के ईमान लाने वालों को उससे क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खुदा उससे बेख़बर नहीं है
और (भला) तुम क्योंकर काफ़िर बन जाओगे हालॉकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं और जो शख्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।