Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيَقْطَعَ: काट देने के लिए, नष्ट करने के लिए।
- طَرَفًا: एक हिस्सा, एक समूह।
- يَكْبِتَهُمْ: उन्हें अपमानित करे, उन्हें रौंदे, उनके दिलों को जलाए (ग़म और शर्मिंदगी से भर दे)।
- خَائِبِينَ: निराश, असफल, जो अपने मक़सद में कामयाब न हुए।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस नस्र (मदद) और फ़तह (विजय) के हिकमत (उद्देश्य) को बयान कर रही है जो अल्लाह ने मुसलमानों को बद्र के मैदान में अता की। अल्लाह ने यह जीत इसलिए दी ताकि कुफ़्फ़ार (इनकार करने वालों) के एक बड़े हिस्से को जड़ से खत्म कर दे — और बद्र में उनके सत्तर सरदार मारे गए — या उन्हें ऐसी ज़िल्लत और रुसवाई में डाले कि उनके दिल टूट जाएं, उनका ग़ुरूर चूर-चूर हो जाए, और वे अपनी सारी ताक़त और साज़िशों के बावजूद नाकामयाब और मायूस होकर लौटें। उन्होंने मुसलमानों को खत्म करने और इस्लाम की रोशनी बुझाने की ठानी थी, लेकिन अल्लाह ने उन्हें उल्टा सबक सिखाया — कुछ को मौत के घाट उतारा और बाकी को ऐसी हार दी कि वे अपनी जान बचाकर भागे, लेकिन दिल में ग़म और रुसवाई लेकर। यह अल्लाह की क़ुदरत का नमूना था कि जो लोग अल्लाह के दीन के दुश्मन थे, उन्हें उसने इतनी ज़लील हालत में डाला कि उनकी शान-ओ-शौकत मिट्टी में मिल गई।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें दुश्मनों पर ग़ालिब बनाता है, बशर्ते वे सब्र और तक़्वा पर क़ायम रहें।
- जीत का असली मक़सद सिर्फ़ दुश्मन को हराना नहीं, बल्कि अल्लाह के दीन की सरबुलंदी और बातिल (झूठ) का खात्मा है।
- अल्लाह की मदद का नतीजा हमेशा इंसाफ़ और हक़ की बुलंदी होता है, और यह मोमिन के दिल को सुकून और इत्मीनान देता है।
- यह आयत मुसलमानों को हिम्मत देती है कि दुश्मन चाहे कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को वह कभी नाकाम नहीं कर सकता।
- कुफ़्र और ज़ुल्म की बुनियादें भले ही मज़बूत दिखें, लेकिन अल्लाह की मर्ज़ी से वे पल भर में ढह सकती हैं — यही इस्लाम की ताक़त और सच्चाई का सबूत है।
📜 आयत 125-129 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 127
सूरा आल-इमरान आयत 127 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और यह मदद की भी तो) इसलिए कि काफ़िरों के…सूरा आयत 127/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 125–129. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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