आल-इमरान · 148/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
فَآتَاهُمُ اللَّهُ ثَوَابَ الدُّنْيَا وَحُسْنَ ثَوَابِ الْآخِرَةِ ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ ۝١٤٨
Fa aataahumul laahu sawaabad dunyaa wa husna sawaabil Aakhirah; wallaahu yuhibbul muhsineen
📖 हिंदी अर्थ
तो ख़ुदा ने उनको दुनिया में बदला (दिया) और आख़िरत में अच्छा बदला ईनायत फ़रमाया और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता (ही) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثَوَابَ الدُّنْيَا: दुनिया का बदला और इनाम, जिसमें विजय, ग़नीमत (युद्ध में मिलने वाला धन) और धरती पर ताक़त शामिल है।
  • حُسْنَ ثَوَابِ الْآخِرَةِ: आख़िरत का उत्तम बदला, यानी जन्नत और अल्लाह की रज़ा (खुशी)।
  • الْمُحْسِنِينَ: एहसान करने वाले, यानी वे लोग जो अल्लाह की इबादत और उसकी मख़लूक़ (सृष्टि) के साथ भलाई में पूर्णता और खूबसूरती अपनाते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन सब्र करने वाले मोमिनों का ज़िक्र कर रहा है, जिन्होंने जिहाद और अल्लाह के रास्ते में कठिनाइयों का सामना किया। अल्लाह ने उन्हें दोहरा इनाम दिया: एक दुनिया का इनाम, जिसमें उन्हें दुश्मनों पर फ़तह (विजय) दी, उन्हें ज़मीन में ताक़त और इख़्तियार अता किया, और ग़नीमत का माल दिया। दूसरा आख़िरत का उत्तम इनाम, जो उनके लिए अल्लाह की रज़ा, जन्नत के बाग़ और हमेशा रहने वाली नेमतें हैं। आख़िरत के इनाम को "حُسْنَ" (उत्तम) कहकर ख़ास तौर पर ज़ोर दिया गया है, क्योंकि वही असली और स्थायी इनाम है, जो दुनिया के इनाम से कहीं बेहतर और बड़ा है। फिर अल्लाह ने यह बताया कि वह मुहसिनीन (भलाई करने वालों) से मुहब्बत करता है, यानी वे लोग जो अपनी इबादत को ख़ालिस अल्लाह के लिए करते हैं और अपने आचरण में लोगों के साथ भलाई और नेकी का बर्ताव करते हैं।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. अल्लाह अपने सब्र करने वाले बंदों को दुनिया और आख़िरत दोनों में इनाम देता है, इसलिए मुसलमान को चाहिए कि वह मुश्किलों में सब्र करे और अल्लाह पर भरोसा रखे।
  2. आख़िरत का इनाम दुनिया के इनाम से बेहतर और पक्का है, इसलिए इंसान की नीयत और कोशिश का केंद्र आख़िरत की कामयाबी होनी चाहिए।
  3. अल्लाह की मुहब्बत पाने का रास्ता "एहसान" है — यानी इबादत में पूर्णता, अख़लाक़ में भलाई, और लोगों के साथ नेकी का बर्ताव। यही वह गुण है जो इंसान को अल्लाह का प्यारा बनाता है और उसे दुनिया व आख़िरत की भलाई तक पहुँचाता है।


📜 आयत 146-150 — सूरा आल-इमरान

146وَكَأَيِّن مِّن نَّبِيٍّ قَاتَلَ مَعَهُ رِبِّيُّونَ كَثِيرٌ فَمَا وَهَنُوا لِمَا أَصَابَهُمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَمَا ضَعُفُوا وَمَا اسْتَكَانُوا ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ الصَّابِرِينَ
और (मुसलमानों तुम ही नहीं) ऐसे पैग़म्बर बहुत से गुज़र चुके हैं जिनके साथ बहुतेरे अल्लाह वालों ने (राहे खुदा में) जेहाद किया और फिर उनको ख़ुदा की राह में जो मुसीबत पड़ी है न तो उन्होंने हिम्मत हारी न बोदापन किया (और न दुशमन के सामने) गिड़गिड़ाने लगे और साबित क़दम रहने वालों से ख़ुदा उलफ़त रखता है
147وَمَا كَانَ قَوْلَهُمْ إِلَّا أَن قَالُوا رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِي أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
और लुत्फ़ ये है कि उनका क़ौल इसके सिवा कुछ न था कि दुआएं मॉगने लगें कि ऐ हमारे पालने वाले हमारे गुनाह और अपने कामों में हमारी ज्यादतियॉ माफ़ कर और दुश्मनों के मुक़ाबले में हमको साबित क़दम रख और काफ़िरों के गिरोह पर हमको फ़तेह दे
148فَآتَاهُمُ اللَّهُ ثَوَابَ الدُّنْيَا وَحُسْنَ ثَوَابِ الْآخِرَةِ ۗ وَاللَّهُ يُحِبُّ الْمُحْسِنِينَ
तो ख़ुदा ने उनको दुनिया में बदला (दिया) और आख़िरत में अच्छा बदला ईनायत फ़रमाया और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता (ही) है
149يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تُطِيعُوا الَّذِينَ كَفَرُوا يَرُدُّوكُمْ عَلَىٰ أَعْقَابِكُمْ فَتَنقَلِبُوا خَاسِرِينَ
ऐ ईमानदारों अगर तुम लोगों ने काफ़िरों की पैरवी कर ली तो (याद रखो) वह तुमको उलटे पॉव (कुफ़्र की तरफ़) फेर कर ले जाऐंगे फिर उलटे तुम ही घाटे में आ जाओगे
150بَلِ اللَّهُ مَوْلَاكُمْ ۖ وَهُوَ خَيْرُ النَّاصِرِينَ
(तुम किसी की मदद के मोहताज नहीं) बल्कि ख़ुदा तुम्हारा सरपरस्त है और वह सब मददगारों से बेहतर है
आल-इमरानकुरान सूची
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मदनीअवतरण स्थान
148आयत

अनुवाद — आल-इमरान 148

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Wednesday, September 30, 2026

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