अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا: ऐ ईमानवालों!
- إِن تُطِيعُوا: यदि तुम आज्ञा मानोगे
- الَّذِينَ كَفَرُوا: जिन्होंने कुफ्र किया (अल्लाह और उसके रसूल को नहीं माना)
- يَرُدُّوكُمْ عَلَىٰ أَعْقَابِكُمْ: वे तुम्हें तुम्हारी एड़ियों (पिछले पाँव) पर लौटा देंगे (अर्थात तुम्हें धर्म से फेर देंगे)
- فَتَنقَلِبُوا خَاسِرِينَ: तो तुम घाटे में पड़कर (नुकसान उठाकर) लौटोगे
तफसीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालों! जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ को सच्चे दिल से माना और उसके आदेशों पर चलने का प्रण किया! अल्लाह तआला तुम्हें सचेत करता है कि यदि तुम उन लोगों की बात मानोगे जिन्होंने अल्लाह की एकता को झुठलाया और उसके रसूलों पर ईमान नहीं लाए — चाहे वे यहूदी हों, ईसाई हों, मुशरिक हों या मुनाफ़िक़ (दिखावटी मुसलमान) — और उनके कहने पर चलोगे, तो वे तुम्हें सत्य के मार्ग से भटका देंगे। वे तुम्हें तुम्हारे पुराने हाल (कुफ्र और शिर्क) की ओर लौटा देंगे, जैसे कोई व्यक्ति अपनी एड़ियों के बल पीछे लौट जाए। इसका परिणाम यह होगा कि तुम ईमान की दौलत से हाथ धो बैठोगे और दुनिया और आख़िरत दोनों में घाटे में रहोगे — यह सबसे बड़ा घाटा और स्पष्ट विनाश है।
यह चेतावनी उस समय दी गई जब उहुद की लड़ाई में मुसलमानों को कुछ कठिनाई हुई और मुनाफ़िक़ों ने कमज़ोर ईमानवालों को उकसाना शुरू किया कि "अपने (कुफ्फार) भाइयों की ओर लौट जाओ और उनके धर्म में शामिल हो जाओ।" अल्लाह ने साफ़ कर दिया कि यह बिल्कुल घाटे का सौदा है।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक अनमोल सबक देती है — हमारी कामयाबी और सरबुलंदी सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत (आज्ञापालन) में है। जो लोग अल्लाह से दूर हैं, वे कभी हमारा भला नहीं चाह सकते। उनकी सलाह चाहे कितनी भी अच्छी लगे, अगर वह हमें क़ुरआन और सुन्नत से दूर ले जाए, तो वह हमारे लिए ज़हर है।
याद रखिए! ईमान सबसे बड़ी नेमत है। इसे बचाना हर मुसलमान की पहली ज़िम्मेदारी है। दुनिया की कोई भी चीज़ — चाहे वह धन हो, रिश्ते हों या सामाजिक दबाव — ईमान के बदले नहीं बिकनी चाहिए। अल्लाह ने हमें साफ़ रास्ता दिखा दिया है, और जो इस रास्ते पर चलेगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। आइए, हम अपने ईमान को मज़बूत करें, अल्लाह की इताअत को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बनाएँ, और किसी भी ऐसी बात से बचें जो हमें इस रास्ते से भटका सके। अल्लाह हमें सच्चे ईमान पर साबित क़दम रखने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 147-151 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 149
सूरा आल-इमरान आयत 149 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों अगर तुम लोगों ने काफ़िरों की पैरवी कर…सूरा आयत 149/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 147–151. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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