خَيْرُ النَّاصِرِينَ: सबसे उत्तम सहायता करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को स्पष्ट रूप से बता रहा है कि जो काफ़िर लोग तुम्हें धमकी दे रहे हैं या तुम्हें डरा रहे हैं, वे तुम्हारा कोई भला नहीं कर सकते। यदि तुम उनकी बात मान लोगे या उनसे सहायता माँगोगे, तो वे तुम्हें कभी सच्ची मदद नहीं देंगे। बल्कि सच्चाई यह है कि अल्लाह ही तुम्हारा असली संरक्षक और सहायक है। वही तुम्हारी रक्षा करता है, तुम्हें शत्रुओं से बचाता है और तुम्हारे दीन (धर्म) की हिफ़ाज़त करता है। वह सबसे अच्छा सहायक है—उसकी सहायता के आगे किसी और की सहायता की कोई आवश्यकता नहीं। इसलिए तुम्हें केवल उसी पर भरोसा करना चाहिए, उसी से मदद माँगनी चाहिए और उसी की आज्ञा का पालन करना चाहिए। जब अल्लाह तुम्हारा संरक्षक है, तो तुम्हें किसी और की ओर देखने की ज़रूरत नहीं।
फ़ायदे (उपदेश):
मोमिन की पहचान यह है कि वह कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अल्लाह पर ही भरोसा रखता है, क्योंकि अल्लाह ही सबसे अच्छा सहायक है।
यह आयत मुसलमानों को आत्म-सम्मान और आत्म-निर्भरता सिखाती है—हमें काफ़िरों या किसी और से मदद की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, बल्कि अपने रब से जुड़े रहना चाहिए।
अल्लाह की सहायता सबसे श्रेष्ठ है; जब वह साथ हो, तो दुनिया की सारी ताकतें भी मिलकर हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं। यह विश्वास मुसलमान के दिल में साहस और स्थिरता पैदा करता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हर काम में अल्लाह से मदद माँगनी चाहिए और उसी की राह पर चलना चाहिए, क्योंकि वही हमारा असली संरक्षक है।
(तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब तुम्हारा रोब काफ़िरों के दिलों में जमा देंगे इसलिए कि उन लोगों ने ख़ुदा का शरीक बनाया (भी तो) इस चीज़ बुत को जिसे ख़ुदा ने किसी क़िस्म की हुकूमत नहीं दी और (आख़िरकार) उनका ठिकाना दौज़ख़ है और ज़ालिमों का (भी क्या) बुरा ठिकाना है
बेशक खुदा ने (जंगे औहद में भी) अपना (फतेह का) वायदा सच्चा कर दिखाया था जब तुम उसके हुक्म से (पहले ही हमले में) उन (कुफ्फ़ार) को खूब क़त्ल कर रहे थे यहॉ तक की तुम्हारे पसन्द की चीज़ (फ़तेह) तुम्हें दिखा दी उसके बाद भी तुमने (माले ग़नीमत देखकर) बुज़दिलापन किया और हुक्में रसूल (मोर्चे पर जमे रहने) झगड़ा किया और रसूल की नाफ़रमानी की तुममें से कुछ तो तालिबे दुनिया हैं (कि माले ग़नीमत की तरफ़) से झुक पड़े और कुछ तालिबे आख़िरत (कि रसूल पर अपनी जान फ़िदा कर दी) फिर (बुज़दिलेपन ने) तुम्हें उन (कुफ्फ़ार) की की तरफ से फेर दिया (और तुम भाग खड़े हुए) उससे ख़ुदा को तुम्हारा (ईमान अख़लासी) आज़माना मंज़ूर था और (उसपर भी) ख़ुदा ने तुमसे दरगुज़र की और खुदा मोमिनीन पर बड़ा फ़ज़ल करने वाला है
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।