अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَنصُرْكُمُ: वह तुम्हारी सहायता करे, तुम्हें शक्ति और विजय प्रदान करे।
- يَخْذُلْكُمْ: वह तुम्हें छोड़ दे, तुम्हारी सहायता से हाथ खींच ले, तुम्हें स्वयं पर छोड़ दे।
- غَالِبَ: विजयी, प्रभुत्व पाने वाला।
- مِن بَعْدِهِ: उसके (अल्लाह के) पश्चात, उसकी सहायता से वंचित करने के बाद।
- تَوَكَّلَ: भरोसा करना, अपने सारे मामलों में अल्लाह पर निर्भर रहना।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि विजय और पराजय पूरी तरह अल्लाह के हाथ में है। यदि अल्लाह तुम्हारी सहायता करे, तुम्हें अपनी तरफ़ से शक्ति, सामर्थ्य और विजय प्रदान करे—जैसा उसने बद्र के दिन किया था—तो कोई भी ताकत, चाहे वह कितनी ही बड़ी क्यों न हो, तुम्हें पराजित नहीं कर सकती। सारी दुनिया की सेनाएँ भी इकट्ठी हो जाएँ, तो भी वे अल्लाह के फ़ैसले के आगे कुछ नहीं कर सकतीं।
और यदि अल्लाह तुम्हें छोड़ दे, तुम्हारी सहायता से हाथ खींच ले—जैसा उहुद के दिन हुआ जब कुछ लोगों की नाफ़रमानी की वजह से मुसलमानों को पराजय का सामना करना पड़ा—तो फिर कोई नहीं है जो उसके बाद तुम्हारी सहायता कर सके। न कोई फ़रिश्ता, न कोई नबी, न कोई ताकतवर इंसान। क्योंकि सारी सहायता, सारी शक्ति और सारा अधिकार केवल अल्लाह के हाथ में है। वही जब चाहे मदद करे और जब चाहे मदद रोक दे।
इसलिए, ऐ ईमान वालों! तुम्हें किसी इंसान, किसी साम्राज्य, किसी हथियार या किसी सांसारिक साधन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। तुम्हारा भरोसा केवल अल्लाह पर होना चाहिए। वही तुम्हारा रक्षक, सहायक और कार्यसाधक है। मोमिन की पहचान यही है कि वह हर मामले में अल्लाह पर ही तवक्कुल करे, उसी से मदद माँगे और उसी के आगे सर झुकाए।
फ़ायदे (शिक्षाएँ और सबक):
- विजय और पराजय अल्लाह के हाथ में है — यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि न तो जीत किसी की ताकत से मिलती है और न हार किसी की कमज़ोरी से। सब कुछ अल्लाह के इरादे से होता है। इसलिए जीत पर घमंड न करे और हार पर निराश न हो।
- अल्लाह पर भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत है — जब इंसान को यक़ीन हो जाए कि अल्लाह उसके साथ है, तो उसे किसी और की परवाह नहीं रहती। यही तवक्कुल उसे हर मुश्किल में सब्र और सुकून देता है।
- नाफ़रमानी से सहायता छिन जाती है — उहुद की घटना से हमें सबक मिलता है कि अल्लाह के हुक्म की उल्लंघना करने से उसकी मदद रुक जाती है। इसलिए हर हाल में अल्लाह के आदेशों का पालन करना चाहिए।
- मोमिन की पहचान तवक्कुल है — यह आयत स्पष्ट करती है कि सच्चा ईमान वही है जो अल्लाह पर पूर्ण भरोसा रखे। यह भरोसा उसे बेचैनी, डर और लालच से मुक्त कर देता है।
- अल्लाह ही एकमात्र सहायक है — इंसान चाहे कितनी ही योजनाएँ बना ले, लेकिन सच्ची सहायता केवल अल्लाह ही कर सकता है। इसलिए हर काम में उसी से मदद माँगनी चाहिए और उसी की तरफ़ रुजू करना चाहिए।
📜 आयत 158-162 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 160
सूरा आल-इमरान आयत 160 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुसलमानों याद रखो) अगर ख़ुदा ने तुम्हारी मदद की तो…सूरा आयत 160/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 158–162. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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