आल-इमरान · 160/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِن يَنصُرْكُمُ اللَّهُ فَلَا غَالِبَ لَكُمْ ۖ وَإِن يَخْذُلْكُمْ فَمَن ذَا الَّذِي يَنصُرُكُم مِّن بَعْدِهِ ۗ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ ۝١٦٠
Iny-yansurkumul laahu falaa ghaaliba lakum wa iny-yakhzulkum faman zal lazee yansurukum mim ba`dih; wa `alal laahi falyatawakkalil mu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
(मुसलमानों याद रखो) अगर ख़ुदा ने तुम्हारी मदद की तो फिर कोई तुमपर ग़ालिब नहीं आ सकता और अगर ख़ुदा तुमको छोड़ दे तो फिर कौन ऐसा है जो उसके बाद तुम्हारी मदद को खड़ा हो और मोमिनीन को चाहिये कि ख़ुदा ही पर भरोसा रखें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَنصُرْكُمُ: वह तुम्हारी सहायता करे, तुम्हें शक्ति और विजय प्रदान करे।
  • يَخْذُلْكُمْ: वह तुम्हें छोड़ दे, तुम्हारी सहायता से हाथ खींच ले, तुम्हें स्वयं पर छोड़ दे।
  • غَالِبَ: विजयी, प्रभुत्व पाने वाला।
  • مِن بَعْدِهِ: उसके (अल्लाह के) पश्चात, उसकी सहायता से वंचित करने के बाद।
  • تَوَكَّلَ: भरोसा करना, अपने सारे मामलों में अल्लाह पर निर्भर रहना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि विजय और पराजय पूरी तरह अल्लाह के हाथ में है। यदि अल्लाह तुम्हारी सहायता करे, तुम्हें अपनी तरफ़ से शक्ति, सामर्थ्य और विजय प्रदान करे—जैसा उसने बद्र के दिन किया था—तो कोई भी ताकत, चाहे वह कितनी ही बड़ी क्यों न हो, तुम्हें पराजित नहीं कर सकती। सारी दुनिया की सेनाएँ भी इकट्ठी हो जाएँ, तो भी वे अल्लाह के फ़ैसले के आगे कुछ नहीं कर सकतीं।

और यदि अल्लाह तुम्हें छोड़ दे, तुम्हारी सहायता से हाथ खींच ले—जैसा उहुद के दिन हुआ जब कुछ लोगों की नाफ़रमानी की वजह से मुसलमानों को पराजय का सामना करना पड़ा—तो फिर कोई नहीं है जो उसके बाद तुम्हारी सहायता कर सके। न कोई फ़रिश्ता, न कोई नबी, न कोई ताकतवर इंसान। क्योंकि सारी सहायता, सारी शक्ति और सारा अधिकार केवल अल्लाह के हाथ में है। वही जब चाहे मदद करे और जब चाहे मदद रोक दे।

इसलिए, ऐ ईमान वालों! तुम्हें किसी इंसान, किसी साम्राज्य, किसी हथियार या किसी सांसारिक साधन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। तुम्हारा भरोसा केवल अल्लाह पर होना चाहिए। वही तुम्हारा रक्षक, सहायक और कार्यसाधक है। मोमिन की पहचान यही है कि वह हर मामले में अल्लाह पर ही तवक्कुल करे, उसी से मदद माँगे और उसी के आगे सर झुकाए।


फ़ायदे (शिक्षाएँ और सबक):

  1. विजय और पराजय अल्लाह के हाथ में है — यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि न तो जीत किसी की ताकत से मिलती है और न हार किसी की कमज़ोरी से। सब कुछ अल्लाह के इरादे से होता है। इसलिए जीत पर घमंड न करे और हार पर निराश न हो।
  2. अल्लाह पर भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत है — जब इंसान को यक़ीन हो जाए कि अल्लाह उसके साथ है, तो उसे किसी और की परवाह नहीं रहती। यही तवक्कुल उसे हर मुश्किल में सब्र और सुकून देता है।
  3. नाफ़रमानी से सहायता छिन जाती है — उहुद की घटना से हमें सबक मिलता है कि अल्लाह के हुक्म की उल्लंघना करने से उसकी मदद रुक जाती है। इसलिए हर हाल में अल्लाह के आदेशों का पालन करना चाहिए।
  4. मोमिन की पहचान तवक्कुल है — यह आयत स्पष्ट करती है कि सच्चा ईमान वही है जो अल्लाह पर पूर्ण भरोसा रखे। यह भरोसा उसे बेचैनी, डर और लालच से मुक्त कर देता है।
  5. अल्लाह ही एकमात्र सहायक है — इंसान चाहे कितनी ही योजनाएँ बना ले, लेकिन सच्ची सहायता केवल अल्लाह ही कर सकता है। इसलिए हर काम में उसी से मदद माँगनी चाहिए और उसी की तरफ़ रुजू करना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 158-162 — आल-इमरान

158وَلَئِن مُّتُّمْ أَوْ قُتِلْتُمْ لَإِلَى اللَّهِ تُحْشَرُونَ
और अगर तुम (अपनी मौत से) मरो या मारे जाओ (आख़िरकार) ख़ुदा ही की तरफ़ (क़ब्रों से) उठाए जाओगे
159فَبِمَا رَحْمَةٍ مِّنَ اللَّهِ لِنتَ لَهُمْ ۖ وَلَوْ كُنتَ فَظًّا غَلِيظَ الْقَلْبِ لَانفَضُّوا مِنْ حَوْلِكَ ۖ فَاعْفُ عَنْهُمْ وَاسْتَغْفِرْ لَهُمْ وَشَاوِرْهُمْ فِي الْأَمْرِ ۖ فَإِذَا عَزَمْتَ فَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الْمُتَوَكِّلِينَ
(तो ऐ रसूल ये भी) ख़ुदा की एक मेहरबानी है कि तुम (सा) नरमदिल (सरदार) उनको मिला और तुम अगर बदमिज़ाज और सख्त दिल होते तब तो ये लोग (ख़ुदा जाने कब के) तुम्हारे गिर्द से तितर बितर हो गए होते पस (अब भी) तुम उनसे दरगुज़र करो और उनके लिए मग़फेरत की दुआ मॉगो और (साबिक़ दस्तूरे ज़ाहिरा) उनसे काम काज में मशवरा कर लिया करो (मगर) इस पर भी जब किसी काम को ठान लो तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखो (क्योंकि जो लोग ख़ुदा पर भरोसा रखते हैं ख़ुदा उनको ज़रूर दोस्त रखता है
160إِن يَنصُرْكُمُ اللَّهُ فَلَا غَالِبَ لَكُمْ ۖ وَإِن يَخْذُلْكُمْ فَمَن ذَا الَّذِي يَنصُرُكُم مِّن بَعْدِهِ ۗ وَعَلَى اللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ
(मुसलमानों याद रखो) अगर ख़ुदा ने तुम्हारी मदद की तो फिर कोई तुमपर ग़ालिब नहीं आ सकता और अगर ख़ुदा तुमको छोड़ दे तो फिर कौन ऐसा है जो उसके बाद तुम्हारी मदद को खड़ा हो और मोमिनीन को चाहिये कि ख़ुदा ही पर भरोसा रखें
161وَمَا كَانَ لِنَبِيٍّ أَن يَغُلَّ ۚ وَمَن يَغْلُلْ يَأْتِ بِمَا غَلَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ ثُمَّ تُوَفَّىٰ كُلُّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़) ये शान नहीं कि ख्यानत करे और ख्यानत करेगा तो जो चीज़ ख्यानत की है क़यामत के दिन वही चीज़ (बिलकुल वैसा ही) ख़ुदा के सामने लाना होगा फिर हर शख्स अपने किए का पूरा पूरा बदला पाएगा और उनकी किसी तरह हक़तल्फ़ी नहीं की जाएगी
162أَفَمَنِ اتَّبَعَ رِضْوَانَ اللَّهِ كَمَن بَاءَ بِسَخَطٍ مِّنَ اللَّهِ وَمَأْوَاهُ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
भला जो शख्स ख़ुदा की ख़ुशनूदी का पाबन्द हो क्या वह उस शख्स के बराबर हो सकता है जो ख़ुदा के गज़ब में गिरफ्तार हो और जिसका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है
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अनुवाद — आल-इमरान 160

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Tuesday, August 18, 2026

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