Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَغُلَّ (यगुल्ल): ख़ियानत करना, यानी ग़नीमत (युद्ध में मिलने वाले धन) में से कुछ छिपाना या हड़पना।
- غَلَّ (ग़ल्ल): जो चीज़ ख़ियानत से ली गई हो, उसे लेकर आना।
- تُوَفَّى (तुवफ्फ़ा): पूरा-पूरा दिया जाना, बिना किसी कमी के।
- لَا يُظْلَمُونَ (ला युज़लमून): उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, न उनके गुनाह बढ़ाए जाएँगे और न नेकियाँ घटाई जाएँगी।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत एक बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा देती है और नबी करीम ﷺ की पाक सफ़त (पवित्र गुण) को स्पष्ट करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि किसी भी नबी के लिए यह संभव नहीं है कि वह ख़ियानत करे, यानी ग़नीमत के माल में से या किसी और अमानत में से कुछ छिपाए या हड़प करे। नबियों की शान इससे बहुत ऊँची है — वे सच्चाई, अमानतदारी और पाकीज़गी की मिसाल होते हैं। यह आयत उस समय नाज़िल हुई जब कुछ लोगों ने ग़नीमत के माल के बँटवारे में नबी ﷺ पर ख़ियानत का इल्ज़ाम लगाने की कोशिश की, तो अल्लाह ने उनकी बात को रद्द कर दिया और नबी की पाकीज़गी का ऐलान किया।
फिर अल्लाह तआला ने चेतावनी दी कि जो कोई भी ख़ियानत करेगा, वह क़ियामत के दिन उस चीज़ को लेकर आएगा जो उसने ख़ियानत से ली थी — वह उसके गले में लटकी होगी या उसके साथ होगी, और सारे लोगों के सामने उसे रुसवा किया जाएगा। यह उस व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी और अज़ाब का दिन होगा। यह अल्लाह का न्याय है कि कोई भी काम छिपा नहीं रहेगा, हर चीज़ सामने आ जाएगी।
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि हर व्यक्ति को उसके किए का पूरा-पूरा बदला मिलेगा — अच्छाई का अच्छा बदला और बुराई का बुरा बदला। और अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करेगा — न किसी के गुनाह बढ़ाएगा और न उसकी नेकियाँ घटाएगा। अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल कामिल है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अमानतदारी और सच्चाई इस्लाम की बुनियाद हैं। जिस तरह नबी ﷺ हर मामले में अमानतदार थे, उसी तरह हमें भी अपनी ज़िंदगी में अमानतदार बनना चाहिए — चाहे वह दूसरों का माल हो, उनके राज़ हों, या कोई भी ज़िम्मेदारी। ख़ियानत करने वाला चाहे दुनिया में बच जाए, लेकिन क़ियामत के दिन उसे ज़रूर रुसवा होना पड़ेगा। यह आयत हमें यह भी यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल सही है — कोई भी अच्छा काम बेकार नहीं जाएगा और कोई बुरा काम बिना सज़ा के नहीं रहेगा। इसलिए हमें हमेशा सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलना चाहिए, क्योंकि यही राह कामयाबी और अल्लाह की रज़ा तक पहुँचाती है। अल्लाह हमें अमानतदार और सच्चे बंदे बनाए। आमीन।
📜 आयत 159-163 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 161
सूरा आल-इमरान आयत 161 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (तुम्हारा गुमान बिल्कुल ग़लत है) किसी नबी की (हरगिज़)…सूरा आयत 161/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 159–163. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


