अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَبِمَا رَحْمَةٍ – अर्थात अल्लाह की एक विशेष रहमत (दया) के कारण।
- لِنتَ لَهُمْ – आप उनके लिए नर्म और नरमी वाले बने।
- فَظًّا – कठोर वाणी वाला, सख्त मिजाज।
- غَلِيظَ الْقَلْبِ – पत्थर दिल, कठोर हृदय वाला।
- لَانفَضُّوا – तो वे बिखर जाते, तितर-बितर हो जाते।
- فَاعْفُ عَنْهُمْ – उन्हें माफ कर दीजिए।
- وَاسْتَغْفِرْ لَهُمْ – उनके लिए अल्लाह से माफी मांगिए।
- وَشَاوِرْهُمْ – उनसे सलाह-मशविरा कीजिए।
- عَزَمْتَ – आपने दृढ़ संकल्प कर लिया।
- تَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ – अल्लाह पर भरोसा कीजिए।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! यह आपके लिए अल्लाह की बहुत बड़ी रहमत थी कि उसने आपको नर्म दिल और सहनशील बनाया। जब उहुद की जंग में आपके साथियों ने आपके हुक्म की खिलाफत की और आपको तकलीफ पहुंचाई, तब भी आप उनके साथ नरमी और मुहब्बत से पेश आए। अगर आप सख्त मिजाज, कठोर वाणी और पत्थर दिल होते, तो वे सब आपके इर्द-गिर्द से बिखर जाते और कोई आपके साथ न रहता। यह आपकी नरमी ही थी जिसने उनके दिलों को आपसे जोड़े रखा।
इसलिए, ऐ नबी! आप उनकी उस गलती को माफ कर दीजिए जो उन्होंने उहुद में की थी, और उनके लिए अल्लाह से माफी की दुआ मांगिए। साथ ही, उनके दिलों को खुश रखने और उनकी राय की कद्र करने के लिए उनसे मशविरा किया कीजिए, खासकर जंग और दूसरे मामलों में जिनमें अल्लाह की तरफ से कोई स्पष्ट हुक्म न आया हो। मशविरा करने के बाद जब आप किसी काम पर दृढ़ संकल्प कर लें, तो उसे अंजाम दीजिए और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखिए, क्योंकि अल्लाह उन्हीं से मुहब्बत करता है जो उस पर भरोसा करते हैं, और वह उनकी मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में नरमी, माफी, सलाह-मशविरा और अल्लाह पर भरोसा कितनी अहम चीजें हैं। अल्लाह के नबी ﷺ की सीरत हमारे लिए सबसे अच्छा नमूना है। अगर हम चाहते हैं कि लोग हमारी बात मानें और हमारे साथ जुड़ें, तो हमें भी नरम दिल और अच्छे अख्लाक वाला बनना होगा। कठोरता और गुस्सा लोगों को दूर भगाता है, जबकि नरमी और मुहब्बत दिलों को जोड़ती है। यही रास्ता कामयाबी का है — अल्लाह पर भरोसा करो, उसकी रहमत के साथ काम करो, और लोगों के साथ हुस्न-ए-सुलूक (अच्छा व्यवहार) रखो। अल्लाह उन्हीं को प्यार करता है जो उस पर भरोसा करते हैं और उसकी राह में सब्र और नरमी से काम लेते हैं।
📜 आयत 157-161 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 159
सूरा आल-इमरान आयत 159 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो ऐ रसूल ये भी) ख़ुदा की एक मेहरबानी है…सूरा आयत 159/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 157–161. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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