आल-इमरान · 193/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلْإِيمَانِ أَنْ آمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا ۚ رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْأَبْرَارِ ۝١٩٣
Rabbanaaa innanaa sami`naa munaadiyai yunaadee lil eemaani an aaminoo bi Rabbikum fa aamannaa; Rabbanaa faghfir lanaa zunoobanaa wa kaffir `annaa saiyi aatina wa tawaffanaa ma`al abraar
📖 हिंदी अर्थ
ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُنَادِيًا: पुकारने वाला, आवाज़ देने वाला — यहाँ अर्थ है अल्लाह के रसूल (ﷺ)।
  • كَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا: हमारी बुराइयों को मिटा दे, ढक दे और उन पर दरगुज़र फ़रमा।
  • تَوَفَّنَا: हमारी मौत का वक़्त आए तो हमें उठा ले।
  • مَعَ الْأَبْرَارِ: नेक और सच्चे लोगों के साथ।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह दुआ उन मोमिनों की ज़ुबान से है जिन्होंने हक़ की आवाज़ को पहचाना और उसे क़ुबूल किया। वे अल्लाह से अर्ज़ करते हैं: "ऐ हमारे रब! हमने एक पुकारने वाले की आवाज़ सुनी — और वह तेरे नबी मुहम्मद (ﷺ) थे — जो लोगों को ईमान की तरफ बुला रहे थे और कह रहे थे: 'अपने रब पर ईमान लाओ।' हमने यह पुकार सुनी, उसे सच माना, और तेरी वहदानियत (एक होने) का इक़रार कर लिया। हमने उस दीन को क़ुबूल कर लिया जिसकी तरफ वह बुला रहे थे।

फिर वे अल्लाह से तीन चीज़ें माँगते हैं:

  1. मग़फ़िरत: "ऐ हमारे रब! हमारे गुनाहों को बख़्श दे — चाहे वे बड़े हों या छोटे — ताकि तू हमें रुसवा न करे।"
  2. सैय्यातों की पर्दापोशी: "हमारी बुराइयों को मिटा दे और उन्हें ढक दे, ताकि वे हमारे ख़िलाफ़ गवाही न दें। हमें उनकी सज़ा से बचा ले।"
  3. नेक लोगों के साथ उठना: "जब हमारी मौत का वक़्त आए, तो हमें नेक लोगों — नबियों, सिद्दीक़ों और सालिहीन — के साथ उठा। हमें उन्हीं के साथ हश्र देना।"

यह दुआ सिखाती है कि ईमान लाने के बाद इंसान को अपने अतीत के गुनाहों से तौबा करना चाहिए और अल्लाह से अच्छे अंजाम की दुआ माँगनी चाहिए।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. सुनने की अहमियत: यह आयत बताती है कि हक़ की आवाज़ सुनना और उसे क़ुबूल करना कितनी बड़ी नेमत है। जिसने दीन की पुकार सुनी और ईमान लाया, उसने अपनी कामयाबी का रास्ता पा लिया।
  2. दुआ का तरीक़ा: हमें अल्लाह से माँगना चाहिए — पहले गुनाहों की माफ़ी, फिर बुराइयों की पर्दापोशी, और फिर अच्छे अंजाम की दुआ। यह तरतीब हमें सिखाती है कि पहले अपने अतीत को सुधारें, फिर भविष्य की भलाई माँगें।
  3. नेक लोगों की संगत: मोमिन को चाहिए कि वह नेक लोगों की सोहबत में रहे और उन्हीं के साथ उठने की दुआ करे। संगत का असर इंसान पर बहुत गहरा होता है।
  4. उम्मीद और तवक्कुल: यह दुआ सिखाती है कि इंसान चाहे कितना ही गुनाहगार हो, अल्लाह की रहमत से उसे कभी निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह माफ़ करने वाला और दरगुज़र करने वाला है।
  5. अच्छी मौत की दुआ: हमें हमेशा अच्छी मौत (हुस्न-ए-ख़ातिमा) की दुआ करनी चाहिए, ताकि हमारा अंजाम नेक हो और हम अल्लाह के नेक बंदों के साथ उठाए जाएँ।


📜 आयत 191-195 — आल-इमरान

191الَّذِينَ يَذْكُرُونَ اللَّهَ قِيَامًا وَقُعُودًا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِي خَلْقِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَاطِلًا سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में) ख़ुदा का ज़िक्र करते हैं और आसमानों और ज़मीन की बनावट में ग़ौर व फ़िक्र करते हैं और (बेसाख्ता) कह उठते हैं कि ख़ुदावन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़क के अज़ाब से बचा
192رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं
193رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلْإِيمَانِ أَنْ آمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا ۚ رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْأَبْرَارِ
ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले
194رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ
और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं
195فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّي لَا أُضِيعُ عَمَلَ عَامِلٍ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ ۖ بَعْضُكُم مِّن بَعْضٍ ۖ فَالَّذِينَ هَاجَرُوا وَأُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَأُوذُوا فِي سَبِيلِي وَقَاتَلُوا وَقُتِلُوا لَأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ثَوَابًا مِّنْ عِندِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الثَّوَابِ
तो उनके परवरदिगार ने दुआ कुबूल कर ली और (फ़रमाया) कि हम तुममें से किसी काम करने वाले के काम को अकारत नहीं करते मर्द हो या औरत (उस में कुछ किसी की खुसूसियत नहीं क्योंकि) तुम एक दूसरे (की जिन्स) से हो जो लोग (हमारे लिए वतन आवारा हुए) और शहर बदर किए गए और उन्होंने हमारी राह में अज़ीयतें उठायीं और (कुफ्फ़र से) जंग की और शहीद हुए मैं उनकी बुराईयों से ज़रूर दरगुज़र करूंगा और उन्हें बेहिश्त के उन बाग़ों में ले जाऊॅगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं ख़ुदा के यहॉ ये उनके किये का बदला है और ख़ुदा (ऐसा ही है कि उस) के यहॉ तो अच्छा ही बदला है
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अनुवाद — आल-इमरान 193

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सूरा आयत 193/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 191–195. हिंदी अर्थ: اردو.




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Wednesday, August 19, 2026

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