अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَآتِنَا: हमें प्रदान कर, दे दे।
- مَا وَعَدتَّنَا: जो वादा तूने हमसे किया है।
- عَلَىٰ رُسُلِكَ: अपने रसूलों की ज़बानी (अर्थात जो वादे तूने अपने पैग़म्बरों के माध्यम से बताए)।
- لَا تُخْزِنَا: हमें रुसवा न कर, अपमानित न कर।
- الْمِيعَادَ: वादा, अहद।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह दुआ मोमिनों की दुआओं में से एक बेहद प्यारी और दिल को छू लेने वाली दुआ है, जो उन्होंने अपने रब से की। वे कहते हैं: "ऐ हमारे रब! हमें वह सब कुछ अता कर जो तूने अपने रसूलों की ज़बानी हमसे वादा किया है।" यानी ऐ अल्लाह! तूने अपने पैग़म्बरों के द्वारा हमें जो बशारतें दी हैं—नुसरत (मदद), तामकीन (दुनिया में दीन की पकड़), हिदायत (सीधा रास्ता), तौफ़ीक़ (नेक काम करने की ताक़त), और आख़िरत में जन्नत और मग़फ़िरत—यह सब हमें अता कर दे। यह दुआ सिर्फ़ ज़बानी इल्तिजा नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों से निकली हुई पुकार है, जो यक़ीन और भरोसे के साथ की जाती है।
फिर वे कहते हैं: "और क़ियामत के दिन हमें रुसवा न कर।" यानी ऐ रब! उस दिन हमें शर्मिंदा न कर, हमारे गुनाहों को लोगों के सामने न खोल, हमें जहन्नम की तरफ़ न धकेल। मोमिन को अपने गुनाहों का एहसास होता है, इसलिए वह डरता है कि कहीं उसके अमल उसे रुसवा न कर दें। यही डर उसे रब की तरफ़ झुकाता है और उसकी रहमत की तरफ़ ले जाता है।
आख़िर में वे अपनी दुआ को इस यक़ीन के साथ मुकम्मल करते हैं: "बेशक तू वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता।" यह जुमला दुआ की ताक़त है—मोमिन जानता है कि अल्लाह का वादा सच्चा है, वह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता। जब वह यह कहता है, तो उसे पूरा यक़ीन होता है कि उसकी दुआ ज़रूर क़ुबूल होगी, क्योंकि अल्लाह ने वादा किया है कि "मुझसे दुआ माँगो, मैं क़ुबूल करूँगा।"
इस दुआ में "ऐ हमारे रब!" का बार-बार दोहराना बंदगी और इल्तिजा की इंतिहा है। यह सिखाता है कि बंदे को चाहिए कि वह अपने रब के सामने अपनी हाजतों को बयान करे, उसी से माँगे, और उसी पर भरोसा रखे। यह दुआ हमें सिखाती है कि दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई माँगनी चाहिए—दुनिया में हिदायत और नुसरत, और आख़िरत में बचाव और इज़्ज़त।
यह दुआ हर मोमिन के लिए नूर है। जो शख्स इस दुआ को पढ़ता है और उस पर अमल करता है, वह अल्लाह के वादों पर भरोसा करता है, अपने गुनाहों से तौबा करता है, और अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखता है। अल्लाह तआला अपने बंदों से बेहद करीम है, वह अपने वादे को पूरा करने वाला है, और वह अपने बंदों की दुआओं को सुनने वाला और क़ुबूल करने वाला है।
📜 आयत 192-196 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 194
सूरा आल-इमरान आयत 194 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ…सूरा आयत 194/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 192–196. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








