आल-इमरान · 194/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ ۝١٩٤
Rabbanaa wa aatinaa maa wa`attanaa `alaa Rusulika wa laa tukhzinaa Yawmal Qiyaamah; innaka laa tukhliful mee`aad
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَآتِنَا: हमें प्रदान कर, दे दे।
  • مَا وَعَدتَّنَا: जो वादा तूने हमसे किया है।
  • عَلَىٰ رُسُلِكَ: अपने रसूलों की ज़बानी (अर्थात जो वादे तूने अपने पैग़म्बरों के माध्यम से बताए)।
  • لَا تُخْزِنَا: हमें रुसवा न कर, अपमानित न कर।
  • الْمِيعَادَ: वादा, अहद।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह दुआ मोमिनों की दुआओं में से एक बेहद प्यारी और दिल को छू लेने वाली दुआ है, जो उन्होंने अपने रब से की। वे कहते हैं: "ऐ हमारे रब! हमें वह सब कुछ अता कर जो तूने अपने रसूलों की ज़बानी हमसे वादा किया है।" यानी ऐ अल्लाह! तूने अपने पैग़म्बरों के द्वारा हमें जो बशारतें दी हैं—नुसरत (मदद), तामकीन (दुनिया में दीन की पकड़), हिदायत (सीधा रास्ता), तौफ़ीक़ (नेक काम करने की ताक़त), और आख़िरत में जन्नत और मग़फ़िरत—यह सब हमें अता कर दे। यह दुआ सिर्फ़ ज़बानी इल्तिजा नहीं, बल्कि दिल की गहराइयों से निकली हुई पुकार है, जो यक़ीन और भरोसे के साथ की जाती है।

फिर वे कहते हैं: "और क़ियामत के दिन हमें रुसवा न कर।" यानी ऐ रब! उस दिन हमें शर्मिंदा न कर, हमारे गुनाहों को लोगों के सामने न खोल, हमें जहन्नम की तरफ़ न धकेल। मोमिन को अपने गुनाहों का एहसास होता है, इसलिए वह डरता है कि कहीं उसके अमल उसे रुसवा न कर दें। यही डर उसे रब की तरफ़ झुकाता है और उसकी रहमत की तरफ़ ले जाता है।

आख़िर में वे अपनी दुआ को इस यक़ीन के साथ मुकम्मल करते हैं: "बेशक तू वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता।" यह जुमला दुआ की ताक़त है—मोमिन जानता है कि अल्लाह का वादा सच्चा है, वह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता। जब वह यह कहता है, तो उसे पूरा यक़ीन होता है कि उसकी दुआ ज़रूर क़ुबूल होगी, क्योंकि अल्लाह ने वादा किया है कि "मुझसे दुआ माँगो, मैं क़ुबूल करूँगा।"

इस दुआ में "ऐ हमारे रब!" का बार-बार दोहराना बंदगी और इल्तिजा की इंतिहा है। यह सिखाता है कि बंदे को चाहिए कि वह अपने रब के सामने अपनी हाजतों को बयान करे, उसी से माँगे, और उसी पर भरोसा रखे। यह दुआ हमें सिखाती है कि दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई माँगनी चाहिए—दुनिया में हिदायत और नुसरत, और आख़िरत में बचाव और इज़्ज़त।

यह दुआ हर मोमिन के लिए नूर है। जो शख्स इस दुआ को पढ़ता है और उस पर अमल करता है, वह अल्लाह के वादों पर भरोसा करता है, अपने गुनाहों से तौबा करता है, और अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखता है। अल्लाह तआला अपने बंदों से बेहद करीम है, वह अपने वादे को पूरा करने वाला है, और वह अपने बंदों की दुआओं को सुनने वाला और क़ुबूल करने वाला है।



📜 आयत 192-196 — आल-इमरान

192رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं
193رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلْإِيمَانِ أَنْ آمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا ۚ رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْأَبْرَارِ
ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले
194رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ
और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं
195فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّي لَا أُضِيعُ عَمَلَ عَامِلٍ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ ۖ بَعْضُكُم مِّن بَعْضٍ ۖ فَالَّذِينَ هَاجَرُوا وَأُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِمْ وَأُوذُوا فِي سَبِيلِي وَقَاتَلُوا وَقُتِلُوا لَأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ثَوَابًا مِّنْ عِندِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الثَّوَابِ
तो उनके परवरदिगार ने दुआ कुबूल कर ली और (फ़रमाया) कि हम तुममें से किसी काम करने वाले के काम को अकारत नहीं करते मर्द हो या औरत (उस में कुछ किसी की खुसूसियत नहीं क्योंकि) तुम एक दूसरे (की जिन्स) से हो जो लोग (हमारे लिए वतन आवारा हुए) और शहर बदर किए गए और उन्होंने हमारी राह में अज़ीयतें उठायीं और (कुफ्फ़र से) जंग की और शहीद हुए मैं उनकी बुराईयों से ज़रूर दरगुज़र करूंगा और उन्हें बेहिश्त के उन बाग़ों में ले जाऊॅगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं ख़ुदा के यहॉ ये उनके किये का बदला है और ख़ुदा (ऐसा ही है कि उस) के यहॉ तो अच्छा ही बदला है
196لَا يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ الَّذِينَ كَفَرُوا فِي الْبِلَادِ
(ऐ रसूल) काफ़िरों का शहरों शहरों चैन करते फिरना तुम्हे धोखे में न डाले
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अनुवाद — आल-इमरान 194

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Tuesday, August 18, 2026

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