आल-इमरान · 61/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
فَمَنْ حَاجَّكَ فِيهِ مِن بَعْدِ مَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَاءَنَا وَأَبْنَاءَكُمْ وَنِسَاءَنَا وَنِسَاءَكُمْ وَأَنفُسَنَا وَأَنفُسَكُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَتَ اللَّهِ عَلَى الْكَاذِبِينَ ۝٦١
Faman haaajjaka feehi mim ba`di maa jaaa`aka minal `ilmi faqul ta`aalaw nad`u abnaaa`anaa wa abnaaa`akum wa nisaaa`anaa wa nisaaa`akum wa anfusanaa wa anfusakum summa nabtahil fanaj`al la`natal laahi `alal kaazibeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद भी अगर तुम से कोई (नसरानी) ईसा के बारे में हुज्जत करें तो कहो कि (अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को और हम अपनी औरतों को (बुलाएं) और तुम अपनी औरतों को और हम अपनी जानों को बुलाएं ओर तुम अपनी जानों को
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَاجَّكَ: तुमसे झगड़ा करे, विवाद करे
  • نَبْتَهِلْ: हम दुआ में गिड़गिड़ाएँ, अल्लाह से प्रार्थना करें
  • لَعْنَتَ: अभिशाप, रहमत से दूर करने की दुआ

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जब आपके पास ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में सच्चा और पूरा ज्ञान आ चुका है, और इसके बाद भी नजरान के ईसाई आपसे ईसा के मामले में झगड़ा करें और यह दावा करें कि वह अल्लाह के बंदे नहीं बल्कि अल्लाह के बेटे हैं, तो आप उनसे कह दें: "आओ, हम अपने बेटों को बुलाएँ और तुम अपने बेटों को, हम अपनी स्त्रियों को बुलाएँ और तुम अपनी स्त्रियों को, हम अपने आपको बुलाएँ और तुम अपने आपको। फिर हम सब मिलकर अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर दुआ करें और अल्लाह की लानत (अभिशाप) डालें उन झूठों पर जो ईसा के बारे में झूठ बोल रहे हैं।"

यह वही प्रसिद्ध "मुबाहिला" (आपसी लानत का मुक़ाबला) है, जिसका आदेश अल्लाह ने अपने नबी को दिया था। जब नबी ﷺ ने अपने परिवार के सबसे प्यारे लोगों — हज़रत अली, हज़रत फ़ातिमा, हज़रत हसन और हज़रत हुसैन — को साथ लेकर मुबाहिले के लिए जाने का इरादा किया, तो ईसाइयों ने यह देखकर कि ये लोग सच्चे और पवित्र हैं, मुबाहिला करने से इनकार कर दिया और जज़िया (कर) देने पर राज़ी हो गए।

फ़ायदे (सीख):

  1. सच्चाई का प्रमाण: यह आयत नबी ﷺ की सच्चाई का सबसे बड़ा प्रमाण है। जब कोई व्यक्ति अपने सबसे प्यारे बच्चों और परिवार को साथ लेकर लानत का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो, तो यह उसके सच्चे होने की गवाही है।
  2. परिवार की अहमियत: इस आयत से पता चलता है कि सच्चाई के लिए अपने परिवार को भी आगे करना पड़े तो करना चाहिए। नबी ﷺ ने अपने सबसे प्यारे लोगों को इसलिए साथ लिया क्योंकि वे जानते थे कि सच्चाई के साथ हैं।
  3. हिम्मत और बहादुरी: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि सच्चाई पर डटे रहो और झूठ के सामने कभी घुटने मत टेको। जब सच्चाई आपके साथ हो, तो आपको किसी से डरने की ज़रूरत नहीं।
  4. इस्लाम में परिवार की पवित्रता: इस आयत में नबी ﷺ ने अपने दामाद, बेटी और नवासों को साथ लिया, जो दिखाता है कि इस्लाम में परिवार के रिश्ते कितने पवित्र और महत्वपूर्ण हैं।
  5. दुआ की ताक़त: जब सच्चाई और ईमान के साथ दुआ की जाए, तो अल्लाह उसे ज़रूर सुनता है। यह हमें सिखाता है कि मुश्किल हालात में अल्लाह से गिड़गिड़ाकर दुआ करनी चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 59-63 — आल-इमरान

59إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ اللَّهِ كَمَثَلِ آدَمَ ۖ خَلَقَهُ مِن تُرَابٍ ثُمَّ قَالَ لَهُ كُن فَيَكُونُ
ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि 'हो जा' पस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया
60الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُن مِّنَ الْمُمْتَرِينَ
(ऐ रसूल ये है) हक़ बात (जो) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (बताई जाती है) तो तुम शक करने वालों में से न हो जाना
61فَمَنْ حَاجَّكَ فِيهِ مِن بَعْدِ مَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَاءَنَا وَأَبْنَاءَكُمْ وَنِسَاءَنَا وَنِسَاءَكُمْ وَأَنفُسَنَا وَأَنفُسَكُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَتَ اللَّهِ عَلَى الْكَاذِبِينَ
फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद भी अगर तुम से कोई (नसरानी) ईसा के बारे में हुज्जत करें तो कहो कि (अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को और हम अपनी औरतों को (बुलाएं) और तुम अपनी औरतों को और हम अपनी जानों को बुलाएं ओर तुम अपनी जानों को
62إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْقَصَصُ الْحَقُّ ۚ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
उसके बाद हम सब मिलकर (खुदा की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें (ऐ रसूल) ये सब यक़ीनी सच्चे वाक़यात हैं और ख़ुदा के सिवा कोई माबूद (क़ाबिले परसतिश) नहीं है
63فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِالْمُفْسِدِينَ
और बेशक ख़ुदा ही सब पर ग़ालिब और हिकमत वाला है
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अनुवाद — आल-इमरान 61

सूरा आल-इमरान आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद…

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Tuesday, August 18, 2026

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