Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَاجَّكَ: तुमसे झगड़ा करे, विवाद करे
- نَبْتَهِلْ: हम दुआ में गिड़गिड़ाएँ, अल्लाह से प्रार्थना करें
- لَعْنَتَ: अभिशाप, रहमत से दूर करने की दुआ
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! जब आपके पास ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में सच्चा और पूरा ज्ञान आ चुका है, और इसके बाद भी नजरान के ईसाई आपसे ईसा के मामले में झगड़ा करें और यह दावा करें कि वह अल्लाह के बंदे नहीं बल्कि अल्लाह के बेटे हैं, तो आप उनसे कह दें: "आओ, हम अपने बेटों को बुलाएँ और तुम अपने बेटों को, हम अपनी स्त्रियों को बुलाएँ और तुम अपनी स्त्रियों को, हम अपने आपको बुलाएँ और तुम अपने आपको। फिर हम सब मिलकर अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर दुआ करें और अल्लाह की लानत (अभिशाप) डालें उन झूठों पर जो ईसा के बारे में झूठ बोल रहे हैं।"
यह वही प्रसिद्ध "मुबाहिला" (आपसी लानत का मुक़ाबला) है, जिसका आदेश अल्लाह ने अपने नबी को दिया था। जब नबी ﷺ ने अपने परिवार के सबसे प्यारे लोगों — हज़रत अली, हज़रत फ़ातिमा, हज़रत हसन और हज़रत हुसैन — को साथ लेकर मुबाहिले के लिए जाने का इरादा किया, तो ईसाइयों ने यह देखकर कि ये लोग सच्चे और पवित्र हैं, मुबाहिला करने से इनकार कर दिया और जज़िया (कर) देने पर राज़ी हो गए।
फ़ायदे (सीख):
- सच्चाई का प्रमाण: यह आयत नबी ﷺ की सच्चाई का सबसे बड़ा प्रमाण है। जब कोई व्यक्ति अपने सबसे प्यारे बच्चों और परिवार को साथ लेकर लानत का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो, तो यह उसके सच्चे होने की गवाही है।
- परिवार की अहमियत: इस आयत से पता चलता है कि सच्चाई के लिए अपने परिवार को भी आगे करना पड़े तो करना चाहिए। नबी ﷺ ने अपने सबसे प्यारे लोगों को इसलिए साथ लिया क्योंकि वे जानते थे कि सच्चाई के साथ हैं।
- हिम्मत और बहादुरी: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि सच्चाई पर डटे रहो और झूठ के सामने कभी घुटने मत टेको। जब सच्चाई आपके साथ हो, तो आपको किसी से डरने की ज़रूरत नहीं।
- इस्लाम में परिवार की पवित्रता: इस आयत में नबी ﷺ ने अपने दामाद, बेटी और नवासों को साथ लिया, जो दिखाता है कि इस्लाम में परिवार के रिश्ते कितने पवित्र और महत्वपूर्ण हैं।
- दुआ की ताक़त: जब सच्चाई और ईमान के साथ दुआ की जाए, तो अल्लाह उसे ज़रूर सुनता है। यह हमें सिखाता है कि मुश्किल हालात में अल्लाह से गिड़गिड़ाकर दुआ करनी चाहिए।
📜 आयत 59-63 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 61
सूरा आल-इमरान आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद…सूरा आयत 61/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


