Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْحَقُّ (अल-हक़्क़): सत्य, वास्तविकता, वह बात जो संदेह से परे हो।
- مِن رَّبِّكَ (मिन रब्बिक): तुम्हारे पालनहार की ओर से।
- الْمُمْتَرِينَ (अल-मुम्तरीन): संदेह करने वाले, शक करने वाले, झिझकने वाले लोग।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! यह सत्य — जो तुम्हें 'ईसा (अलैहिस्सलाम) के मामले में प्राप्त हुआ है — तुम्हारे रब की ओर से है, न कि किसी और की ओर से। यही वह सच्चाई है जिसमें कोई संदेह नहीं, और यही वह बात है जो तुम्हारे पास वह़्य (प्रकाशना) के माध्यम से पहुँची है। यह सत्य इस बात की गवाही देता है कि 'ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के नबी और उसके बन्दे थे, न कि अल्लाह के बेटे, न स्वयं ईश्वर।
इसलिए, हे नबी! तुम उन लोगों में मत बनो जो इस सत्य पर संदेह करते हैं या झिझकते हैं। तुम्हें उस सत्य पर पूर्ण दृढ़ता और विश्वास के साथ क़ायम रहना है, और किसी भी प्रकार के शक या भ्रम को अपने दिल में जगह नहीं देनी है। यह आदेश नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को दिया गया है, लेकिन इसका उद्देश्य उनकी उम्मत को भी यह सिखाना है कि वे भी इसी दृढ़ विश्वास पर स्थिर रहें।
यह आयत उस समय उतरी जब नसारा (ईसाइयों) का एक प्रतिनिधिमंडल नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास 'ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में झगड़ने और अपनी ग़लत मान्यताओं को पेश करने आया था। अल्लाह ने अपने नबी को तसल्ली दी कि तुम्हारे पास जो सत्य है, वही सही है, और तुम्हें उनके झूठे दावों से कोई प्रभावित नहीं होना चाहिए।
फ़ायदे (शिक्षाएँ और सबक):
- सत्य की पहचान अल्लाह से है: सच्चा ज्ञान और सही मार्गदर्शन केवल अल्लाह की ओर से आता है। जो बात अल्लाह की ओर से हो, वही सत्य है, चाहे दुनिया के लोग कुछ भी कहें।
- संदेह से बचना: एक मुसलमान को चाहिए कि वह अपने दीन (धर्म) की बुनियादी बातों पर किसी भी प्रकार का संदेह न करे। जब सत्य स्पष्ट हो जाए, तो उस पर पूर्ण विश्वास करना चाहिए, न कि झिझकना या शक करना।
- दृढ़ता और स्थिरता: यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य पर स्थिर रहना चाहिए, भले ही विरोधी पक्ष कितना भी मज़बूत क्यों न हो। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को भी इसी दृढ़ता का आदेश दिया गया।
- इस्लाम की स्पष्ट शिक्षा: इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में 'ईसा अलैहिस्सलाम की सही स्थिति क्या है — वे अल्लाह के नबी और बन्दे हैं, और यही सत्य है। यह हमें ईसाइयों की ग़लत मान्यताओं से बचाती है और हमारे दिलों को सच्चाई पर मज़बूत करती है।
- अल्लाह पर भरोसा: जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि हमारे पास जो सत्य है वह अल्लाह की ओर से है, तो हमें किसी भी बात या व्यक्ति से डरने की ज़रूरत नहीं। अल्लाह ही हमारा सहारा और रक्षक है।
📜 आयत 58-62 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 60
सूरा आल-इमरान आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल ये है) हक़ बात (जो) तुम्हारे परवरदिगार की…सूरा आयत 60/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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