आल-इमरान · 60/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُن مِّنَ الْمُمْتَرِينَ ۝٦٠
Alhaqqu mir Rabbika falaa takum minal mumtareen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल ये है) हक़ बात (जो) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (बताई जाती है) तो तुम शक करने वालों में से न हो जाना

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْحَقُّ (अल-हक़्क़): सत्य, वास्तविकता, वह बात जो संदेह से परे हो।
  • مِن رَّبِّكَ (मिन रब्बिक): तुम्हारे पालनहार की ओर से।
  • الْمُمْتَرِينَ (अल-मुम्तरीन): संदेह करने वाले, शक करने वाले, झिझकने वाले लोग।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! यह सत्य — जो तुम्हें 'ईसा (अलैहिस्सलाम) के मामले में प्राप्त हुआ है — तुम्हारे रब की ओर से है, न कि किसी और की ओर से। यही वह सच्चाई है जिसमें कोई संदेह नहीं, और यही वह बात है जो तुम्हारे पास वह़्य (प्रकाशना) के माध्यम से पहुँची है। यह सत्य इस बात की गवाही देता है कि 'ईसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के नबी और उसके बन्दे थे, न कि अल्लाह के बेटे, न स्वयं ईश्वर।

इसलिए, हे नबी! तुम उन लोगों में मत बनो जो इस सत्य पर संदेह करते हैं या झिझकते हैं। तुम्हें उस सत्य पर पूर्ण दृढ़ता और विश्वास के साथ क़ायम रहना है, और किसी भी प्रकार के शक या भ्रम को अपने दिल में जगह नहीं देनी है। यह आदेश नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को दिया गया है, लेकिन इसका उद्देश्य उनकी उम्मत को भी यह सिखाना है कि वे भी इसी दृढ़ विश्वास पर स्थिर रहें।

यह आयत उस समय उतरी जब नसारा (ईसाइयों) का एक प्रतिनिधिमंडल नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास 'ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में झगड़ने और अपनी ग़लत मान्यताओं को पेश करने आया था। अल्लाह ने अपने नबी को तसल्ली दी कि तुम्हारे पास जो सत्य है, वही सही है, और तुम्हें उनके झूठे दावों से कोई प्रभावित नहीं होना चाहिए।


फ़ायदे (शिक्षाएँ और सबक):

  1. सत्य की पहचान अल्लाह से है: सच्चा ज्ञान और सही मार्गदर्शन केवल अल्लाह की ओर से आता है। जो बात अल्लाह की ओर से हो, वही सत्य है, चाहे दुनिया के लोग कुछ भी कहें।
  2. संदेह से बचना: एक मुसलमान को चाहिए कि वह अपने दीन (धर्म) की बुनियादी बातों पर किसी भी प्रकार का संदेह न करे। जब सत्य स्पष्ट हो जाए, तो उस पर पूर्ण विश्वास करना चाहिए, न कि झिझकना या शक करना।
  3. दृढ़ता और स्थिरता: यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य पर स्थिर रहना चाहिए, भले ही विरोधी पक्ष कितना भी मज़बूत क्यों न हो। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को भी इसी दृढ़ता का आदेश दिया गया।
  4. इस्लाम की स्पष्ट शिक्षा: इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में 'ईसा अलैहिस्सलाम की सही स्थिति क्या है — वे अल्लाह के नबी और बन्दे हैं, और यही सत्य है। यह हमें ईसाइयों की ग़लत मान्यताओं से बचाती है और हमारे दिलों को सच्चाई पर मज़बूत करती है।
  5. अल्लाह पर भरोसा: जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि हमारे पास जो सत्य है वह अल्लाह की ओर से है, तो हमें किसी भी बात या व्यक्ति से डरने की ज़रूरत नहीं। अल्लाह ही हमारा सहारा और रक्षक है।


📜 आयत 58-62 — आल-इमरान

58ذَٰلِكَ نَتْلُوهُ عَلَيْكَ مِنَ الْآيَاتِ وَالذِّكْرِ الْحَكِيمِ
(ऐ रसूल) ये जो हम तुम्हारे सामने बयान कर रहे हैं कुदरते ख़ुदा की निशानियॉ और हिकमत से भरे हुये तज़किरे हैं
59إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ اللَّهِ كَمَثَلِ آدَمَ ۖ خَلَقَهُ مِن تُرَابٍ ثُمَّ قَالَ لَهُ كُن فَيَكُونُ
ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि 'हो जा' पस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया
60الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُن مِّنَ الْمُمْتَرِينَ
(ऐ रसूल ये है) हक़ बात (जो) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (बताई जाती है) तो तुम शक करने वालों में से न हो जाना
61فَمَنْ حَاجَّكَ فِيهِ مِن بَعْدِ مَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَاءَنَا وَأَبْنَاءَكُمْ وَنِسَاءَنَا وَنِسَاءَكُمْ وَأَنفُسَنَا وَأَنفُسَكُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَتَ اللَّهِ عَلَى الْكَاذِبِينَ
फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद भी अगर तुम से कोई (नसरानी) ईसा के बारे में हुज्जत करें तो कहो कि (अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को और हम अपनी औरतों को (बुलाएं) और तुम अपनी औरतों को और हम अपनी जानों को बुलाएं ओर तुम अपनी जानों को
62إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْقَصَصُ الْحَقُّ ۚ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
उसके बाद हम सब मिलकर (खुदा की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें (ऐ रसूल) ये सब यक़ीनी सच्चे वाक़यात हैं और ख़ुदा के सिवा कोई माबूद (क़ाबिले परसतिश) नहीं है
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
60आयत

अनुवाद — आल-इमरान 60

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Tuesday, August 18, 2026

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