आल-इमरान · 62/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْقَصَصُ الْحَقُّ ۚ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٦٢
Innaa haazaa lahuwal qasasul haqq; wa maa min ilaahin illal laah; wa innal laahaa la Huwal `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
उसके बाद हम सब मिलकर (खुदा की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें (ऐ रसूल) ये सब यक़ीनी सच्चे वाक़यात हैं और ख़ुदा के सिवा कोई माबूद (क़ाबिले परसतिश) नहीं है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْقَصَصُ: सच्ची खबर और हकीकत।
  • الْحَقُّ: वह बात जो सच्ची हो, जिसमें कोई शक न हो।
  • الْعَزِيزُ: वह जो अपनी ताकत और अधिकार में सब पर गालिब हो, कोई उसे हरा न सके।
  • الْحَكِيمُ: वह जो हर काम में पूरी हिकमत और मसलहत रखता हो।

तफसीर:

यह आयत हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के उस सच्चे और साफ किस्से की तस्दीक करती है जो अल्लाह ने बयान किया है। यह वही हकीकत है जिसमें कोई शक या झूठ नहीं। यह वही सच्ची खबर है जो पहले की किताबों और रसूलों के ज़रिए दी गई थी, और अब कुरआन में साफ तौर पर बयान कर दी गई है। इसके बाद अल्लाह तआला सबसे बड़ी हकीकत बयान करता है कि इस कायनात में कोई माबूद (पूजा के लायक) नहीं सिवाय अल्लाह के। यही वो बुनियादी सच्चाई है जिस पर पूरा ईमान टिका है। फिर अल्लाह अपनी दो सिफ़ात बयान करता है: "अल-अज़ीज़" यानी वह सब पर गालिब है, उसकी ताकत के आगे कोई नहीं ठहर सकता, और "अल-हकीम" यानी वह हर काम हिकमत से करता है, उसका हर फैसला अदल और मसलहत पर मबनी है। यानी अल्लाह की कुदरत भी कामिल है और उसकी हिकमत भी कामिल, इसलिए उसकी बताई हुई बातें ही सच्ची हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई सिर्फ अल्लाह के पास है। जब अल्लाह ने किसी चीज़ की खबर दी, तो वह पूरी तरह सच है, चाहे दुनिया कुछ भी कहे। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में ईसाईयों और यहूदियों के बीच जो झगड़े हैं, अल्लाह ने उसका साफ और सच्चा फैसला सुना दिया। यह हमारे लिए रहनुमाई है कि हम हर मामले में अल्लाह की बताई हकीकत को मानें, न कि लोगों की बनाई रिवायतों को। और सबसे बड़ी बात यह कि अल्लाह की ताकत और हिकमत पर भरोसा रखें। जब हमें यकीन हो कि अल्लाह अज़ीज़ है, तो हमें किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए, और जब हमें यकीन हो कि वह हकीम है, तो हर हाल में उसके फैसले पर राज़ी रहना चाहिए। यही ईमान की मिठास है — कि बंदा अपने रब के सच पर दिल से यकीन करे और उसकी ताकत और हिकमत के आगे सर झुका दे। यही रास्ता दुनिया और आख़िरत की कामयाबी का है।

🎧 सुनें

📜 आयत 60-64 — आल-इमरान

60الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُن مِّنَ الْمُمْتَرِينَ
(ऐ रसूल ये है) हक़ बात (जो) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (बताई जाती है) तो तुम शक करने वालों में से न हो जाना
61فَمَنْ حَاجَّكَ فِيهِ مِن بَعْدِ مَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَاءَنَا وَأَبْنَاءَكُمْ وَنِسَاءَنَا وَنِسَاءَكُمْ وَأَنفُسَنَا وَأَنفُسَكُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَتَ اللَّهِ عَلَى الْكَاذِبِينَ
फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद भी अगर तुम से कोई (नसरानी) ईसा के बारे में हुज्जत करें तो कहो कि (अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को और हम अपनी औरतों को (बुलाएं) और तुम अपनी औरतों को और हम अपनी जानों को बुलाएं ओर तुम अपनी जानों को
62إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْقَصَصُ الْحَقُّ ۚ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
उसके बाद हम सब मिलकर (खुदा की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें (ऐ रसूल) ये सब यक़ीनी सच्चे वाक़यात हैं और ख़ुदा के सिवा कोई माबूद (क़ाबिले परसतिश) नहीं है
63فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِالْمُفْسِدِينَ
और बेशक ख़ुदा ही सब पर ग़ालिब और हिकमत वाला है
64قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ تَعَالَوْا إِلَىٰ كَلِمَةٍ سَوَاءٍ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَلَّا نَعْبُدَ إِلَّا اللَّهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا وَلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا أَرْبَابًا مِّن دُونِ اللَّهِ ۚ فَإِن تَوَلَّوْا فَقُولُوا اشْهَدُوا بِأَنَّا مُسْلِمُونَ
फिर अगर इससे भी मुंह फेरें तो (कुछ) परवाह (नहीं) ख़ुदा फ़सादी लोगों को खूब जानता है (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कहो कि ऐ अहले किताब तुम ऐसी (ठिकाने की) बात पर तो आओ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान यकसॉ है कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करें और किसी चीज़ को उसका शरीक न बनाएं और ख़ुदा के सिवा हममें से कोई किसी को अपना परवरदिगार न बनाए अगर इससे भी मुंह मोडें तो तुम गवाह रहना हम (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार हैं
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अनुवाद — आल-इमरान 62

सूरा आल-इमरान आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसके बाद हम सब मिलकर (खुदा की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं…

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Tuesday, August 18, 2026

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