Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले, स्थायी रूप से ठहरने वाले।
- لَا يُخَفَّفُ: हल्का नहीं किया जाएगा, कम नहीं किया जाएगा।
- الْعَذَابُ: यातना, दंड।
- يُنظَرُونَ: उन्हें मोहलत दी जाएगी, देर की जाएगी, या उन पर दया की दृष्टि डाली जाएगी।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने ईमान लाने के बाद कुफ़्र (अधर्म) अपनाया और अपने कुफ़्र पर ही मर गए। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह की लानत (फिटकार) है, और वे इस लानत में हमेशा रहने वाले हैं। वे जहन्नम (नरक) की आग में स्थायी रूप से रहेंगे, और वहाँ से निकलना उनके लिए संभव नहीं होगा। उनकी यातना में कोई कमी नहीं की जाएगी, न तो थोड़ी देर के लिए ही सही, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। उन्हें कोई मोहलत भी नहीं दी जाएगी, न तो तौबा (पश्चाताप) करने के लिए और न ही कोई बहाना पेश करने के लिए। उनके लिए न तो यातना में कमी है और न ही उसमें देरी — दोनों ही चीज़ें उनसे छीन ली गई हैं। यानी उनकी सज़ा पूरी तरह से स्थायी और बिना किसी राहत के होगी, जो उनके कुफ़्र और अल्लाह के साथ धोखेबाज़ी के कारण उनका हक़ बन गई है।
फ़ायदे (सबक):
- यह आयत हमें यह गंभीर चेतावनी देती है कि ईमान लाने के बाद कुफ़्र की ओर लौटना अत्यंत गंभीर अपराध है, जिसका अंजाम हमेशा की यातना है।
- अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा जीवन भर खुला रहता है, लेकिन मौत के बाद कोई मौका नहीं मिलता। इसलिए हमें जीते जी तौबा कर लेनी चाहिए और अल्लाह की ओर लौट आना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह का इंसाफ़ (न्याय) बिल्कुल सटीक है — जो लोग सच्चाई जानने के बाद उसे ठुकरा दें, उनके लिए कोई बहाना या राहत नहीं होगी।
- इससे हमें अपने दीन (धर्म) पर स्थिर रहने की प्रेरणा मिलती है, क्योंकि सच्चा ईमान ही वह चीज़ है जो हमें इस स्थायी यातना से बचा सकता है।
- यह आयत हमें अल्लाह के साथ अपने रिश्ते की अहमियत समझाती है — जो अल्लाह से सच्चे दिल से जुड़ा रहता है, वह कभी इस तरह के अंजाम से नहीं डरता, क्योंकि अल्लाह की रहमत उसके ग़ुस्से से कहीं बढ़कर है।
📜 आयत 86-90 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 88
सूरा आल-इमरान आयत 88 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह हमेशा उसी फिटकार में रहेंगे न तो उनके…सूरा आयत 88/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 86–90. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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