आल-इमरान · 89/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝٨٩
Illal lazeena taaboo mim ba`di zaalika wa aslahoo fa innal laaha Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
मगर (हॉ) जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली और अपनी (ख़राबी की) इस्लाह कर ली तो अलबत्ता ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَابُوا: तौबा की, अपने कुकर्मों से लौट आए।
  • وَأَصْلَحُوا: अपने कर्मों को सुधार लिया, भलाई की ओर लौट आए।
  • غَفُورٌ: अत्यधिक क्षमा करने वाला।
  • رَّحِيمٌ: अत्यंत दयालु।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने ईमान लाने के बाद कुफ़्र (अविश्वास) किया और अल्लाह और उसके रसूल के साथ दुश्मनी की, फिर उन्होंने अपने इस कृत्य से पश्चाताप किया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो लोग अपने इस कुकर्म के बाद सच्ची तौबा कर लें और अपने अंदर सुधार कर लें — यानी अपने बिगड़े हुए कर्मों को छोड़कर अच्छे कर्म अपना लें, और अपनी ज़िंदगी को ईमान और नेकी की राह पर ले आएं — तो अल्लाह उनकी तौबा क़बूल करेगा। क्योंकि अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला और उन पर रहम करने वाला है। उसकी रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं बढ़कर है। वह किसी भी हद तक पहुंचे हुए गुनाह को माफ़ कर सकता है, बशर्ते बंदा सच्चे दिल से तौबा करे और अपनी स्थिति सुधार ले।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की रहमत बेहद वसी (विस्तृत) है — इंसान चाहे कितना ही बड़ा गुनाहगार क्यों न हो, जब तक वह सच्चे दिल से तौबा करता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है।
  2. तौबा का मतलब सिर्फ़ ज़बान से "माफ़ कर दो" कहना नहीं है, बल्कि दिल से पश्चाताप करना, गुनाह छोड़ देना और अपने कर्मों को सुधारना ज़रूरी है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को कभी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए — चाहे उसकी ग़लतियाँ कितनी ही बड़ी क्यों न हों।
  4. इस्लाम में सुधार और बेहतरी की गुंजाइश हमेशा मौजूद है — कोई भी इंसान किसी भी उम्र में अपनी ज़िंदगी बदल सकता है और अल्लाह की मुहब्बत और माफ़ी का हक़दार बन सकता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 87-91 — आल-इमरान

87أُولَٰئِكَ جَزَاؤُهُمْ أَنَّ عَلَيْهِمْ لَعْنَةَ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उनपर ख़ुदा और फ़रिश्तों और (दुनिया जहॉन के) सब लोगों की फिटकार हैं
88خَالِدِينَ فِيهَا لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ الْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
और वह हमेशा उसी फिटकार में रहेंगे न तो उनके अज़ाब ही में तख्फ़ीफ़ की जाएगी और न उनको मोहलत दी जाएगी
89إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
मगर (हॉ) जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली और अपनी (ख़राबी की) इस्लाह कर ली तो अलबत्ता ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
90إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا لَّن تُقْبَلَ تَوْبَتُهُمْ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الضَّالُّونَ
जो अपने ईमान के बाद काफ़िर हो बैठे फ़िर (रोज़ बरोज़ अपना) कुफ़्र बढ़ाते चले गये तो उनकी तौबा हरगिज़ न कुबूल की जाएगी और यही लोग (पल्ले दरजे के) गुमराह हैं
91إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يُقْبَلَ مِنْ أَحَدِهِم مِّلْءُ الْأَرْضِ ذَهَبًا وَلَوِ افْتَدَىٰ بِهِ ۗ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तियार किया और कुफ़्र की हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी (छुटकारा पाने) में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कुबूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा
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अनुवाद — आल-इमरान 89

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Tuesday, August 18, 2026

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