आल-इमरान · 87/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
أُولَٰئِكَ جَزَاؤُهُمْ أَنَّ عَلَيْهِمْ لَعْنَةَ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ ۝٨٧
Ulaaa`ika jazaaa`uhum anna `alaihim la`natal laahi walmalaaa`ikati wannaasi ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उनपर ख़ुदा और फ़रिश्तों और (दुनिया जहॉन के) सब लोगों की फिटकार हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَعْنَةَ: अभिशाप, रहमत से दूरी, और दया से निष्कासन।
  • أَجْمَعِينَ: सभी, एक साथ, बिना किसी अपवाद के।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बुरे अंजाम को बयान कर रही है जो सत्य को छोड़कर असत्य को अपनाते हैं, जो ईमान के बाद कुफ्र की ओर लौट जाते हैं, और जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं तथा उनके रास्ते में रुकावटें डालते हैं। ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उन पर अल्लाह की ओर से लानत है, यानी वे अल्लाह की रहमत से दूर कर दिए जाते हैं। साथ ही, फ़रिश्ते भी उन पर लानत भेजते हैं, और सभी लोग — विशेष रूप से ईमान वाले — उन्हें अभिशापित करते हैं। यह लानत उन्हें हर तरफ से घेर लेती है, जिससे उनके लिए कोई राहत या माफ़ी का दरवाज़ा नहीं बचता। यह उनका स्थायी हाल है, जब तक कि वे तौबा न करें और अल्लाह की ओर वापस न लौटें।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नाराज़गी और उसकी रहमत से दूरी सबसे बड़ी सज़ा है — यह दुनिया की किसी भी सज़ा से बढ़कर है।
  2. ईमान के बाद कुफ्र की ओर लौटना बहुत बड़ा गुनाह है, और यह इंसान को अल्लाह, फ़रिश्तों और नेक लोगों की दुआओं से महरूम कर देता है।
  3. यह हमें सचेत करती है कि हम अपने ईमान की हिफ़ाज़त करें और सत्य पर स्थिर रहें, क्योंकि सत्य का रास्ता छोड़ने का अंजाम बहुत भयानक है।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि ईमान वालों की दुआ और उनका रवैया गुनाहगारों के हाल पर असर डालता है, इसलिए हमें अपने अमल को सुधारना चाहिए ताकि हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें, न कि उसकी लानत के।
  5. यह हमें अल्लाह की रहमत की ओर लौटने की तरग़ीब देती है — कि अगर कोई गुनाह कर बैठे तो तौबा का दरवाज़ा खुला है, क्योंकि अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और दयालु है।
🎧 सुनें

📜 आयत 85-89 — आल-इमरान

85وَمَن يَبْتَغِ غَيْرَ الْإِسْلَامِ دِينًا فَلَن يُقْبَلَ مِنْهُ وَهُوَ فِي الْآخِرَةِ مِنَ الْخَاسِرِينَ
और हम तो उसी (यकता ख़ुदा) के फ़रमाबरदार हैं और जो शख्स इस्लाम के सिवा किसी और दीन की ख्वाहिश करे तो उसका वह दीन हरगिज़ कुबूल ही न किया जाएगा और वह आख़िरत में सख्त घाटे में रहेगा
86كَيْفَ يَهْدِي اللَّهُ قَوْمًا كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ وَشَهِدُوا أَنَّ الرَّسُولَ حَقٌّ وَجَاءَهُمُ الْبَيِّنَاتُ ۚ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ
भला ख़ुदा ऐसे लोगों की क्योंकर हिदायत करेगा जो इमाने लाने के बाद फिर काफ़िर हो गए हालॉकि वह इक़रार कर चुके थे कि पैग़म्बर (आख़िरूज़ज़मा) बरहक़ हैं और उनके पास वाजेए व रौशन मौजिज़े भी आ चुके थे और ख़ुदा ऐसी हठधर्मी करने वाले लोगों की हिदायत नहीं करता
87أُولَٰئِكَ جَزَاؤُهُمْ أَنَّ عَلَيْهِمْ لَعْنَةَ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उनपर ख़ुदा और फ़रिश्तों और (दुनिया जहॉन के) सब लोगों की फिटकार हैं
88خَالِدِينَ فِيهَا لَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ الْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ
और वह हमेशा उसी फिटकार में रहेंगे न तो उनके अज़ाब ही में तख्फ़ीफ़ की जाएगी और न उनको मोहलत दी जाएगी
89إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
मगर (हॉ) जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली और अपनी (ख़राबी की) इस्लाह कर ली तो अलबत्ता ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीRevelation
87आयत

अनुवाद — आल-इमरान 87

सूरा आल-इमरान आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐसे लोगों की सज़ा यह है कि उनपर ख़ुदा और…

सूरा आयत 87/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए