(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब खुदा की आयतो से क्यो मुन्किर हुए जाते हो हालॉकि जो काम काज तुम करते हो खुदा को उसकी (पूरी) पूरी इत्तिला है
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अनुवाद — Tafsir
कठिन शब्दों के अर्थ:
آیات الله: अल्लाह की निशानियाँ और प्रमाण, जिनमें उसकी एकता, सच्चे पैग़म्बर की सच्चाई और उसके धर्म की सच्चाई पर दलीलें शामिल हैं।
شهید: गवाह, देखने वाला, जानने वाला — अल्लाह हर चीज़ पर गवाह है और उससे कोई बात छिपी नहीं है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप अह्ले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) से कहें: "तुम अल्लाह की आयतों और निशानियों को क्यों नकारते हो? जबकि ये निशानियाँ स्पष्ट रूप से इस बात पर दलील देती हैं कि अल्लाह का धर्म इस्लाम है, और तुम्हारी अपनी किताबों (तौरात और इंजील) में भी उन प्रमाणों का ज़िक्र मौजूद है जो मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सच्चाई की गवाही देते हैं। तुम जानते हुए भी इन्हें क्यों झुठलाते हो? और अल्लाह तुम्हारे सारे कर्मों को देख रहा है, उससे कोई बात छिपी नहीं है, और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।"
यह एक कड़ी चेतावनी और धमकी है, क्योंकि जो व्यक्ति जानबूझकर सत्य को छिपाता है और उसका इनकार करता है, उसके लिए अल्लाह के पास सख्त अज़ाब है। अल्लाह उनके इस कुकर्म से पूरी तरह वाक़िफ़ है और वह इस पर उन्हें सज़ा देगा।
फ़ायदे (सीख):
अल्लाह की आयतों और निशानियों को नकारना सबसे बड़ा पाप है, ख़ासकर जब वह जानबूझकर और हठधर्मी से किया जाए।
अल्लाह हर काम को देख रहा है और उससे कुछ भी छिपा नहीं है — यह विश्वास इंसान को अच्छे कर्म करने और बुराई से बचने की ताक़त देता है।
सच्चाई को जानने के बाद उसे छिपाना या उसका इनकार करना बहुत बड़ी ग़लती है, और इसका अंजाम बहुत बुरा है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने ज्ञान और समझ के अनुसार सच्चाई को क़बूल करना चाहिए, और अल्लाह के धर्म को अपनाने में देरी नहीं करनी चाहिए।
इसमें (हुरमत की) बहुत सी वाज़े और रौशन निशानियॉ हैं (उनमें से) मुक़ाम इबराहीम है (जहॉ आपके क़दमों का पत्थर पर निशान है) और जो इस घर में दाख़िल हुआ अमन में आ गया और लोगों पर वाजिब है कि महज़ ख़ुदा के लिए ख़ानाए काबा का हज करें जिन्हे वहां तक पहुँचने की इस्तेताअत है और जिसने बावजूद कुदरत हज से इन्कार किया तो (याद रखे) कि ख़ुदा सारे जहॉन से बेपरवा है
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता खुदा की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढूंढो (ढूंढ) के ईमान लाने वालों को उससे क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खुदा उससे बेख़बर नहीं है
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