आल-इमरान · 99/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ مَنْ آمَنَ تَبْغُونَهَا عِوَجًا وَأَنتُمْ شُهَدَاءُ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ ۝٩٩
Qul yaaa Ahlal Kitaabi lima tusuddoona `an sabeelil laahi man aamana tabghoonahaa `iwajanw wa antum shuhadaaa`; wa mallaahu bighaafilin `ammaa ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता खुदा की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढूंढो (ढूंढ) के ईमान लाने वालों को उससे क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खुदा उससे बेख़बर नहीं है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَصُدُّونَ: तुम रोकते हो / मना करते हो
  • سَبِيلِ اللَّهِ: अल्लाह का मार्ग, अर्थात इस्लाम धर्म
  • تَبْغُونَهَا عِوَجًا: तुम उसमें टेढ़ापन ढूंढते हो, उसे विकृत दिखाना चाहते हो
  • شُهَدَاءُ: गवाह हो, जानने वाले हो

विस्तृत व्याख्या:

ऐ नबी! आप अह्ले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) से कहें कि तुम उन लोगों को अल्लाह के मार्ग (इस्लाम) से क्यों रोकते हो जो ईमान ला चुके हैं? तुम उन्हें धर्म से भटकाना चाहते हो और उनके दिलों में संदेह पैदा करना चाहते हो, ताकि वे सीधे रास्ते से हट जाएं। तुम उन्हें डराते-धमकाते हो और उनके ईमान को कमजोर करने की कोशिश करते हो। यह सब करते हुए तुम स्वयं गवाह हो कि यह धर्म (इस्लाम) सत्य है, और तुम्हारी अपनी किताबों (तौरात और इंजील) में भी इसकी पुष्टि मौजूद है। तुम जानते हो कि मुहम्मद ﷺ सच्चे नबी हैं, फिर भी तुम लोगों को उनके पीछे चलने से रोकते हो। यह तुम्हारा अत्याचार और जिद है। और अल्लाह उससे बेखबर नहीं है जो कुछ तुम करते हो। वह तुम्हारे सारे कर्म देख रहा है और उनका हिसाब लेगा। तुम्हारी ये साजिशें और रुकावटें अल्लाह से छिपी नहीं हैं, और वह तुम्हें इसका पूरा बदला देगा।

शिक्षाएं और लाभ:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को जानने के बाद भी उससे मुंह मोड़ना और दूसरों को रोकना बहुत बड़ा पाप है। जिसे सत्य का ज्ञान हो, उसे उसे अपनाना चाहिए और दूसरों तक पहुंचाना चाहिए।
  2. अल्लाह किसी भी कर्म से बेखबर नहीं है। चाहे लोग कितनी भी छिपकर साजिशें करें, अल्लाह सब कुछ देख रहा है और हर एक को उसका पूरा बदला देगा। यह विश्वास मुसलमान को न्याय और सच्चाई पर स्थिर रखता है।
  3. इस्लाम एक ऐसा धर्म है जिसकी सच्चाई पहले की आसमानी किताबों में भी मौजूद थी। यह धर्म किसी नई कड़ी का नाम नहीं, बल्कि उसी सत्य का अंतिम और पूर्ण रूप है जो सभी नबियों ने पढ़ाया।
  4. मुसलमान को चाहिए कि वह दूसरों को धर्म से रोकने वालों से सावधान रहे और अपने ईमान की रक्षा करे। साथ ही, उसे भी कभी किसी को सत्य के मार्ग से नहीं रोकना चाहिए, बल्कि दूसरों को सत्य की ओर बुलाने का प्रयास करना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 97-101 — आल-इमरान

97فِيهِ آيَاتٌ بَيِّنَاتٌ مَّقَامُ إِبْرَاهِيمَ ۖ وَمَن دَخَلَهُ كَانَ آمِنًا ۗ وَلِلَّهِ عَلَى النَّاسِ حِجُّ الْبَيْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ إِلَيْهِ سَبِيلًا ۚ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ عَنِ الْعَالَمِينَ
इसमें (हुरमत की) बहुत सी वाज़े और रौशन निशानियॉ हैं (उनमें से) मुक़ाम इबराहीम है (जहॉ आपके क़दमों का पत्थर पर निशान है) और जो इस घर में दाख़िल हुआ अमन में आ गया और लोगों पर वाजिब है कि महज़ ख़ुदा के लिए ख़ानाए काबा का हज करें जिन्हे वहां तक पहुँचने की इस्तेताअत है और जिसने बावजूद कुदरत हज से इन्कार किया तो (याद रखे) कि ख़ुदा सारे जहॉन से बेपरवा है
98قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تَكْفُرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ وَاللَّهُ شَهِيدٌ عَلَىٰ مَا تَعْمَلُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब खुदा की आयतो से क्यो मुन्किर हुए जाते हो हालॉकि जो काम काज तुम करते हो खुदा को उसकी (पूरी) पूरी इत्तिला है
99قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ مَنْ آمَنَ تَبْغُونَهَا عِوَجًا وَأَنتُمْ شُهَدَاءُ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब दीदए दानिस्ता खुदा की (सीधी) राह में (नाहक़ की) कज़ी ढूंढो (ढूंढ) के ईमान लाने वालों को उससे क्यों रोकते हो ओर जो कुछ तुम करते हो खुदा उससे बेख़बर नहीं है
100يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تُطِيعُوا فَرِيقًا مِّنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ يَرُدُّوكُم بَعْدَ إِيمَانِكُمْ كَافِرِينَ
ऐ ईमान वालों अगर तुमने अहले किताब के किसी फ़िरके क़ा भी कहना माना तो (याद रखो कि) वह तुमको ईमान लाने के बाद (भी) फिर दुबारा काफ़िर बना छोडेंग़े
101وَكَيْفَ تَكْفُرُونَ وَأَنتُمْ تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ آيَاتُ اللَّهِ وَفِيكُمْ رَسُولُهُ ۗ وَمَن يَعْتَصِم بِاللَّهِ فَقَدْ هُدِيَ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और (भला) तुम क्योंकर काफ़िर बन जाओगे हालॉकि तुम्हारे सामने ख़ुदा की आयतें (बराबर) पढ़ी जाती हैं और उसके रसूल (मोहम्मद) भी तुममें (मौजूद) हैं और जो शख्स ख़ुदा से वाबस्ता हो वह (तो) जरूर सीधी राह पर लगा दिया गया
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अनुवाद — आल-इमरान 99

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Tuesday, August 18, 2026

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