अर-रूम · 24/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَمِنْ آيَاتِهِ يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَيُحْيِي بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ ۝٢٤
Wa min Aayaatihee yureekumul barqa khawfanw wa tama`anw wa yunazzilu minas samaaa`i maaa`an fa yuhyee bihil arda ba`da mawtihaaa inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy ya`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि वह तुमको डराने वाला उम्मीद लाने के वास्ते बिजली दिखाता है और आसमान से पानी बरसाता है और उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके परती होने के बाद आबाद करता है बेशक अक्लमंदों के वास्ते इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी दलीलें हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बरक़ (बिजली): आसमान में चमकने वाली रोशनी।
  • ख़ौफ़: डर, भय।
  • तमा: लालच, उम्मीद, आशा।
  • माउ: पानी, वर्षा।
  • युहयी: जीवित करता है, ज़िंदा करता है।
  • मौतिहा: उसकी मौत, यानी ज़मीन का सूखा और बंजर हो जाना।
  • आयात: निशानियाँ, सबूत, दलीलें।
  • यअ़्क़िलून: समझने वाले, अक्ल से काम लेने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी कुदरत की उन निशानियों का ज़िक्र कर रहा है जो उसकी वहदानियत (एकता) और कामिल कुदरत पर दालालत करती हैं। वह फ़रमाता है कि उसकी निशानियों में से एक यह है कि वह तुम्हें बिजली दिखाता है, जो आसमान में चमकती है। इस बिजली में दो चीज़ें एक साथ होती हैं: एक तरफ़ ख़ौफ़ यानी डर कि कहीं यही बिजली किसी पर आसमानी अज़ाब के तौर पर न गिर जाए, और दूसरी तरफ़ तमा यानी उम्मीद कि इसी बिजली के साथ बारिश का पानी आएगा, जो ज़मीन को सींचेगा। यानी अल्लाह ने बिजली को डर और उम्मीद दोनों का ज़रिया बनाया है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह आसमान से पानी बरसाता है, और उसी पानी के ज़रिए वह ज़मीन को उसके सूखेपन और बंजर होने के बाद जीवित कर देता है। यानी जो ज़मीन मुर्दा पड़ी थी, उसमें हरियाली और नबातात उग आते हैं। यह एक ज़िंदा सबूत है कि जिस अल्लाह के पास यह कुदरत है कि वह मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा कर दे, वही अल्लाह क़यामत के दिन मुर्दों को भी ज़िंदा करके उनसे हिसाब लेगा।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इन चीज़ों में यक़ीनन बहुत सारी निशानियाँ और दलीलें हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं और ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं। यानी जो लोग सिर्फ़ देखते ही नहीं, बल्कि सोचते-समझते हैं, वे इन निशानियों से अल्लाह की कुदरत, उसकी हिकमत और उसकी रहमत को पहचान लेते हैं।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए, जब आसमान में बिजली चमकती है और बारिश होती है, तो क्या आपका दिल अल्लाह की अज़मत से नहीं भर जाता? यही बिजली, यही बारिश, यही हरियाली — सब कुछ अल्लाह की मेहरबानी का नज़ारा है। वही अल्लाह जो मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा करता है, वही आपकी मुर्दा दिलों को भी ज़िंदा कर सकता है। जिस तरह बारिश के बाद ज़मीन हरी-भरी हो जाती है, उसी तरह अगर आप क़ुरआन और ईमान की बारिश अपने दिलों पर बरसाएँ, तो आपके दिल भी ईमान की रौशनी से जगमगा उठेंगे। यह क़ुदरत का नज़ारा आपको याद दिलाता है कि मौत के बाद ज़िंदगी ज़रूर आएगी, और हर इंसान अपने अमल का हिसाब देगा। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में ढाल लें, क्योंकि अल्लाह की रहमत और कुदरत के आगे कुछ भी नामुमकिन नहीं है।



📜 आयत 22-26 — अर-रूम

22وَمِنْ آيَاتِهِ خَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَاخْتِلَافُ أَلْسِنَتِكُمْ وَأَلْوَانِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّلْعَالِمِينَ
और उस (की कुदरत) की निशानियों में आसमानो और ज़मीन का पैदा करना और तुम्हारी ज़बानो और रंगतो का एख़तेलाफ भी है यकीनन इसमें वाक़िफकारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
23وَمِنْ آيَاتِهِ مَنَامُكُم بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَابْتِغَاؤُكُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَسْمَعُونَ
और रात और दिन को तुम्हारा सोना और उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करना भी उसकी (क़ुदरत की) निशानियों से है बेशक जो लोग सुनते हैं उनके लिए इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
24وَمِنْ آيَاتِهِ يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَيُحْيِي بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि वह तुमको डराने वाला उम्मीद लाने के वास्ते बिजली दिखाता है और आसमान से पानी बरसाता है और उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके परती होने के बाद आबाद करता है बेशक अक्लमंदों के वास्ते इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी दलीलें हैं
25وَمِنْ آيَاتِهِ أَن تَقُومَ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ بِأَمْرِهِ ۚ ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمْ دَعْوَةً مِّنَ الْأَرْضِ إِذَا أَنتُمْ تَخْرُجُونَ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि आसमान और ज़मीन उसके हुक्म से क़ायम हैं फिर (मरने के बाद) जिस वक्त तुमको एक बार बुलाएगा तो तुम सबके सब ज़मीन से (ज़िन्दा हो होकर) निकल पड़ोगे
26وَلَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ كُلٌّ لَّهُ قَانِتُونَ
और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है और सब उसी के ताबेए फरमान हैं
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अनुवाद — अर-रूम 24

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Tuesday, August 18, 2026

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