अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- बरक़ (बिजली): आसमान में चमकने वाली रोशनी।
- ख़ौफ़: डर, भय।
- तमा: लालच, उम्मीद, आशा।
- माउ: पानी, वर्षा।
- युहयी: जीवित करता है, ज़िंदा करता है।
- मौतिहा: उसकी मौत, यानी ज़मीन का सूखा और बंजर हो जाना।
- आयात: निशानियाँ, सबूत, दलीलें।
- यअ़्क़िलून: समझने वाले, अक्ल से काम लेने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपनी कुदरत की उन निशानियों का ज़िक्र कर रहा है जो उसकी वहदानियत (एकता) और कामिल कुदरत पर दालालत करती हैं। वह फ़रमाता है कि उसकी निशानियों में से एक यह है कि वह तुम्हें बिजली दिखाता है, जो आसमान में चमकती है। इस बिजली में दो चीज़ें एक साथ होती हैं: एक तरफ़ ख़ौफ़ यानी डर कि कहीं यही बिजली किसी पर आसमानी अज़ाब के तौर पर न गिर जाए, और दूसरी तरफ़ तमा यानी उम्मीद कि इसी बिजली के साथ बारिश का पानी आएगा, जो ज़मीन को सींचेगा। यानी अल्लाह ने बिजली को डर और उम्मीद दोनों का ज़रिया बनाया है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह आसमान से पानी बरसाता है, और उसी पानी के ज़रिए वह ज़मीन को उसके सूखेपन और बंजर होने के बाद जीवित कर देता है। यानी जो ज़मीन मुर्दा पड़ी थी, उसमें हरियाली और नबातात उग आते हैं। यह एक ज़िंदा सबूत है कि जिस अल्लाह के पास यह कुदरत है कि वह मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा कर दे, वही अल्लाह क़यामत के दिन मुर्दों को भी ज़िंदा करके उनसे हिसाब लेगा।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इन चीज़ों में यक़ीनन बहुत सारी निशानियाँ और दलीलें हैं उन लोगों के लिए जो अक्ल से काम लेते हैं और ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं। यानी जो लोग सिर्फ़ देखते ही नहीं, बल्कि सोचते-समझते हैं, वे इन निशानियों से अल्लाह की कुदरत, उसकी हिकमत और उसकी रहमत को पहचान लेते हैं।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए, जब आसमान में बिजली चमकती है और बारिश होती है, तो क्या आपका दिल अल्लाह की अज़मत से नहीं भर जाता? यही बिजली, यही बारिश, यही हरियाली — सब कुछ अल्लाह की मेहरबानी का नज़ारा है। वही अल्लाह जो मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा करता है, वही आपकी मुर्दा दिलों को भी ज़िंदा कर सकता है। जिस तरह बारिश के बाद ज़मीन हरी-भरी हो जाती है, उसी तरह अगर आप क़ुरआन और ईमान की बारिश अपने दिलों पर बरसाएँ, तो आपके दिल भी ईमान की रौशनी से जगमगा उठेंगे। यह क़ुदरत का नज़ारा आपको याद दिलाता है कि मौत के बाद ज़िंदगी ज़रूर आएगी, और हर इंसान अपने अमल का हिसाब देगा। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में ढाल लें, क्योंकि अल्लाह की रहमत और कुदरत के आगे कुछ भी नामुमकिन नहीं है।
📜 आयत 22-26 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 24
सूरा अर-रूम आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये…सूरा आयत 24/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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