अर-रूम · 25/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَمِنْ آيَاتِهِ أَن تَقُومَ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ بِأَمْرِهِ ۚ ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمْ دَعْوَةً مِّنَ الْأَرْضِ إِذَا أَنتُمْ تَخْرُجُونَ ۝٢٥
Wa min Aayaatihee an taqoomas samaaa`u wal ardu bi-amrih; summa izaa da`aakum da`watam minal ardi izaaa antum takhrujoon
📖 हिंदी अर्थ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि आसमान और ज़मीन उसके हुक्म से क़ायम हैं फिर (मरने के बाद) जिस वक्त तुमको एक बार बुलाएगा तो तुम सबके सब ज़मीन से (ज़िन्दा हो होकर) निकल पड़ोगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَقُومَ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ: आकाश और धरती का क़ायम रहना, यानी अपनी जगह पर स्थिर और टिका रहना।
  • بِأَمْرِهِ: उसके हुक्म और आदेश से।
  • دَعَاكُمْ دَعْوَةً: वह तुम्हें पुकारे, एक ही पुकार।
  • مِنَ الْأَرْضِ: यानी क़ब्रों से (ज़मीन के अंदर से)।
  • تَخْرُجُونَ: तुम निकल पड़ो (क़ब्रों से जीवित होकर)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला की क़ुदरत की निशानियों में से एक बहुत बड़ी निशानी यह है कि यह विशाल आकाश और यह चौड़ी धरती उसके हुक्म से क़ायम हैं। आकाश बिना किसी स्तंभ के ऊपर टिका हुआ है और धरती बिना किसी सहारे के फैली हुई है। न आकाश धरती पर गिरता है, न धरती अपनी जगह से हिलती है। यह सब उसी अल्लाह के आदेश से है, जिसने इन्हें पैदा किया और इन्हें क़ायम रखा है। यह उसकी तौहीद (एकता) और उसकी असीम शक्ति की सबसे बड़ी गवाही है।

फिर उसी शक्ति का एक और अद्भुत प्रदर्शन यह होगा कि जब अल्लाह तआला क़यामत के दिन अपनी पुकार लगाएगा — इसराफ़ील (अलैहिस्सलाम) के सूर (नरसिंगा) में फूँक मारने के ज़रिए — तो वह पुकार सुनते ही सारे मुर्दे अपनी क़ब्रों से निकल पड़ेंगे। वे बिना किसी रुकावट, बिना किसी इनकार के, तेज़ी से उठ खड़े होंगे और हिसाब के लिए चल पड़ेंगे। जिस तरह अल्लाह ने आकाश और धरती को बिना किसी सहारे के क़ायम रखा है, उसी तरह वह मुर्दों को भी ज़िंदा करके उनकी क़ब्रों से निकालने पर पूरी तरह क़ादिर है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात (ब्रह्मांड) को अपने हुक्म से थाम रखा है, उसके लिए मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करना बिल्कुल आसान है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में उसी की इबादत करनी चाहिए, उसी के हुक्मों का पालन करना चाहिए, और उस दिन के लिए तैयारी करनी चाहिए जब हम सब उसके सामने हाज़िर होंगे। यह हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक खुशखबरी भी — चेतावनी इसलिए कि हम अपने अमलों का हिसाब देंगे, और खुशखबरी इसलिए कि अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उस पर ईमान लाए और नेक अमल करें। आओ, हम उस अल्लाह के सच्चे बंदे बनें जो हमें मौत के बाद ज़िंदा करके उठाएगा और अपनी जन्नत में दाखिल करेगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अर-रूम

23وَمِنْ آيَاتِهِ مَنَامُكُم بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَابْتِغَاؤُكُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَسْمَعُونَ
और रात और दिन को तुम्हारा सोना और उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करना भी उसकी (क़ुदरत की) निशानियों से है बेशक जो लोग सुनते हैं उनके लिए इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
24وَمِنْ آيَاتِهِ يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَيُحْيِي بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि वह तुमको डराने वाला उम्मीद लाने के वास्ते बिजली दिखाता है और आसमान से पानी बरसाता है और उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके परती होने के बाद आबाद करता है बेशक अक्लमंदों के वास्ते इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी दलीलें हैं
25وَمِنْ آيَاتِهِ أَن تَقُومَ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ بِأَمْرِهِ ۚ ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمْ دَعْوَةً مِّنَ الْأَرْضِ إِذَا أَنتُمْ تَخْرُجُونَ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि आसमान और ज़मीन उसके हुक्म से क़ायम हैं फिर (मरने के बाद) जिस वक्त तुमको एक बार बुलाएगा तो तुम सबके सब ज़मीन से (ज़िन्दा हो होकर) निकल पड़ोगे
26وَلَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ كُلٌّ لَّهُ قَانِتُونَ
और जो लोग आसमानों में है सब उसी के है और सब उसी के ताबेए फरमान हैं
27وَهُوَ الَّذِي يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ وَهُوَ أَهْوَنُ عَلَيْهِ ۚ وَلَهُ الْمَثَلُ الْأَعْلَىٰ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
और वह ऐसा (क़ादिरे मुत्तालिक़ है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करता है फिर दोबारा (क़यामत के दिन) पैदा करेगा और ये उस पर बहुत आसान है और सारे आसमान व जमीन सबसे बालातर उसी की शान है और वही (सब पर) ग़ालिब हिकमत वाला है
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अनुवाद — अर-रूम 25

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Tuesday, August 18, 2026

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