अर-रूम · 23/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَمِنْ آيَاتِهِ مَنَامُكُم بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَابْتِغَاؤُكُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَسْمَعُونَ ۝٢٣
Wa min Aayaatihee manaamukum bil laili wannahaari wabtighaaa`ukum min fadlih; inna fee zaalika la Aayaatil liqawminy yasma`oon
📖 हिंदी अर्थ
और रात और दिन को तुम्हारा सोना और उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करना भी उसकी (क़ुदरत की) निशानियों से है बेशक जो लोग सुनते हैं उनके लिए इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَنَامُكُم (तुम्हारी नींद) — दिन या रात में सोना।
  • وَابْتِغَاؤُكُم مِّن فَضْلِهِ (और उसके अनुग्रह की तलाश) — रोज़ी कमाने के लिए दिन में फैलना और परिश्रम करना।
  • لَآيَاتٍ (निशानियाँ) — अल्लाह की क़ुदरत और एकता पर दलीलें।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपनी बेपनाह क़ुदरत और वहदानियत की निशानियाँ बयान करते हुए फ़रमाता है कि तुम्हारी नींद, जो रात और दिन दोनों में आती है, उसकी बड़ी निशानी है। यह नींद तुम्हारे लिए रहमत और आराम का ज़रिया है, जिससे तुम्हारी थकान दूर होती है और तुम्हारे बदन को सुकून मिलता है। यह अल्लाह का एहसान है कि उसने नींद को तुम्हारी फ़ितरत का हिस्सा बनाया, ताकि तुम आराम कर सको और फिर अपने कामों में लग सको।

इसी तरह, दिन में उसके अनुग्रह (रोज़ी) की तलाश करना भी उसकी निशानी है। जब सुबह होती है, तो तुम अपने घरों से निकलते हो, अपने काम-धंधों में लगते हो, और अल्लाह ही है जो तुम्हें रोज़ी देता है। यह सिलसिला — रात का सुकून और दिन का परिश्रम — अल्लाह की क़ुदरत का ऐसा निज़ाम है जो हर दिन दोहराया जाता है। अगर यह निज़ाम न होता, तो इंसान की ज़िंदगी अधूरी और मुश्किल हो जाती।

इन सब चीज़ों में अल्लाह की क़ुदरत और उसकी वहदानियत की साफ़ दलीलें हैं, लेकिन यह निशानियाँ उन लोगों के लिए हैं जो कान लगाकर सुनते हैं, समझते हैं, और उनसे सबक़ लेते हैं। जो लोग सिर्फ़ सुनते हैं लेकिन दिल से नहीं सुनते, वे इन निशानियों से फ़ायदा नहीं उठाते।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों! ज़रा सोचो — जब तुम रात को सोते हो और सुबह उठते हो, तो यह कितनी बड़ी नेमत है! कितने लोग ऐसे हैं जो सोते हैं और फिर नहीं उठते। अल्लाह तआला ने तुम्हें उठाया, तुम्हें ज़िंदगी दी, और दिन में रोज़ी कमाने का मौक़ा दिया। यह सब उसकी मेहरबानी है। क्या यह क़ाबिले-शुक्र नहीं? क्या इन निशानियों को देखकर हमारा दिल नरम नहीं होना चाहिए? हमें चाहिए कि हम इन निशानियों से सबक़ लें, अल्लाह की इबादत करें, उसका शुक्र अदा करें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ। याद रखो, यह नींद और रोज़ी की तलाश — दोनों अल्लाह की निशानियाँ हैं, ताकि हम उसे पहचानें और उसकी इबादत में मशगूल रहें।



📜 आयत 21-25 — अर-रूम

21وَمِنْ آيَاتِهِ أَنْ خَلَقَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَاجًا لِّتَسْكُنُوا إِلَيْهَا وَجَعَلَ بَيْنَكُم مَّوَدَّةً وَرَحْمَةً ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये (भी) है कि उसने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी ही जिन्स की बीवियाँ पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर चैन करो और तुम लोगों के दरमेयान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी इसमें शक नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालों के वास्ते (क़ुदरते ख़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं
22وَمِنْ آيَاتِهِ خَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَاخْتِلَافُ أَلْسِنَتِكُمْ وَأَلْوَانِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّلْعَالِمِينَ
और उस (की कुदरत) की निशानियों में आसमानो और ज़मीन का पैदा करना और तुम्हारी ज़बानो और रंगतो का एख़तेलाफ भी है यकीनन इसमें वाक़िफकारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
23وَمِنْ آيَاتِهِ مَنَامُكُم بِاللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَابْتِغَاؤُكُم مِّن فَضْلِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَسْمَعُونَ
और रात और दिन को तुम्हारा सोना और उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करना भी उसकी (क़ुदरत की) निशानियों से है बेशक जो लोग सुनते हैं उनके लिए इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
24وَمِنْ آيَاتِهِ يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَيُحْيِي بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि वह तुमको डराने वाला उम्मीद लाने के वास्ते बिजली दिखाता है और आसमान से पानी बरसाता है और उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके परती होने के बाद आबाद करता है बेशक अक्लमंदों के वास्ते इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी दलीलें हैं
25وَمِنْ آيَاتِهِ أَن تَقُومَ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ بِأَمْرِهِ ۚ ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمْ دَعْوَةً مِّنَ الْأَرْضِ إِذَا أَنتُمْ تَخْرُجُونَ
और उसी की (क़ुदरत की) निशानियों में से एक ये भी है कि आसमान और ज़मीन उसके हुक्म से क़ायम हैं फिर (मरने के बाद) जिस वक्त तुमको एक बार बुलाएगा तो तुम सबके सब ज़मीन से (ज़िन्दा हो होकर) निकल पड़ोगे
अर-रूमकुरान सूची
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मक्कीRevelation
23आयत

अनुवाद — अर-रूम 23

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सूरा आयत 23/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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