लुकमान · 13/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
وَإِذْ قَالَ لُقْمَانُ لِابْنِهِ وَهُوَ يَعِظُهُ يَا بُنَيَّ لَا تُشْرِكْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌ ۝١٣
Wa iz qaala luqmaanu libnihee wa huwa ya`izuhoo ya bunaiya laa tushrik billaah; innash shirka lazulmun `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और (वह वक्त याद करो) जब लुक़मान ने अपने बेटे से उसकी नसीहत करते हुए कहा ऐ बेटा (ख़बरदार कभी किसी को) ख़ुदा का शरीक न बनाना (क्योंकि) शिर्क यक़ीनी बड़ा सख्त गुनाह है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لُقْمَان (लुक़मान): अल्लाह के नेक बंदों में से एक बुद्धिमान व्यक्ति, जिन्हें अल्लाह ने हिक्मत (समझ-बूझ) प्रदान की थी।
  • يَعِظُهُ (उसे नसीहत कर रहा था): उसे अच्छाई की ओर बुलाना और बुराई से डराना, दया और प्रेम के साथ।
  • يَا بُنَيَّ (ऐ मेरे बेटे): यह पुकार दया, स्नेह और करीबी रिश्ते को दर्शाती है।
  • الشِّرْكَ (शिर्क): अल्लाह के साथ किसी और को उसकी इबादत में साझीदार बनाना।
  • لَظُلْمٌ عَظِيمٌ (बहुत बड़ा अत्याचार): यहाँ "ظُلْم" का अर्थ है किसी चीज़ को उसकी सही जगह से हटाकर गलत जगह रखना।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उस समय को याद करें जब लुक़मान ने अपने बेटे को नसीहत करते हुए कहा था। वह अपने बेटे को प्यार और दया से समझा रहे थे, और उसे अच्छाई की ओर बुलाते हुए बुराई से डरा रहे थे। उन्होंने कहा: "ऐ मेरे प्यारे बेटे! अल्लाह के साथ किसी को साझीदार मत बनाना।" फिर उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा: "क्योंकि शिर्क बहुत बड़ा अत्याचार है।"

यह अत्याचार इसलिए है क्योंकि शिर्क करने वाला व्यक्ति अल्लाह की इबादत, जो केवल उसी का हक़ है, किसी और को दे देता है। यह सबसे बड़ा अन्याय है जो इंसान अपनी आत्मा पर करता है, क्योंकि इससे वह अपने आप को अल्लाह की रहमत से वंचित कर लेता है और जहन्नम की आग का हक़दार बन जाता है। शिर्क सबसे बड़ा पाप है, और अल्लाह इसे कभी माफ़ नहीं करता। यही वह रास्ता है जो इंसान को हमेशा के लिए जहन्नम में डाल देता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि माता-पिता को अपने बच्चों को नसीहत करने का सबसे अच्छा तरीका यही है — प्यार, दया और कोमलता के साथ। लुक़मान ने अपने बेटे को "ऐ मेरे बेटे" कहकर पुकारा, जो दिल में मोहब्बत पैदा करता है और नसीहत को क़बूल करने में आसानी होती है। यह हमें बताता है कि तौहीद (अल्लाह की एकता) हर नेकी की जड़ है, और शिर्क हर बुराई की जड़। जिस घर में तौहीद की तालीम दी जाती है, वहाँ सुकून और बरकत आती है। आइए हम अपने बच्चों को पहली नसीहत यही दें कि अल्लाह के साथ किसी को साझीदार न बनाएं, और उन्हें यह समझाएं कि सच्ची कामयाबी इसी में है। याद रखें, जो व्यक्ति शिर्क से बचता है और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है।



📜 आयत 11-15 — लुकमान

11هَٰذَا خَلْقُ اللَّهِ فَأَرُونِي مَاذَا خَلَقَ الَّذِينَ مِن دُونِهِ ۚ بَلِ الظَّالِمُونَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
(ऐ रसूल उनसे कह दो कि) ये तो खुदा की ख़िलक़त है कि (भला) तुम लोग मुझे दिखाओं तो कि जो (जो माबूद) ख़ुदा के सिवा तुमने बना रखे है उन्होंने क्या पैदा किया बल्कि सरकश लोग (कुफ्फ़ार) सरीही गुमराही में (पडे) हैं
12وَلَقَدْ آتَيْنَا لُقْمَانَ الْحِكْمَةَ أَنِ اشْكُرْ لِلَّهِ ۚ وَمَن يَشْكُرْ فَإِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهِ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌ
और यक़ीनन हम ने लुक़मान को हिकमत अता की (और हुक्म दिया था कि) तुम ख़ुदा का शुक्र करो और जो ख़ुदा का शुक्र करेगा-वह अपने ही फायदे के लिए शुक्र करता है और जिसने नाशुक्री की तो (अपना बिगाड़ा) क्योंकी ख़ुदा तो (बहरहाल) बे परवाह (और) क़ाबिल हमदो सना है
13وَإِذْ قَالَ لُقْمَانُ لِابْنِهِ وَهُوَ يَعِظُهُ يَا بُنَيَّ لَا تُشْرِكْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌ
और (वह वक्त याद करो) जब लुक़मान ने अपने बेटे से उसकी नसीहत करते हुए कहा ऐ बेटा (ख़बरदार कभी किसी को) ख़ुदा का शरीक न बनाना (क्योंकि) शिर्क यक़ीनी बड़ा सख्त गुनाह है
14وَوَصَّيْنَا الْإِنسَانَ بِوَالِدَيْهِ حَمَلَتْهُ أُمُّهُ وَهْنًا عَلَىٰ وَهْنٍ وَفِصَالُهُ فِي عَامَيْنِ أَنِ اشْكُرْ لِي وَلِوَالِدَيْكَ إِلَيَّ الْمَصِيرُ
(जिस की बख़्शिस नहीं) और हमने इन्सान को जिसे उसकी माँ ने दुख पर दुख सह के पेट में रखा (इसके अलावा) दो बरस में (जाके) उसकी दूध बढ़ाई की (अपने और) उसके माँ बाप के बारे में ताक़ीद की कि मेरा भी शुक्रिया अदा करो और अपने वालदैन का (भी) और आख़िर सबको मेरी तरफ लौट कर जाना है
15وَإِن جَاهَدَاكَ عَلَىٰ أَن تُشْرِكَ بِي مَا لَيْسَ لَكَ بِهِ عِلْمٌ فَلَا تُطِعْهُمَا ۖ وَصَاحِبْهُمَا فِي الدُّنْيَا مَعْرُوفًا ۖ وَاتَّبِعْ سَبِيلَ مَنْ أَنَابَ إِلَيَّ ۚ ثُمَّ إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और अगर तेरे माँ बाप तुझे इस बात पर मजबूर करें कि तू मेरा शरीक ऐसी चीज़ को क़रार दे जिसका तुझे इल्म भी नहीं तो तू (इसमें) उनकी इताअत न करो (मगर तकलीफ़ न पहुँचाना) और दुनिया (के कामों) में उनका अच्छी तरह साथ दे और उन लोगों के तरीक़े पर चल जो (हर बात में) मेरी (ही) तरफ रुजू करे फिर (तो आख़िर) तुम सबकी रुजू मेरी ही तरफ है तब (दुनिया में) जो कुछ तुम करते थे
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अनुवाद — लुकमान 13

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Tuesday, August 18, 2026

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