Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لُقْمَان (लुक़मान): अल्लाह के नेक बंदों में से एक बुद्धिमान व्यक्ति, जिन्हें अल्लाह ने हिक्मत (समझ-बूझ) प्रदान की थी।
- يَعِظُهُ (उसे नसीहत कर रहा था): उसे अच्छाई की ओर बुलाना और बुराई से डराना, दया और प्रेम के साथ।
- يَا بُنَيَّ (ऐ मेरे बेटे): यह पुकार दया, स्नेह और करीबी रिश्ते को दर्शाती है।
- الشِّرْكَ (शिर्क): अल्लाह के साथ किसी और को उसकी इबादत में साझीदार बनाना।
- لَظُلْمٌ عَظِيمٌ (बहुत बड़ा अत्याचार): यहाँ "ظُلْم" का अर्थ है किसी चीज़ को उसकी सही जगह से हटाकर गलत जगह रखना।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप उस समय को याद करें जब लुक़मान ने अपने बेटे को नसीहत करते हुए कहा था। वह अपने बेटे को प्यार और दया से समझा रहे थे, और उसे अच्छाई की ओर बुलाते हुए बुराई से डरा रहे थे। उन्होंने कहा: "ऐ मेरे प्यारे बेटे! अल्लाह के साथ किसी को साझीदार मत बनाना।" फिर उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा: "क्योंकि शिर्क बहुत बड़ा अत्याचार है।"
यह अत्याचार इसलिए है क्योंकि शिर्क करने वाला व्यक्ति अल्लाह की इबादत, जो केवल उसी का हक़ है, किसी और को दे देता है। यह सबसे बड़ा अन्याय है जो इंसान अपनी आत्मा पर करता है, क्योंकि इससे वह अपने आप को अल्लाह की रहमत से वंचित कर लेता है और जहन्नम की आग का हक़दार बन जाता है। शिर्क सबसे बड़ा पाप है, और अल्लाह इसे कभी माफ़ नहीं करता। यही वह रास्ता है जो इंसान को हमेशा के लिए जहन्नम में डाल देता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि माता-पिता को अपने बच्चों को नसीहत करने का सबसे अच्छा तरीका यही है — प्यार, दया और कोमलता के साथ। लुक़मान ने अपने बेटे को "ऐ मेरे बेटे" कहकर पुकारा, जो दिल में मोहब्बत पैदा करता है और नसीहत को क़बूल करने में आसानी होती है। यह हमें बताता है कि तौहीद (अल्लाह की एकता) हर नेकी की जड़ है, और शिर्क हर बुराई की जड़। जिस घर में तौहीद की तालीम दी जाती है, वहाँ सुकून और बरकत आती है। आइए हम अपने बच्चों को पहली नसीहत यही दें कि अल्लाह के साथ किसी को साझीदार न बनाएं, और उन्हें यह समझाएं कि सच्ची कामयाबी इसी में है। याद रखें, जो व्यक्ति शिर्क से बचता है और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है।
📜 आयत 11-15 — सूरा लुकमान
अनुवाद — लुकमान 13
सूरा लुकमान आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (वह वक्त याद करो) जब लुक़मान ने अपने बेटे…सूरा आयत 13/34 — सूरा लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा लुकमान सुनें, सूरा लुकमान अनुवाद, सूरा लुकमान mp3, सूरा लुकमान pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


