लुकमान · 12/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
وَلَقَدْ آتَيْنَا لُقْمَانَ الْحِكْمَةَ أَنِ اشْكُرْ لِلَّهِ ۚ وَمَن يَشْكُرْ فَإِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهِ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌ ۝١٢
Wa laqad aatainaa Luqmaanal hikmata anishkur lillaah; wa many yashkur fa innamaa yashkuru linafsihee wa man kafara fa innal laaha Ghaniyyun Hameed
📖 हिंदी अर्थ
और यक़ीनन हम ने लुक़मान को हिकमत अता की (और हुक्म दिया था कि) तुम ख़ुदा का शुक्र करो और जो ख़ुदा का शुक्र करेगा-वह अपने ही फायदे के लिए शुक्र करता है और जिसने नाशुक्री की तो (अपना बिगाड़ा) क्योंकी ख़ुदा तो (बहरहाल) बे परवाह (और) क़ाबिल हमदो सना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • लुक़मान: अल्लाह के एक नेक और परहेज़गार बंदे का नाम, जिन्हें अल्लाह ने हिक्मत (समझ-बूझ और सही फ़ैसले की क्षमता) अता की थी।
  • अल-हिक्मत: दीन की समझ, सही अक़्ल, सही बात और सही काम — यानी हर मामले में सही और मुनासिब फ़ैसला करने की क़ाबिलियत।
  • अश्कुर लिल्लाह: अल्लाह का शुक्र अदा करो, उसकी नेअमतों को क़बूल करो और उसकी इबादत और ताअत में जुट जाओ।
  • कफ़र: यहाँ इसका मतलब है अल्लाह की नेअमतों का इनकार करना, उसे भुला देना या उसकी नाफ़रमानी करना।
  • ग़नी: बेनियाज़, जो किसी का मोहताज न हो।
  • हमीद: हर हाल में तारीफ़ और हम्द के काबिल।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने एक नेक बंदे लुक़मान को हिक्मत (समझ-बूझ और सही फ़ैसले की क्षमता) अता की — यह हिक्मत दीन की समझ, सही अक़्ल, और हर मामले में सही बात व सही काम करने की तौफ़ीक़ है। यह कोई नबूवत नहीं थी, बल्कि अल्लाह की एक ख़ास अता थी। अल्लाह ने उनसे कहा: “लुक़मान! मेरी नेअमतों का शुक्र अदा करो।” यानी अल्लाह ने उन्हें हिदायत दी कि जो कुछ तुम्हें मिला है, उस पर अल्लाह का शुक्र करो — अपनी ज़ुबान से, अपने दिल से और अपने अमल से।

फिर अल्लाह ने एक आम और अहम क़ायदा बयान किया: “जो शुक्र करता है, वह अपने ही भले के लिए करता है।” यानी शुक्र का फ़ायदा अल्लाह को नहीं पहुँचता, बल्कि शुक्र करने वाले को ही पहुँचता है — उसका दिल साफ़ होता है, उसकी नेअमतें बरकत पाती हैं, और उसे अल्लाह का सवाब मिलता है। अल्लाह तो बेनियाज़ है, उसे हमारे शुक्र की ज़रूरत नहीं।

और जो शख्स अल्लाह की नेअमतों का इनकार करे, उन्हें भुला दे या कुफ़्रान करे, तो उसका नुक़सान उसी को है — अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं पहुँचता। अल्लाह ग़नी है, यानी वह सबसे बेनियाज़ है, उसे किसी की इबादत या शुक्र की ज़रूरत नहीं। और वह हमीद है, यानी हर हाल में तारीफ़ और हम्द के काबिल है — चाहे बंदे शुक्र करें या न करें, उसकी ज़ात हम्द के लायक़ है।


दावती पहलू (इंसान को अच्छाई की तरफ रागिब करने वाला पहलू):

यह आयत हमें सिखाती है कि शुक्र (अल्लाह का शुक्र) सिर्फ़ अल्लाह के लिए नहीं, बल्कि हमारे अपने लिए है। जब हम अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है, हमारी नेअमतें बढ़ती हैं, और हम अल्लाह के करीब हो जाते हैं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हम पर बेहद मेहरबान है — उसने हमें ज़िन्दगी, सेहत, ईमान और हर तरह की नेअमतें दी हैं। हमें चाहिए कि हर वक़्त उसका शुक्र अदा करें, क्योंकि शुक्र ही वह चाबी है जो हमारे दिलों को रौशन करती है और हमें अल्लाह की मुहब्बत के क़रीब लाती है। याद रखें — अल्लाह को हमारे शुक्र की ज़रूरत नहीं, बल्कि हमें उसके शुक्र की ज़रूरत है।



📜 आयत 10-14 — लुकमान

10خَلَقَ السَّمَاوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا ۖ وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ وَبَثَّ فِيهَا مِن كُلِّ دَابَّةٍ ۚ وَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ
तुम उन्हें देख रहे हो कि उसी ने बग़ैर सुतून के आसमानों को बना डाला और उसी ने ज़मीन पर (भारी भारी) पहाड़ों के लंगर डाल दिए कि (मुबादा) तुम्हें लेकर किसी तरफ जुम्बिश करे और उसी ने हर तरह चल फिर करने वाले (जानवर) ज़मीन में फैलाए और हमने आसमान से पानी बरसाया और (उसके ज़रिए से) ज़मीन में हर रंग के नफ़ीस जोड़े पैदा किए
11هَٰذَا خَلْقُ اللَّهِ فَأَرُونِي مَاذَا خَلَقَ الَّذِينَ مِن دُونِهِ ۚ بَلِ الظَّالِمُونَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
(ऐ रसूल उनसे कह दो कि) ये तो खुदा की ख़िलक़त है कि (भला) तुम लोग मुझे दिखाओं तो कि जो (जो माबूद) ख़ुदा के सिवा तुमने बना रखे है उन्होंने क्या पैदा किया बल्कि सरकश लोग (कुफ्फ़ार) सरीही गुमराही में (पडे) हैं
12وَلَقَدْ آتَيْنَا لُقْمَانَ الْحِكْمَةَ أَنِ اشْكُرْ لِلَّهِ ۚ وَمَن يَشْكُرْ فَإِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهِ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌ
और यक़ीनन हम ने लुक़मान को हिकमत अता की (और हुक्म दिया था कि) तुम ख़ुदा का शुक्र करो और जो ख़ुदा का शुक्र करेगा-वह अपने ही फायदे के लिए शुक्र करता है और जिसने नाशुक्री की तो (अपना बिगाड़ा) क्योंकी ख़ुदा तो (बहरहाल) बे परवाह (और) क़ाबिल हमदो सना है
13وَإِذْ قَالَ لُقْمَانُ لِابْنِهِ وَهُوَ يَعِظُهُ يَا بُنَيَّ لَا تُشْرِكْ بِاللَّهِ ۖ إِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌ
और (वह वक्त याद करो) जब लुक़मान ने अपने बेटे से उसकी नसीहत करते हुए कहा ऐ बेटा (ख़बरदार कभी किसी को) ख़ुदा का शरीक न बनाना (क्योंकि) शिर्क यक़ीनी बड़ा सख्त गुनाह है
14وَوَصَّيْنَا الْإِنسَانَ بِوَالِدَيْهِ حَمَلَتْهُ أُمُّهُ وَهْنًا عَلَىٰ وَهْنٍ وَفِصَالُهُ فِي عَامَيْنِ أَنِ اشْكُرْ لِي وَلِوَالِدَيْكَ إِلَيَّ الْمَصِيرُ
(जिस की बख़्शिस नहीं) और हमने इन्सान को जिसे उसकी माँ ने दुख पर दुख सह के पेट में रखा (इसके अलावा) दो बरस में (जाके) उसकी दूध बढ़ाई की (अपने और) उसके माँ बाप के बारे में ताक़ीद की कि मेरा भी शुक्रिया अदा करो और अपने वालदैन का (भी) और आख़िर सबको मेरी तरफ लौट कर जाना है
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अनुवाद — लुकमान 12

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Tuesday, August 18, 2026

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