Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- लुक़मान: अल्लाह के एक नेक और परहेज़गार बंदे का नाम, जिन्हें अल्लाह ने हिक्मत (समझ-बूझ और सही फ़ैसले की क्षमता) अता की थी।
- अल-हिक्मत: दीन की समझ, सही अक़्ल, सही बात और सही काम — यानी हर मामले में सही और मुनासिब फ़ैसला करने की क़ाबिलियत।
- अश्कुर लिल्लाह: अल्लाह का शुक्र अदा करो, उसकी नेअमतों को क़बूल करो और उसकी इबादत और ताअत में जुट जाओ।
- कफ़र: यहाँ इसका मतलब है अल्लाह की नेअमतों का इनकार करना, उसे भुला देना या उसकी नाफ़रमानी करना।
- ग़नी: बेनियाज़, जो किसी का मोहताज न हो।
- हमीद: हर हाल में तारीफ़ और हम्द के काबिल।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने एक नेक बंदे लुक़मान को हिक्मत (समझ-बूझ और सही फ़ैसले की क्षमता) अता की — यह हिक्मत दीन की समझ, सही अक़्ल, और हर मामले में सही बात व सही काम करने की तौफ़ीक़ है। यह कोई नबूवत नहीं थी, बल्कि अल्लाह की एक ख़ास अता थी। अल्लाह ने उनसे कहा: “लुक़मान! मेरी नेअमतों का शुक्र अदा करो।” यानी अल्लाह ने उन्हें हिदायत दी कि जो कुछ तुम्हें मिला है, उस पर अल्लाह का शुक्र करो — अपनी ज़ुबान से, अपने दिल से और अपने अमल से।
फिर अल्लाह ने एक आम और अहम क़ायदा बयान किया: “जो शुक्र करता है, वह अपने ही भले के लिए करता है।” यानी शुक्र का फ़ायदा अल्लाह को नहीं पहुँचता, बल्कि शुक्र करने वाले को ही पहुँचता है — उसका दिल साफ़ होता है, उसकी नेअमतें बरकत पाती हैं, और उसे अल्लाह का सवाब मिलता है। अल्लाह तो बेनियाज़ है, उसे हमारे शुक्र की ज़रूरत नहीं।
और जो शख्स अल्लाह की नेअमतों का इनकार करे, उन्हें भुला दे या कुफ़्रान करे, तो उसका नुक़सान उसी को है — अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं पहुँचता। अल्लाह ग़नी है, यानी वह सबसे बेनियाज़ है, उसे किसी की इबादत या शुक्र की ज़रूरत नहीं। और वह हमीद है, यानी हर हाल में तारीफ़ और हम्द के काबिल है — चाहे बंदे शुक्र करें या न करें, उसकी ज़ात हम्द के लायक़ है।
दावती पहलू (इंसान को अच्छाई की तरफ रागिब करने वाला पहलू):
यह आयत हमें सिखाती है कि शुक्र (अल्लाह का शुक्र) सिर्फ़ अल्लाह के लिए नहीं, बल्कि हमारे अपने लिए है। जब हम अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है, हमारी नेअमतें बढ़ती हैं, और हम अल्लाह के करीब हो जाते हैं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हम पर बेहद मेहरबान है — उसने हमें ज़िन्दगी, सेहत, ईमान और हर तरह की नेअमतें दी हैं। हमें चाहिए कि हर वक़्त उसका शुक्र अदा करें, क्योंकि शुक्र ही वह चाबी है जो हमारे दिलों को रौशन करती है और हमें अल्लाह की मुहब्बत के क़रीब लाती है। याद रखें — अल्लाह को हमारे शुक्र की ज़रूरत नहीं, बल्कि हमें उसके शुक्र की ज़रूरत है।
📜 आयत 10-14 — सूरा लुकमान
अनुवाद — लुकमान 12
सूरा लुकमान आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और यक़ीनन हम ने लुक़मान को हिकमत अता की (और…सूरा आयत 12/34 — सूरा लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा लुकमान सुनें, सूरा लुकमान अनुवाद, सूरा लुकमान mp3, सूरा लुकमान pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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