अस-सजदा · 19/30
अनुवाद उच्चारण — अस-सजदा
أَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَلَهُمْ جَنَّاتُ الْمَأْوَىٰ نُزُلًا بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝١٩
Ammal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati falahum jannaatul maawa nuzulam bimaa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
लेकिन जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए तो रहने सहने के लिए (बेहश्त के) बाग़ात हैं ये सामाने ज़ियाफ़त उन कारगुज़ारियों का बदला है जो वह (दुनिया में) कर चुके थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَنَّاتُ الْمَأْوَىٰ: वे जन्नतें जो ठहरने और रहने के लिए हों, यानी वह बाग़ जिनमें मोमिन हमेशा रहेंगे।
  • نُزُلًا: मेहमानों के लिए तैयार की गई पेशकश या स्वागत-सत्कार, यानी अल्लाह की ओर से इज़्ज़त और करम के तौर पर दिया जाने वाला ठिकाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का इनाम बयान कर रहे हैं जो ईमान लाए और अच्छे काम किए। यानी जिन्होंने अल्लाह पर पूरा यकीन किया, उसके रसूल को माना, और अपने अमल को नेक बनाया — उनके लिए जन्नत के ऐसे बाग़ हैं जो उनके ठहरने के लिए तैयार किए गए हैं। यह जन्नतें सिर्फ़ उनके लिए हैं, और वहाँ वे हमेशा रहेंगे। अल्लाह ने इसे "नुज़ुल" (मेहमानी का सामान) कहा है, जैसे कोई मेज़बान अपने मेहमान के लिए बेहतरीन चीज़ें पेश करता है, उसी तरह अल्लाह अपने नेक बंदों के लिए यह जन्नतें इज़्ज़त और करम के तौर पर पेश करेगा। यह सब उनके उन अच्छे कामों का बदला है जो उन्होंने दुनिया में अल्लाह की रज़ा के लिए किए — नमाज़, रोज़ा, ज़कात, नेकी, सच्चाई, और लोगों के साथ भलाई। यह उनके अमल का फल है, लेकिन यह भी अल्लाह का फज़ल और करम है कि उसने उनके छोटे-छोटे नेक कामों को इतना बड़ा इनाम दिया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला कितना कृपालु और रहीम है। वह अपने बंदों के छोटे-छोटे अच्छे कामों को भी नहीं भूलता, बल्कि उन्हें ऐसा इनाम देता है जिसकी कोई उम्मीद नहीं कर सकता। जन्नत के यह बाग़, यह सुकून, यह खुशी — सब कुछ उन लोगों के लिए है जो ईमान लाए और अमल सुधारा। यह हमारे लिए एक प्यारा पैग़ाम है कि हम अपनी ज़िंदगी में ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को नेक बनाएँ। अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसकी जन्नत का इंतज़ाम उन लोगों के लिए पहले से तैयार है जो उसकी राह पर चलते हैं। आओ, हम सब अपने अमल को बेहतर बनाएँ और इस महान इनाम के हक़दार बनने की कोशिश करें।



📜 आयत 17-21 — अस-सजदा

17فَلَا تَعْلَمُ نَفْسٌ مَّا أُخْفِيَ لَهُم مِّن قُرَّةِ أَعْيُنٍ جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
उन लोगों की कारगुज़ारियों के बदले में कैसी कैसी ऑंखों की ठन्डक उनके लिए ढकी छिपी रखी है उसको कोई शख़्श जानता ही नहीं
18أَفَمَن كَانَ مُؤْمِنًا كَمَن كَانَ فَاسِقًا ۚ لَّا يَسْتَوُونَ
तो क्या जो शख़्श ईमानदार है उस शख़्श के बराबर हो जाएगा जो बदकार है (हरगिज़ नहीं) ये दोनों बराबर नही हो सकते
19أَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَلَهُمْ جَنَّاتُ الْمَأْوَىٰ نُزُلًا بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
लेकिन जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए तो रहने सहने के लिए (बेहश्त के) बाग़ात हैं ये सामाने ज़ियाफ़त उन कारगुज़ारियों का बदला है जो वह (दुनिया में) कर चुके थे
20وَأَمَّا الَّذِينَ فَسَقُوا فَمَأْوَاهُمُ النَّارُ ۖ كُلَّمَا أَرَادُوا أَن يَخْرُجُوا مِنْهَا أُعِيدُوا فِيهَا وَقِيلَ لَهُمْ ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّذِي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
और जिन लोगों ने बदकारी की उनका ठिकाना तो (बस) जहन्नुम है वह जब उसमें से निकल जाने का इरादा करेंगे तो उसी में फिर ढकेल दिए जाएँगे और उन से कहा जाएगा कि दोज़ख़ के जिस अज़ाब को तुम झुठलाते थे अब उसके मज़े चखो
21وَلَنُذِيقَنَّهُم مِّنَ الْعَذَابِ الْأَدْنَىٰ دُونَ الْعَذَابِ الْأَكْبَرِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम यक़ीनी (क़यामत के) बड़े अज़ाब से पहले दुनिया के (मामूली) अज़ाब का मज़ा चखाएँगें जो अनक़रीब होगा ताकि ये लोग अब भी (मेरी तरफ) रुज़ू करें
अस-सजदाकुरान सूची
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अनुवाद — अस-सजदा 19

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Tuesday, August 18, 2026

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