अस-सजदा · 18/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-सजदा
أَفَمَن كَانَ مُؤْمِنًا كَمَن كَانَ فَاسِقًا ۚ لَّا يَسْتَوُونَ ۝١٨
Afaman kaana mu`minan kaman kaana faasiqaa; laa yasta woon
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या जो शख़्श ईमानदार है उस शख़्श के बराबर हो जाएगा जो बदकार है (हरगिज़ नहीं) ये दोनों बराबर नही हो सकते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • फ़ासिक़: आज्ञा का उल्लंघन करने वाला, अवज्ञाकारी, पापी।
  • ला यस्तवून: वे बराबर नहीं हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल पूछ रहे हैं — क्या वह व्यक्ति जो ईमान रखता है, अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करता है, अच्छे कर्म करता है और अल्लाह के वादे और चेतावनी पर यक़ीन रखता है, वह उस व्यक्ति के बराबर हो सकता है जो अल्लाह की अवज्ञा करता है, उसके हुक्म से बाहर निकल जाता है, पापों में डूबा रहता है और आख़िरत के दिन को झुठलाता है? हरगिज़ नहीं! ये दोनों कभी बराबर नहीं हो सकते।

यहाँ अल्लाह ने सिर्फ़ एक मोमिन और एक फ़ासिक़ की बात नहीं की, बल्कि सभी मोमिनों और सभी फ़ासिक़ों का मुक़ाबला किया है। यानी पूरे ईमान वाले समूह और पूरे नाफ़रमान समूह के बीच कभी भी समानता नहीं हो सकती — न इस दुनिया में उनकी हैसियत में, न आख़िरत में उनके अंजाम में।

अल्लाह के यहाँ इंसाफ़ का पैमाना बिल्कुल साफ़ है। जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उनके लिए जन्नत है, और जिन्होंने नाफ़रमानी की और गुनाहों में जीवन बिताया, उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब है। अल्लाह कभी इन दोनों को एक दर्जे पर नहीं रखेगा, क्योंकि अल्लाह की रहमत भी इंसाफ़ पर क़ाइम है।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस रास्ते पर चल रहे हैं। क्या हम ईमान वालों की सफ़ में हैं या फ़ासिक़ों की? यह फ़ैसला हमें खुद करना है, और यही फ़ैसला हमारी क़िस्मत का रुख़ तय करेगा। अल्लाह ने हमें आज़ादी दी है, लेकिन साथ ही यह भी बता दिया है कि हर काम का नतीजा उसके मुताबिक़ ही मिलेगा।

इसलिए प्यारे भाइयो और बहनो! हमें चाहिए कि हम ईमान की राह पर चलें, अल्लाह के हुक्मों का पालन करें और गुनाहों से बचें। यही वह रास्ता है जो हमें कामयाबी की मंज़िल तक पहुँचाएगा। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें सच्चे ईमान वालों में शामिल करे और हमें फ़ासिक़ों की सफ़ से दूर रखे। आमीन।



📜 आयत 16-20 — सूरा अस-सजदा

16تَتَجَافَىٰ جُنُوبُهُمْ عَنِ الْمَضَاجِعِ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ خَوْفًا وَطَمَعًا وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ
(रात) के वक्त उनके पहलू बिस्तरों से आशना नहीं होते और (अज़ाब के) ख़ौफ और (रहमत की) उम्मीद पर अपने परवरदिगार की इबादत करते हैं और हमने जो कुछ उन्हें अता किया है उसमें से (ख़ुदा की) राह में ख़र्च करते हैं
17فَلَا تَعْلَمُ نَفْسٌ مَّا أُخْفِيَ لَهُم مِّن قُرَّةِ أَعْيُنٍ جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
उन लोगों की कारगुज़ारियों के बदले में कैसी कैसी ऑंखों की ठन्डक उनके लिए ढकी छिपी रखी है उसको कोई शख़्श जानता ही नहीं
18أَفَمَن كَانَ مُؤْمِنًا كَمَن كَانَ فَاسِقًا ۚ لَّا يَسْتَوُونَ
तो क्या जो शख़्श ईमानदार है उस शख़्श के बराबर हो जाएगा जो बदकार है (हरगिज़ नहीं) ये दोनों बराबर नही हो सकते
19أَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَلَهُمْ جَنَّاتُ الْمَأْوَىٰ نُزُلًا بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
लेकिन जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए तो रहने सहने के लिए (बेहश्त के) बाग़ात हैं ये सामाने ज़ियाफ़त उन कारगुज़ारियों का बदला है जो वह (दुनिया में) कर चुके थे
20وَأَمَّا الَّذِينَ فَسَقُوا فَمَأْوَاهُمُ النَّارُ ۖ كُلَّمَا أَرَادُوا أَن يَخْرُجُوا مِنْهَا أُعِيدُوا فِيهَا وَقِيلَ لَهُمْ ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّذِي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
और जिन लोगों ने बदकारी की उनका ठिकाना तो (बस) जहन्नुम है वह जब उसमें से निकल जाने का इरादा करेंगे तो उसी में फिर ढकेल दिए जाएँगे और उन से कहा जाएगा कि दोज़ख़ के जिस अज़ाब को तुम झुठलाते थे अब उसके मज़े चखो
अस-सजदाकुरान सूची
30आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अस-सजदा 18

सूरा अस-सजदा आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या जो शख़्श ईमानदार है उस शख़्श के बराबर…

सूरा आयत 18/30 — सूरा अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-सजदा सुनें, सूरा अस-सजदा अनुवाद, सूरा अस-सजदा mp3, सूरा अस-सजदा pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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