सबा · 24/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
۞ قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ وَإِنَّا أَوْ إِيَّاكُمْ لَعَلَىٰ هُدًى أَوْ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ ۝٢٤
Qul mai yarzuqukum minas samaawaati wal ardi qulil laahu wa innaaa aw iyyaakum la`alaa hudan aw fee dalaalim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
तो मुक़र्रिब फरिश्ते कहते हैं कि जो वाजिबी था (ऐ रसूल) तुम (इनसे) पूछो तो कि भला तुमको सारे आसमान और ज़मीन से कौन रोज़ी देता है (वह क्या कहेंगे) तुम खुद कह दो कि खुदा और मैं या तुम (दोनों में से एक तो) ज़रूर राहे रास्त पर है (और दूसरा गुमराह) या वह सरीही गुमराही में पड़ा है (और दूसरा राहे रास्त पर)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَرْزُقُكُمْ (तुम्हें रोज़ी देना) — अर्थात् आजीविका प्रदान करना।
  • مِنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ (आकाशों और धरती से) — आकाश से अर्थात् वर्षा के द्वारा, और धरती से अर्थात् पेड़-पौधों, फलों और खनिज पदार्थों के द्वारा।
  • هُدًى (मार्गदर्शन) — सत्य और सीधे रास्ते पर होना।
  • ضَلَالٍ مُبِينٍ (स्पष्ट पथभ्रष्टता) — खुले और प्रत्यक्ष रूप से गुमराही में होना।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से पूछिए: “कौन है जो तुम्हें आकाशों और धरती से रोज़ी देता है?” यानी आकाश से बारिश बरसाकर और धरती से अनाज, फल, सब्ज़ियाँ और तमाम ज़रूरत की चीज़ें उगाकर तुम्हारा पालन-पोषण करता है? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर हर समझदार व्यक्ति जानता है — वह अल्लाह ही है। लेकिन फिर भी यदि वे इसे स्वीकार न करें, तो आप स्वयं कह दीजिए: “रोज़ी देने वाला अल्लाह ही है।”

फिर आगे फ़रमाया: “और हम (मोमिनीन) या तुम (मुशरिकीन) — दोनों में से एक पक्ष निश्चित रूप से सीधे मार्ग पर है या खुली गुमराही में है।” यानी हम और तुम कभी एक जैसे नहीं हो सकते। दोनों में से एक समूह अवश्य ही सत्य पर है और दूसरा स्पष्ट रूप से पथभ्रष्ट। यह बात नबी ने बड़े ही न्यायपूर्ण और नरम अंदाज़ में कही, ताकि सुनने वाले का दिल टूटे नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर हो।

असल में सत्य यही है कि जो लोग अल्लाह को एक मानते हैं और उसी की इबादत करते हैं, वही हिदायत पर हैं; और जो उसके साथ दूसरों को साझी ठहराते हैं, वे स्पष्ट गुमराही में हैं। यह अल्लाह का बड़ा कृपा-पात्र है कि उसने हमें यह समझ दी कि रोज़ी देने वाला, पालने वाला और सब कुछ पैदा करने वाला सिर्फ़ वही है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है — हमें चाहिए कि हर पल अल्लाह का शुक्र अदा करें, उसी पर भरोसा रखें, और उसकी दी हुई रोज़ी में से उसके बताए रास्ते पर चलें। जो व्यक्ति अल्लाह की तरफ़ आता है, अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता; वह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई देता है। यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 22-26 — सबा

22قُلِ ادْعُوا الَّذِينَ زَعَمْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ فِي السَّمَاوَاتِ وَلَا فِي الْأَرْضِ وَمَا لَهُمْ فِيهِمَا مِن شِرْكٍ وَمَا لَهُ مِنْهُم مِّن ظَهِيرٍ
(ऐ रसूल इनसे) कह दो कि जिन लोगों को तुम खुद ख़ुदा के सिवा (माबूद) समझते हो पुकारो (तो मालूम हो जाएगा कि) वह लोग ज़र्रा बराबर न आसमानों में कुछ इख़तेयार रखते हैं और न ज़मीन में और न उनकी उन दोनों में शिरकत है और न उनमें से कोई खुदा का (किसी चीज़ में) मद्दगार है
23وَلَا تَنفَعُ الشَّفَاعَةُ عِندَهُ إِلَّا لِمَنْ أَذِنَ لَهُ ۚ حَتَّىٰ إِذَا فُزِّعَ عَن قُلُوبِهِمْ قَالُوا مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ ۖ قَالُوا الْحَقَّ ۖ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ
जिसके लिए वह खुद इजाज़त अता फ़रमाए उसके सिवा कोई सिफारिश उसकी बारगाह में काम न आएगी (उसके दरबार की हैबत) यहाँ तक (है) कि जब (शिफ़ाअत का) हुक्म होता है तो शिफ़ाअत करने वाले बेहोश हो जाते हैं फिर तब उनके दिलों की घबराहट दूर कर दी जाती है तो पूछते हैं कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या हुक्म दिया
24۞ قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ وَإِنَّا أَوْ إِيَّاكُمْ لَعَلَىٰ هُدًى أَوْ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो मुक़र्रिब फरिश्ते कहते हैं कि जो वाजिबी था (ऐ रसूल) तुम (इनसे) पूछो तो कि भला तुमको सारे आसमान और ज़मीन से कौन रोज़ी देता है (वह क्या कहेंगे) तुम खुद कह दो कि खुदा और मैं या तुम (दोनों में से एक तो) ज़रूर राहे रास्त पर है (और दूसरा गुमराह) या वह सरीही गुमराही में पड़ा है (और दूसरा राहे रास्त पर)
25قُل لَّا تُسْأَلُونَ عَمَّا أَجْرَمْنَا وَلَا نُسْأَلُ عَمَّا تَعْمَلُونَ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो न हमारे गुनाहों की तुमसे पूछ गछ होगी और न तुम्हारी कारस्तानियों की हम से बाज़ पुर्स
26قُلْ يَجْمَعُ بَيْنَنَا رَبُّنَا ثُمَّ يَفْتَحُ بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَهُوَ الْفَتَّاحُ الْعَلِيمُ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि हमारा परवरदिगार (क़यामत में) हम सबको इकट्ठा करेगा फिर हमारे दरमियान (ठीक) फैसला कर देगा और वह तो ठीक-ठीक फैसला करने वाला वाक़िफकार है
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अनुवाद — सबा 24

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Tuesday, August 18, 2026

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