Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الشَّفَاعَةُ (शफ़ाअत): सिफ़ारिश, किसी के लिए विनती करना।
- أَذِنَ (अज़िना): अनुमति देना, इजाज़त देना।
- فُزِّعَ (फ़ुज़्ज़िआ): डर या घबराहट दूर होना, भय समाप्त होना।
- الْعَلِيُّ (अल-अली): सबसे ऊँचा, जिसकी शान सबसे बुलंद हो।
- الْكَبِيرُ (अल-कबीर): सबसे महान, जिससे बड़ा कोई नहीं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला की शान और उसकी बुज़ुर्गी का यह एक अज़ीम मंज़र है। वह फ़रमाता है कि उसके यहाँ किसी की सिफ़ारिश किसी के काम नहीं आ सकती, मगर उसी के लिए जिसे अल्लाह ने ख़ुद सिफ़ारिश करने की इजाज़त दी हो। यानी शफ़ाअत का पूरा अख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। कोई भी फ़रिश्ता, कोई नबी या कोई वली — सब उसकी मरज़ी के मोहताज हैं। अल्लाह जिसे चाहे सिफ़ारिश की इजाज़त दे और जिसके लिए चाहे उसे माफ़ी का हक़ीक़ी क़ाबिल बनाए।
फिर अल्लाह तआला अपनी अज़मत का एक हैरतअंगेज़ नज़ारा बयान करता है — जब वह आसमान में कोई वही या हुक्म फ़रमाता है, तो फ़रिश्तों के दिलों पर ऐसी हैबत और ख़ौफ़ तारी होता है कि वे घबरा जाते हैं और उन पर ऐसी सी बेहोशी तारी हो जाती है जैसे मौत की घड़ी में होती है। यह उसकी अज़मत का नमूना है कि उसकी आवाज़ सुनकर सबसे करीबी फ़रिश्ते भी डर से काँप उठते हैं। जब यह ख़ौफ़ और घबराहट उनके दिलों से दूर होती है, तो वे एक-दूसरे से पूछते हैं: "तुम्हारे रब ने क्या फ़रमाया?" तो फ़रिश्ते जवाब देते हैं: "उसने सिर्फ़ हक़ (सच) फ़रमाया।" यानी अल्लाह की हर बात सच्ची, हक़ और अदल पर मबनी होती है — उसमें कोई कमी, कोई बुराई या कोई बेइंसाफ़ी नहीं होती।
और वही अल-अली (सबसे बुलंद) है — अपनी ज़ात में, अपनी क़ुदरत में और अपनी शान में। वही अल-कबीर (सबसे महान) है — हर चीज़ उसके सामने छोटी और बेबस है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की अज़मत के आगे हमें सर झुकाना चाहिए, उसी से डरना चाहिए और उसी से उम्मीद रखनी चाहिए। जिस दिन हम उसकी अज़मत को समझ लेंगे, हमारे दिलों में उसकी मुहब्बत और उसका ख़ौफ़ बढ़ जाएगा, और हम अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालने की कोशिश करेंगे। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम उस रब के करीब हों जो सबसे बड़ा, सबसे ऊँचा और सबसे मेहरबान है।
📜 आयत 21-25 — सूरा सबा
अनुवाद — सबा 23
सूरा सबा आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसके लिए वह खुद इजाज़त अता फ़रमाए उसके सिवा कोई…सूरा आयत 23/54 — सूरा सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा सबा सुनें, सूरा सबा अनुवाद, सूरा सबा mp3, सूरा सबा pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा सबा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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