सबा · 23/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
وَلَا تَنفَعُ الشَّفَاعَةُ عِندَهُ إِلَّا لِمَنْ أَذِنَ لَهُ ۚ حَتَّىٰ إِذَا فُزِّعَ عَن قُلُوبِهِمْ قَالُوا مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ ۖ قَالُوا الْحَقَّ ۖ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ ۝٢٣
Wa laa tanfa`ush shafaa`atu `indahooo illaa liman azina lah; hattaaa izaa fuzzi`a `an quloobihim qaaloo maazaa qaala Rabbukum; qaalul haqq, wa Huwal `Aliyul Kabeer
📖 हिंदी अर्थ
जिसके लिए वह खुद इजाज़त अता फ़रमाए उसके सिवा कोई सिफारिश उसकी बारगाह में काम न आएगी (उसके दरबार की हैबत) यहाँ तक (है) कि जब (शिफ़ाअत का) हुक्म होता है तो शिफ़ाअत करने वाले बेहोश हो जाते हैं फिर तब उनके दिलों की घबराहट दूर कर दी जाती है तो पूछते हैं कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या हुक्म दिया

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الشَّفَاعَةُ (शफ़ाअत): सिफ़ारिश, किसी के लिए विनती करना।
  • أَذِنَ (अज़िना): अनुमति देना, इजाज़त देना।
  • فُزِّعَ (फ़ुज़्ज़िआ): डर या घबराहट दूर होना, भय समाप्त होना।
  • الْعَلِيُّ (अल-अली): सबसे ऊँचा, जिसकी शान सबसे बुलंद हो।
  • الْكَبِيرُ (अल-कबीर): सबसे महान, जिससे बड़ा कोई नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला की शान और उसकी बुज़ुर्गी का यह एक अज़ीम मंज़र है। वह फ़रमाता है कि उसके यहाँ किसी की सिफ़ारिश किसी के काम नहीं आ सकती, मगर उसी के लिए जिसे अल्लाह ने ख़ुद सिफ़ारिश करने की इजाज़त दी हो। यानी शफ़ाअत का पूरा अख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। कोई भी फ़रिश्ता, कोई नबी या कोई वली — सब उसकी मरज़ी के मोहताज हैं। अल्लाह जिसे चाहे सिफ़ारिश की इजाज़त दे और जिसके लिए चाहे उसे माफ़ी का हक़ीक़ी क़ाबिल बनाए।

फिर अल्लाह तआला अपनी अज़मत का एक हैरतअंगेज़ नज़ारा बयान करता है — जब वह आसमान में कोई वही या हुक्म फ़रमाता है, तो फ़रिश्तों के दिलों पर ऐसी हैबत और ख़ौफ़ तारी होता है कि वे घबरा जाते हैं और उन पर ऐसी सी बेहोशी तारी हो जाती है जैसे मौत की घड़ी में होती है। यह उसकी अज़मत का नमूना है कि उसकी आवाज़ सुनकर सबसे करीबी फ़रिश्ते भी डर से काँप उठते हैं। जब यह ख़ौफ़ और घबराहट उनके दिलों से दूर होती है, तो वे एक-दूसरे से पूछते हैं: "तुम्हारे रब ने क्या फ़रमाया?" तो फ़रिश्ते जवाब देते हैं: "उसने सिर्फ़ हक़ (सच) फ़रमाया।" यानी अल्लाह की हर बात सच्ची, हक़ और अदल पर मबनी होती है — उसमें कोई कमी, कोई बुराई या कोई बेइंसाफ़ी नहीं होती।

और वही अल-अली (सबसे बुलंद) है — अपनी ज़ात में, अपनी क़ुदरत में और अपनी शान में। वही अल-कबीर (सबसे महान) है — हर चीज़ उसके सामने छोटी और बेबस है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की अज़मत के आगे हमें सर झुकाना चाहिए, उसी से डरना चाहिए और उसी से उम्मीद रखनी चाहिए। जिस दिन हम उसकी अज़मत को समझ लेंगे, हमारे दिलों में उसकी मुहब्बत और उसका ख़ौफ़ बढ़ जाएगा, और हम अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालने की कोशिश करेंगे। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम उस रब के करीब हों जो सबसे बड़ा, सबसे ऊँचा और सबसे मेहरबान है।



📜 आयत 21-25 — सबा

21وَمَا كَانَ لَهُ عَلَيْهِم مِّن سُلْطَانٍ إِلَّا لِنَعْلَمَ مَن يُؤْمِنُ بِالْآخِرَةِ مِمَّنْ هُوَ مِنْهَا فِي شَكٍّ ۗ وَرَبُّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَفِيظٌ
और शैतान का उन लोगों पर कुछ क़ाबू तो था नहीं मगर ये (मतलब था) कि हम उन लोगों को जो आख़ेरत का यक़ीन रखते हैं उन लोगों से अलग देख लें जो उसके बारे में शक में (पड़े) हैं और तुम्हारा परवरदिगार तो हर चीज़ का निगरॉ है
22قُلِ ادْعُوا الَّذِينَ زَعَمْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ فِي السَّمَاوَاتِ وَلَا فِي الْأَرْضِ وَمَا لَهُمْ فِيهِمَا مِن شِرْكٍ وَمَا لَهُ مِنْهُم مِّن ظَهِيرٍ
(ऐ रसूल इनसे) कह दो कि जिन लोगों को तुम खुद ख़ुदा के सिवा (माबूद) समझते हो पुकारो (तो मालूम हो जाएगा कि) वह लोग ज़र्रा बराबर न आसमानों में कुछ इख़तेयार रखते हैं और न ज़मीन में और न उनकी उन दोनों में शिरकत है और न उनमें से कोई खुदा का (किसी चीज़ में) मद्दगार है
23وَلَا تَنفَعُ الشَّفَاعَةُ عِندَهُ إِلَّا لِمَنْ أَذِنَ لَهُ ۚ حَتَّىٰ إِذَا فُزِّعَ عَن قُلُوبِهِمْ قَالُوا مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ ۖ قَالُوا الْحَقَّ ۖ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ
जिसके लिए वह खुद इजाज़त अता फ़रमाए उसके सिवा कोई सिफारिश उसकी बारगाह में काम न आएगी (उसके दरबार की हैबत) यहाँ तक (है) कि जब (शिफ़ाअत का) हुक्म होता है तो शिफ़ाअत करने वाले बेहोश हो जाते हैं फिर तब उनके दिलों की घबराहट दूर कर दी जाती है तो पूछते हैं कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या हुक्म दिया
24۞ قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ وَإِنَّا أَوْ إِيَّاكُمْ لَعَلَىٰ هُدًى أَوْ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो मुक़र्रिब फरिश्ते कहते हैं कि जो वाजिबी था (ऐ रसूल) तुम (इनसे) पूछो तो कि भला तुमको सारे आसमान और ज़मीन से कौन रोज़ी देता है (वह क्या कहेंगे) तुम खुद कह दो कि खुदा और मैं या तुम (दोनों में से एक तो) ज़रूर राहे रास्त पर है (और दूसरा गुमराह) या वह सरीही गुमराही में पड़ा है (और दूसरा राहे रास्त पर)
25قُل لَّا تُسْأَلُونَ عَمَّا أَجْرَمْنَا وَلَا نُسْأَلُ عَمَّا تَعْمَلُونَ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो न हमारे गुनाहों की तुमसे पूछ गछ होगी और न तुम्हारी कारस्तानियों की हम से बाज़ पुर्स
सबाकुरान सूची
54आयत
मक्कीRevelation
23आयत

अनुवाद — सबा 23

सूरा सबा आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसके लिए वह खुद इजाज़त अता फ़रमाए उसके सिवा कोई…

सूरा आयत 23/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए