सबा · 25/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
قُل لَّا تُسْأَلُونَ عَمَّا أَجْرَمْنَا وَلَا نُسْأَلُ عَمَّا تَعْمَلُونَ ۝٢٥
Qul laa tus`aloona `ammaaa ajramnaa wa laa nus`alu `ammaa ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो न हमारे गुनाहों की तुमसे पूछ गछ होगी और न तुम्हारी कारस्तानियों की हम से बाज़ पुर्स

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَجْرَمْنَا — हमने जो अपराध किए, गुनाह किए।
  • تُسْأَلُونَ — तुमसे पूछा जाएगा, तुम जवाबदेह ठहराए जाओगे।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकीन से कह दीजिए कि जिस दिन हम सब अपने रब के सामने खड़े होंगे, उस दिन तुमसे हमारे गुनाहों के बारे में सवाल नहीं होगा, और न ही हमसे तुम्हारे आमाल के बारे में पूछा जाएगा। क्योंकि हमारा तुमसे कोई ताल्लुक़ नहीं, हम तुम्हारे कुफ़्र और बुरे कामों से बिल्कुल बरी हैं। हर शख्स अपने किए का जिम्मेदार है, और हर इंसान अपने आमाल का हिसाब खुद देगा।

यह आयत मुसलमानों को एक बहुत बड़ी खुशखबरी देती है कि उनका ईमान और नेक अमल उनके अपने हैं, और काफिरों के गुनाहों का बोझ उन पर नहीं डाला जाएगा। साथ ही यह भी सिखाती है कि हर इंसान को अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए — जो अच्छा करेगा वह अपने भले के लिए करेगा, और जो बुरा करेगा उसका वबाल उसी पर होगा।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि दूसरों के गुनाहों की जवाबदेही हम पर नहीं है, इसलिए हमें अपनी इस्लाह (सुधार) पर ध्यान देना चाहिए, अपने अमल को दुरुस्त करना चाहिए, और दूसरों के बुरे कामों से निराश या परेशान नहीं होना चाहिए। अल्लाह हर एक से उसके अपने कर्मों के बारे में पूछेगा — यह अल्लाह की रहमत और अद्ल दोनों का तकाज़ा है।

इस आयत में मोमिनीन के लिए एक पुरअसरार इत्मीनान है कि उनका रिश्ता अल्लाह से है, और उनकी नजात (मुक्ति) उनके अपने ईमान और अमल पर मुनहसिर है, न कि किसी और के कर्मों पर। यही इस्लाम का पैगाम है — हर शख्स अपनी जिम्मेदारी खुद उठाए, और अल्लाह की रहमत पर भरोसा रखे।



📜 आयत 23-27 — सबा

23وَلَا تَنفَعُ الشَّفَاعَةُ عِندَهُ إِلَّا لِمَنْ أَذِنَ لَهُ ۚ حَتَّىٰ إِذَا فُزِّعَ عَن قُلُوبِهِمْ قَالُوا مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ ۖ قَالُوا الْحَقَّ ۖ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ
जिसके लिए वह खुद इजाज़त अता फ़रमाए उसके सिवा कोई सिफारिश उसकी बारगाह में काम न आएगी (उसके दरबार की हैबत) यहाँ तक (है) कि जब (शिफ़ाअत का) हुक्म होता है तो शिफ़ाअत करने वाले बेहोश हो जाते हैं फिर तब उनके दिलों की घबराहट दूर कर दी जाती है तो पूछते हैं कि तुम्हारे परवरदिगार ने क्या हुक्म दिया
24۞ قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ قُلِ اللَّهُ ۖ وَإِنَّا أَوْ إِيَّاكُمْ لَعَلَىٰ هُدًى أَوْ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो मुक़र्रिब फरिश्ते कहते हैं कि जो वाजिबी था (ऐ रसूल) तुम (इनसे) पूछो तो कि भला तुमको सारे आसमान और ज़मीन से कौन रोज़ी देता है (वह क्या कहेंगे) तुम खुद कह दो कि खुदा और मैं या तुम (दोनों में से एक तो) ज़रूर राहे रास्त पर है (और दूसरा गुमराह) या वह सरीही गुमराही में पड़ा है (और दूसरा राहे रास्त पर)
25قُل لَّا تُسْأَلُونَ عَمَّا أَجْرَمْنَا وَلَا نُسْأَلُ عَمَّا تَعْمَلُونَ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो न हमारे गुनाहों की तुमसे पूछ गछ होगी और न तुम्हारी कारस्तानियों की हम से बाज़ पुर्स
26قُلْ يَجْمَعُ بَيْنَنَا رَبُّنَا ثُمَّ يَفْتَحُ بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَهُوَ الْفَتَّاحُ الْعَلِيمُ
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि हमारा परवरदिगार (क़यामत में) हम सबको इकट्ठा करेगा फिर हमारे दरमियान (ठीक) फैसला कर देगा और वह तो ठीक-ठीक फैसला करने वाला वाक़िफकार है
27قُلْ أَرُونِيَ الَّذِينَ أَلْحَقْتُم بِهِ شُرَكَاءَ ۖ كَلَّا ۚ بَلْ هُوَ اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
(ऐ रसूल तुम कह दो कि जिनको तुम ने खुदा का शरीक बनाकर) खुदा के साथ मिलाया है ज़रा उन्हें मुझे भी तो दिखा दो हरगिज़ (कोई शरीक नहीं) बल्कि खुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
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अनुवाद — सबा 25

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सूरा आयत 25/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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