अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَوْقُوفُونَ: रोके गए, खड़े किए गए (हिसाब के लिए)
- يَرْجِعُ بَعْضُهُمْ إِلَى بَعْضٍ الْقَوْلَ: आपस में बातचीत करना, एक दूसरे पर दोषारोपण करना
- اسْتُضْعِفُوا: कमज़ोर समझे गए, अधीनस्थ लोग (अनुयायी)
- اسْتَكْبَرُوا: घमंड करने वाले, बड़े बनने वाले (नेता और सरदार)
- لَوْلَا أَنتُمْ: अगर तुम न होते
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन काफ़िरों की हालत बयान कर रहा है जिन्होंने साफ़ लफ़्ज़ों में कह दिया कि "हम न इस क़ुरआन पर ईमान लाएँगे और न उन किताबों पर जो इससे पहले उतरीं" — यानी तौरात, इंजील और ज़बूर। उन्होंने अल्लाह की तमाम रहस्यमयी किताबों को झुठला दिया, क्योंकि जो आख़िरी किताब (क़ुरआन) आई, उसे मानने से इनकार करके उन्होंने दरअसल पहले की सारी किताबों को भी नकार दिया। यह उनकी सख़्त सरकशी और हठधर्मिता थी।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ से फ़रमाता है: "ऐ नबी! काश तुम देखते उस वक़्त को जब ये ज़ालिम लोग अपने रब के सामने हिसाब के लिए खड़े किए जाएँगे।" उस दिन उनकी क्या हालत होगी? वे आपस में झगड़ने लगेंगे, एक दूसरे पर इल्ज़ाम लगाएँगे। कमज़ोर और अधीनस्थ लोग (जो दुनिया में नेताओं की बात मानते थे) अपने बड़े नेताओं से कहेंगे: "अगर तुम न होते, तो हम ईमान ले आए होते। तुमने ही हमें गुमराह किया, हमें सच्चाई से रोका, हमें धोखे में रखा।"
यह एक बहुत बड़ा सबक़ है हमारे लिए! यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन और अल्लाह की हर किताब पर ईमान लाना कितना ज़रूरी है। जो शख्स क़ुरआन को मानने से इनकार करता है, वह दरअसल अल्लाह की तमाम रहमतों से महरूम हो जाता है। और यह भी सबक़ है कि हमें अंधी पैरवी से बचना चाहिए — किसी नेता या बड़े की बात पर आँख बंद करके नहीं चलना चाहिए, बल्कि खुद सच्चाई को पहचानना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें आगाह करती है कि क़ियामत के दिन कोई बहाना क़बूल नहीं होगा। आज हमें जो सच्चाई मिली है — क़ुरआन और सुन्नत — उसे पकड़ लेना चाहिए। अल्लाह तआला ने हम पर बड़ा एहसान किया है कि हमें यह रौशनी अता की। हमें चाहिए कि इस नेमत की क़द्र करें, क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 29-33 — सबा
अनुवाद — सबा 31
सूरा सबा आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग काफिर हों बैठे कहते हैं कि हम…सूरा आयत 31/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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