सबा · 51/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
وَلَوْ تَرَىٰ إِذْ فَزِعُوا فَلَا فَوْتَ وَأُخِذُوا مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ ۝٥١
Wa law taraaa iz fazi`oo falaa fawta wa ukhizoo mim makaanin qareeb
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) काश तुम देखते (तो सख्त ताज्जुब करते) जब ये कुफ्फार (मैदाने हशर में) घबराए-घबराए फिरते होंगे तो भी छुटकारा न होगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَزِعُوا: वे घबरा गए, डर गए।
  • فَلَا فَوْتَ: कोई बचाव नहीं, कहीं भागने का रास्ता नहीं।
  • مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ: निकट स्थान से, यानी जहाँ से वे आसानी से पकड़े जा सकें।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! यदि तुम उस समय को देखो जब ये काफ़िर (इनकार करने वाले) अल्लाह के अज़ाब (दंड) को अपनी आँखों से देखकर घबरा जाएँगे और डर के मारे इधर-उधर भागने की कोशिश करेंगे, तो तुम एक अत्यंत भयानक और हैरतअंगेज़ दृश्य देखोगे। उस दिन न उनके लिए कोई बचाव होगा, न कोई छिपने की जगह, और न ही भागने का कोई रास्ता। अल्लाह के फ़रिश्ते उन्हें उसी निकट स्थान से पकड़ लेंगे—यानी उनके ठहरने की जगह से ही—और उन्हें आग की तरफ खींच ले जाएँगे। यह पकड़ इतनी आसान और तेज़ होगी कि उन्हें पलक झपकते ही जहन्नम में डाल दिया जाएगा।

यह वह दिन होगा जब सारे बहाने बेकार होंगे, सारी ताकतें नाकाम होंगी, और हर व्यक्ति अपने किए का फल पाएगा। जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह के आगे सिर नहीं झुकाया, उन्हें उस दिन मजबूरन झुकना पड़ेगा, लेकिन वह झुकना उनके किसी काम न आएगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और बताती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत करीब है। इंसान को चाहिए कि वह दुनिया में रहते हुए अल्लाह की इबादत करे, उसके हुक्मों को माने और अपने गुनाहों से तौबा करे। यहाँ से भागना नामुमकिन है, लेकिन अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है—जो कोई भी सच्चे दिल से तौबा करके अल्लाह की तरफ लौट आए, अल्लाह उसे माफ कर देता है और उसे जहन्नम की आग से बचा लेता है। यही सबसे बड़ी सफलता है। आइए, हम सब अपने जीवन को अल्लाह के हुक्मों के अनुसार ढालें और उस दिन की शर्मिंदगी से बचने की कोशिश करें, क्योंकि आज का फैसला हमारे हाथ में है, कल नहीं।



📜 आयत 49-53 — सूरा सबा

49قُلْ جَاءَ الْحَقُّ وَمَا يُبْدِئُ الْبَاطِلُ وَمَا يُعِيدُ
(अब उनसे) कह दो दीने हक़ आ गया और इतना तो भी (समझो की) बातिल (माबूद) शुरू-शुरू कुछ पैदा करता है न (मरने के बाद) दोबारा ज़िन्दा कर सकता है
50قُلْ إِن ضَلَلْتُ فَإِنَّمَا أَضِلُّ عَلَىٰ نَفْسِي ۖ وَإِنِ اهْتَدَيْتُ فَبِمَا يُوحِي إِلَيَّ رَبِّي ۚ إِنَّهُ سَمِيعٌ قَرِيبٌ
(ऐ रसूल) तुम ये भी कह दो कि अगर मैं गुमराह हो गया हूँ तो अपनी ही जान पर मेरी गुमराही (का वबाल) है और अगर मैं राहे रास्त पर हूँ तो इस ''वही'' के तुफ़ैल से जो मेरा परवरदिगार मेरी तरफ़ भेजता है बेशक वह सुनने वाला (और बहुत) क़रीब है
51وَلَوْ تَرَىٰ إِذْ فَزِعُوا فَلَا فَوْتَ وَأُخِذُوا مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ
और (ऐ रसूल) काश तुम देखते (तो सख्त ताज्जुब करते) जब ये कुफ्फार (मैदाने हशर में) घबराए-घबराए फिरते होंगे तो भी छुटकारा न होगा
52وَقَالُوا آمَنَّا بِهِ وَأَنَّىٰ لَهُمُ التَّنَاوُشُ مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ
और आस ही पास से (बाआसानी) गिरफ्तार कर लिए जाएँगे और (उस वक्त बेबसी में) कहेंगे कि अब हम रसूलों पर ईमान लाए और इतनी दूर दराज़ जगह से (ईमान पर) उनका दसतरस (पहुँचना) कहाँ मुमकिन है
53وَقَدْ كَفَرُوا بِهِ مِن قَبْلُ ۖ وَيَقْذِفُونَ بِالْغَيْبِ مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ
हालॉकि ये लोग उससे पहले ही जब उनका दसतरस था इन्कार कर चुके और (दुनिया में तमाम उम्र) बे देखे भाले (अटकल के) तके बड़ी-बड़ी दूर से चलाते रहे
सबाकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
51आयत

अनुवाद — सबा 51

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सूरा आयत 51/54 — सूरा सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा सबा सुनें, सूरा सबा अनुवाद, सूरा सबा mp3, सूरा सबा pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.





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Saturday, October 3, 2026

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