सबा · 50/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
قُلْ إِن ضَلَلْتُ فَإِنَّمَا أَضِلُّ عَلَىٰ نَفْسِي ۖ وَإِنِ اهْتَدَيْتُ فَبِمَا يُوحِي إِلَيَّ رَبِّي ۚ إِنَّهُ سَمِيعٌ قَرِيبٌ ۝٥٠
Qul in dalaltu fainnamaaa adillu `alaa nafsee wa inih-tadaitu fabimaa yoohee ilaiya Rabbee; innahoo Samee`un Qareeb
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम ये भी कह दो कि अगर मैं गुमराह हो गया हूँ तो अपनी ही जान पर मेरी गुमराही (का वबाल) है और अगर मैं राहे रास्त पर हूँ तो इस ''वही'' के तुफ़ैल से जो मेरा परवरदिगार मेरी तरफ़ भेजता है बेशक वह सुनने वाला (और बहुत) क़रीब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَلَلْتُ (मैं भटक गया) — सत्य मार्ग से विचलित हो गया।
  • أَضِلُّ (मैं भटकाऊँ) — अपने कार्यों का बुरा परिणाम।
  • اهْتَدَيْتُ (मैंने मार्ग पाया) — सीधे मार्ग पर चला।
  • يُوحِي (प्रकाशना भेजता है) — अल्लाह की ओर से आने वाला संदेश।
  • سَمِيعٌ (सब कुछ सुनने वाला) — जिससे कोई बात छिपी न हो।
  • قَرِيبٌ (निकट) — जो अपने बंदों के बहुत करीब है।

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए, जो आपको झुठला रहे हैं और आप पर इल्ज़ाम लगा रहे हैं कि आप गुमराह हैं: "अगर मैं भटक जाऊँ, तो मेरे भटकने का वबाल (बोझ) सिर्फ़ मेरी अपनी जान पर होगा। मेरी गुमराही का कोई नुक़्सान तुम्हें नहीं पहुँच सकता, क्योंकि मैं तुम्हें अपनी तरफ़ नहीं बुलाता, बल्कि अल्लाह की तरफ़ बुलाता हूँ। और अगर मैं हिदायत (सत्य मार्ग) पर हूँ, तो यह सिर्फ़ अल्लाह के उस वह़्य (प्रकाशना) की बदौलत है जो मेरा रब मेरी ओर भेजता है। यह मेरी अपनी कोई ख़ूबी नहीं है, बल्कि उसकी देन है।"

यह आयत नबी करीम ﷺ की अद्भुत नम्रता और अल्लाह पर पूर्ण भरोसे को दर्शाती है। आप ﷺ अपनी तरफ़ से कोई बात नहीं कहते, बल्कि पूरी तरह अल्लाह के हुक्म के पाबंद हैं। इससे हमें सीख मिलती है कि इंसान को अपने अमल पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि हर नेकी को अल्लाह की तौफ़ीक़ समझना चाहिए।

फिर अल्लाह तआला अपनी दो ख़ूबियाँ बयान करता है: "वह सब कुछ सुनने वाला है और बहुत करीब है।" यानी अल्लाह तआला अपने बंदों की हर आवाज़ सुनता है, चाहे वह ज़ुबान से निकले या दिल में हो। वह उन लोगों के बहुत करीब है जो उसे पुकारते हैं, उससे दुआ माँगते हैं और उसकी तरफ़ रुजू करते हैं। यह बात हमारे दिलों को सुकून देती है कि हमारा रब हमसे दूर नहीं है, बल्कि हमारी रग-ए-जाँ से भी करीब है।

इस आयत में एक बड़ी दलील है कि नबी ﷺ की हिदायत अल्लाह की तरफ़ से है, और उनकी दावत सच्ची है। अगर वह झूठे होते तो अल्लाह उन्हें हिदायत न देता। साथ ही, यह आयत मुसलमानों को सब्र और भरोसे की तालीम देती है कि जब उन पर इल्ज़ाम लगाए जाएँ, तो वह अपनी बेगुनाही अल्लाह के सुपुर्द कर दें, क्योंकि अल्लाह ही सब कुछ सुनने और जानने वाला है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमारी हर अच्छाई अल्लाह की तरफ़ से है, और हर बुराई हमारे अपने कर्मों का नतीजा है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और उसी से मदद माँगनी चाहिए। अल्लाह तआला अपने बंदों के बहुत करीब है — बस ज़रूरत है दिल से पुकारने की, और वह सुन लेगा।



📜 आयत 48-52 — सूरा सबा

48قُلْ إِنَّ رَبِّي يَقْذِفُ بِالْحَقِّ عَلَّامُ الْغُيُوبِ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कह दो कि मेरा बड़ा गैबवाँ परवरदिगार (मेरे दिल में) दीन हक़ को बराबर ऊपर से उतारता है
49قُلْ جَاءَ الْحَقُّ وَمَا يُبْدِئُ الْبَاطِلُ وَمَا يُعِيدُ
(अब उनसे) कह दो दीने हक़ आ गया और इतना तो भी (समझो की) बातिल (माबूद) शुरू-शुरू कुछ पैदा करता है न (मरने के बाद) दोबारा ज़िन्दा कर सकता है
50قُلْ إِن ضَلَلْتُ فَإِنَّمَا أَضِلُّ عَلَىٰ نَفْسِي ۖ وَإِنِ اهْتَدَيْتُ فَبِمَا يُوحِي إِلَيَّ رَبِّي ۚ إِنَّهُ سَمِيعٌ قَرِيبٌ
(ऐ रसूल) तुम ये भी कह दो कि अगर मैं गुमराह हो गया हूँ तो अपनी ही जान पर मेरी गुमराही (का वबाल) है और अगर मैं राहे रास्त पर हूँ तो इस ''वही'' के तुफ़ैल से जो मेरा परवरदिगार मेरी तरफ़ भेजता है बेशक वह सुनने वाला (और बहुत) क़रीब है
51وَلَوْ تَرَىٰ إِذْ فَزِعُوا فَلَا فَوْتَ وَأُخِذُوا مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ
और (ऐ रसूल) काश तुम देखते (तो सख्त ताज्जुब करते) जब ये कुफ्फार (मैदाने हशर में) घबराए-घबराए फिरते होंगे तो भी छुटकारा न होगा
52وَقَالُوا آمَنَّا بِهِ وَأَنَّىٰ لَهُمُ التَّنَاوُشُ مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ
और आस ही पास से (बाआसानी) गिरफ्तार कर लिए जाएँगे और (उस वक्त बेबसी में) कहेंगे कि अब हम रसूलों पर ईमान लाए और इतनी दूर दराज़ जगह से (ईमान पर) उनका दसतरस (पहुँचना) कहाँ मुमकिन है
सबाकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
50आयत

अनुवाद — सबा 50

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Thursday, October 1, 2026

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