Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا يَفْتَحِ اللهُ: अल्लाह जो खोले या प्रदान करे।
- مِن رَّحْمَةٍ: रहमत में से, यानी किसी नेमत या भलाई में से।
- فَلَا مُمْسِكَ لَهَا: तो उसे रोकने वाला कोई नहीं।
- وَمَا يُمْسِكْ: और जो अल्लाह रोक ले।
- فَلَا مُرْسِلَ لَهُ: तो उसे छोड़ने वाला (भेजने वाला) कोई नहीं।
- مِن بَعْدِهِ: उसके (रोकने के) बाद।
- الْعَزِيزُ: सब पर ग़ालिब, जिसे कोई हरा न सके।
- الْحَكِيمُ: पूर्ण ज्ञान और हिकमत वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत और उसके इख्तियार (अधिकार) की याद दिलाती है। अल्लाह तआला ही सारी रहमतों का मालिक है। जब वह किसी बंदे पर रहमत बरसाता है—चाहे वह रिज़्क़ (रोज़ी) हो, बारिश हो, सेहत हो, इल्म हो, या कोई और नेमत—तो उसे रोकने की ताक़त किसी में नहीं। न कोई इंसान, न कोई जिन्न, न कोई फरिश्ता उस रहमत को रोक सकता है। और जब अल्लाह किसी चीज़ को रोक लेता है, तो उसे वापस लाने या भेजने की कूवत किसी को हासिल नहीं। यह बात हमें सिखाती है कि सारे मामले अल्लाह के हाथ में हैं, और हमें हर हाल में उसी पर भरोसा रखना चाहिए।
अल्लाह का यह क़ानून सिर्फ़ दुनिया की चीज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि दीन और आख़िरत की भलाइयों पर भी लागू होता है। जब अल्लाह किसी को हिदायत (मार्गदर्शन) देता है, तो कोई उसे गुमराह नहीं कर सकता, और जब वह किसी को गुमराह करता है, तो कोई उसे हिदायत नहीं दे सकता। यही वजह है कि हमें अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें अपनी रहमत से नवाज़े और हमें सीधे रास्ते पर चलाए।
आयत के अंत में अल्लाह अपनी दो सिफ़ात (गुण) बयान करता है: "वह अज़ीज़ है", यानी उसकी क़ुदरत के आगे हर चीज़ बेबस है, कोई उसके फैसले को टाल नहीं सकता। और "हकीम है", यानी जो कुछ वह खोलता है या बंद करता है, सब हिकमत और मस्लहत (भलाई) पर आधारित है। वह कभी ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि अपनी बेपनाह हिकमत से बंदों के हालात के मुताबिक़ फैसला करता है।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपनी ज़रूरतों के लिए सिर्फ़ अल्लाह से माँगें, क्योंकि देने और रोकने का इख्तियार सिर्फ़ उसी के पास है। जब हम यह समझ लेंगे कि हर नेमत अल्लाह की तरफ़ से है, तो हमारा दिल उसकी तरफ़ झुकेगा, हम शुक्र करने वाले बनेंगे, और मुसीबत में सब्र करने की ताक़त पाएँगे। यही ईमान की निशानी है कि इंसान अल्लाह पर पूरा भरोसा रखे और यह यक़ीन करे कि उसकी रहमत से कोई चीज़ बड़ी या छोटी नहीं है।
अल्लाह हमें अपनी रहमतों का एहसान मानने और उसके आगे झुकने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 1-4 — सूरा फातिर
अनुवाद — फातिर 2
सूरा फातिर आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लोगों के वास्ते जब (अपनी) रहमत (के दरवाजे) ख़ोल दे…सूरा आयत 2/45 — सूरा फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फातिर सुनें, सूरा फातिर अनुवाद, सूरा फातिर mp3, सूरा फातिर pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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