फातिर · 2/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
مَّا يَفْتَحِ اللَّهُ لِلنَّاسِ مِن رَّحْمَةٍ فَلَا مُمْسِكَ لَهَا ۖ وَمَا يُمْسِكْ فَلَا مُرْسِلَ لَهُ مِن بَعْدِهِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٢
Maa yaftahil laahu linnaaasi mir rahmatin falaa mumsika lahaa wa maa yumsik falaa mursila lahoo mimb`dih; wa Huwal `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
लोगों के वास्ते जब (अपनी) रहमत (के दरवाजे) ख़ोल दे तो कोई उसे जारी नहीं कर सकता और जिस चीज़ को रोक ले उसके बाद उसे कोई रोक नहीं सकता और वही हर चीज़ पर ग़ालिब और दाना व बीना हकीम है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا يَفْتَحِ اللهُ: अल्लाह जो खोले या प्रदान करे।
  • مِن رَّحْمَةٍ: रहमत में से, यानी किसी नेमत या भलाई में से।
  • فَلَا مُمْسِكَ لَهَا: तो उसे रोकने वाला कोई नहीं।
  • وَمَا يُمْسِكْ: और जो अल्लाह रोक ले।
  • فَلَا مُرْسِلَ لَهُ: तो उसे छोड़ने वाला (भेजने वाला) कोई नहीं।
  • مِن بَعْدِهِ: उसके (रोकने के) बाद।
  • الْعَزِيزُ: सब पर ग़ालिब, जिसे कोई हरा न सके।
  • الْحَكِيمُ: पूर्ण ज्ञान और हिकमत वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत और उसके इख्तियार (अधिकार) की याद दिलाती है। अल्लाह तआला ही सारी रहमतों का मालिक है। जब वह किसी बंदे पर रहमत बरसाता है—चाहे वह रिज़्क़ (रोज़ी) हो, बारिश हो, सेहत हो, इल्म हो, या कोई और नेमत—तो उसे रोकने की ताक़त किसी में नहीं। न कोई इंसान, न कोई जिन्न, न कोई फरिश्ता उस रहमत को रोक सकता है। और जब अल्लाह किसी चीज़ को रोक लेता है, तो उसे वापस लाने या भेजने की कूवत किसी को हासिल नहीं। यह बात हमें सिखाती है कि सारे मामले अल्लाह के हाथ में हैं, और हमें हर हाल में उसी पर भरोसा रखना चाहिए।

अल्लाह का यह क़ानून सिर्फ़ दुनिया की चीज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि दीन और आख़िरत की भलाइयों पर भी लागू होता है। जब अल्लाह किसी को हिदायत (मार्गदर्शन) देता है, तो कोई उसे गुमराह नहीं कर सकता, और जब वह किसी को गुमराह करता है, तो कोई उसे हिदायत नहीं दे सकता। यही वजह है कि हमें अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें अपनी रहमत से नवाज़े और हमें सीधे रास्ते पर चलाए।

आयत के अंत में अल्लाह अपनी दो सिफ़ात (गुण) बयान करता है: "वह अज़ीज़ है", यानी उसकी क़ुदरत के आगे हर चीज़ बेबस है, कोई उसके फैसले को टाल नहीं सकता। और "हकीम है", यानी जो कुछ वह खोलता है या बंद करता है, सब हिकमत और मस्लहत (भलाई) पर आधारित है। वह कभी ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि अपनी बेपनाह हिकमत से बंदों के हालात के मुताबिक़ फैसला करता है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपनी ज़रूरतों के लिए सिर्फ़ अल्लाह से माँगें, क्योंकि देने और रोकने का इख्तियार सिर्फ़ उसी के पास है। जब हम यह समझ लेंगे कि हर नेमत अल्लाह की तरफ़ से है, तो हमारा दिल उसकी तरफ़ झुकेगा, हम शुक्र करने वाले बनेंगे, और मुसीबत में सब्र करने की ताक़त पाएँगे। यही ईमान की निशानी है कि इंसान अल्लाह पर पूरा भरोसा रखे और यह यक़ीन करे कि उसकी रहमत से कोई चीज़ बड़ी या छोटी नहीं है।

अल्लाह हमें अपनी रहमतों का एहसान मानने और उसके आगे झुकने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — फातिर

1الْحَمْدُ لِلَّهِ فَاطِرِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ جَاعِلِ الْمَلَائِكَةِ رُسُلًا أُولِي أَجْنِحَةٍ مَّثْنَىٰ وَثُلَاثَ وَرُبَاعَ ۚ يَزِيدُ فِي الْخَلْقِ مَا يَشَاءُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
हर तरह की तारीफ खुदा ही के लिए (मख़सूस) है जो सारे आसमान और ज़मीन का पैदा करने वाला फरिश्तों का (अपना) क़ासिद बनाने वाला है जिनके दो-दो और तीन-तीन और चार-चार पर होते हैं (मख़लूक़ात की) पैदाइश में जो (मुनासिब) चाहता है बढ़ा देता है बेशक खुदा हर चीज़ पर क़ादिर (व तवाना है)
2مَّا يَفْتَحِ اللَّهُ لِلنَّاسِ مِن رَّحْمَةٍ فَلَا مُمْسِكَ لَهَا ۖ وَمَا يُمْسِكْ فَلَا مُرْسِلَ لَهُ مِن بَعْدِهِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
लोगों के वास्ते जब (अपनी) रहमत (के दरवाजे) ख़ोल दे तो कोई उसे जारी नहीं कर सकता और जिस चीज़ को रोक ले उसके बाद उसे कोई रोक नहीं सकता और वही हर चीज़ पर ग़ालिब और दाना व बीना हकीम है
3يَا أَيُّهَا النَّاسُ اذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ ۚ هَلْ مِنْ خَالِقٍ غَيْرُ اللَّهِ يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۚ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
लोगों खुदा के एहसानात को जो उसने तुम पर किए हैं याद करो क्या खुदा के सिवा कोई और ख़ालिक है जो आसमान और ज़मीन से तुम्हारी रोज़ी पहुँचाता है उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं फिर तुम किधर बहके चले जा रहे हो
4وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كُذِّبَتْ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
और (ऐ रसूल) अगर ये लोग तुम्हें झुठलाएँ तो (कुढ़ो नहीं) तुमसे पहले बहुतेरे पैग़म्बर (लोगों के हाथों) झुठलाए जा चुके हैं और (आख़िर) कुल उमूर की रूजू तो खुदा ही की तरफ है
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Tuesday, August 18, 2026

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