फातिर · 3/45
अनुवाद उच्चारण — सूरा फातिर
يَا أَيُّهَا النَّاسُ اذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ ۚ هَلْ مِنْ خَالِقٍ غَيْرُ اللَّهِ يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۚ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ ۝٣
Yaaa ayyuhan naasuzkuroo ni`matal laahi `alaikum; hal min khaaliqin ghairul laahi yarzuqukum minas samaaa`i wal ard; laaa ilaaha illaa Huwa fa annaa tu`fakoon
📖 हिंदी अर्थ
लोगों खुदा के एहसानात को जो उसने तुम पर किए हैं याद करो क्या खुदा के सिवा कोई और ख़ालिक है जो आसमान और ज़मीन से तुम्हारी रोज़ी पहुँचाता है उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं फिर तुम किधर बहके चले जा रहे हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • निअ़मत: अल्लाह की देन, उपकार, कृपा।
  • तु'फ़कून: तुम पलटाए जाते हो, तुम्हें सच्चाई से भटकाया जा रहा है।

व्याख्या:

ऐ लोगों! अपने दिलों, अपनी ज़ुबानों और अपने अंगों के साथ अल्लाह की उस कृपा को याद करो जो उसने तुम पर की है। क्या अल्लाह के सिवा कोई और रचयिता है जो तुम्हें आसमान से बारिश देकर और ज़मीन से फल, अनाज और तरह-तरह की चीज़ें उगाकर रोज़ी पहुँचाता हो? हरगिज़ नहीं! कोई ख़ालिक़ और रिज़्क़ देने वाला नहीं है सिवाय अल्लाह के। वही अकेला है जिसकी इबादत का हक़ है, उसका कोई साझीदार नहीं।

फिर तुम कैसे सच्चाई से भटकाए जाते हो? कैसे तुम उस अल्लाह को छोड़कर दूसरों की तरफ़ मुड़ते हो जिसने तुम्हें पैदा किया, तुम्हारी परवरिश की और तुम्हें हर ज़रूरत की चीज़ मुहैया कराई? क्या यह बड़ी नाइंसाफ़ी नहीं कि इंसान उस मालिक को भूल जाए जो हर पल उस पर मेहरबान है, और उन चीज़ों की तरफ़ आशा लगाए जो न कुछ दे सकती हैं और न कुछ छीन सकती हैं?

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पल, हर साँस, हर निअ़मत — सब कुछ अल्लाह की देन है। जब हम सुबह उठते हैं, जब हम खाना खाते हैं, जब हम पानी पीते हैं, जब हम साँस लेते हैं — यह सब अल्लाह की कृपा है। क्या हमें इस एहसान का शुक्र अदा नहीं करना चाहिए? क्या हमें उसी की इबादत नहीं करनी चाहिए जो हमारा ख़ालिक़ और रिज़्क़ देने वाला है?

याद रखो! अल्लाह की निअ़मतें इतनी ज़्यादा हैं कि अगर हम गिनना चाहें तो गिन नहीं सकते। वही है जो आसमान से पानी बरसाता है, ज़मीन से फसलें उगाता है, और हमें हर तरह की रोज़ी देता है। तो फिर हम क्यों उसके सिवा किसी और की तरफ़ मुड़ें? हमें चाहिए कि हम अपने दिल को अल्लाह की याद से रोशन करें, अपनी ज़ुबान से उसका शुक्र अदा करें, और अपने अंगों से उसकी इबादत करें। यही सच्ची कामयाबी है, और यही हमारी फ़ितरत का तक़ाज़ा है।

अल्लाह हम सबको अपनी निअ़मतों का एहसान मानने वाला और अपनी इबादत पर साबित क़दम रहने वाला बनाए। आमीन।



📜 आयत 1-5 — सूरा फातिर

1الْحَمْدُ لِلَّهِ فَاطِرِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ جَاعِلِ الْمَلَائِكَةِ رُسُلًا أُولِي أَجْنِحَةٍ مَّثْنَىٰ وَثُلَاثَ وَرُبَاعَ ۚ يَزِيدُ فِي الْخَلْقِ مَا يَشَاءُ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
हर तरह की तारीफ खुदा ही के लिए (मख़सूस) है जो सारे आसमान और ज़मीन का पैदा करने वाला फरिश्तों का (अपना) क़ासिद बनाने वाला है जिनके दो-दो और तीन-तीन और चार-चार पर होते हैं (मख़लूक़ात की) पैदाइश में जो (मुनासिब) चाहता है बढ़ा देता है बेशक खुदा हर चीज़ पर क़ादिर (व तवाना है)
2مَّا يَفْتَحِ اللَّهُ لِلنَّاسِ مِن رَّحْمَةٍ فَلَا مُمْسِكَ لَهَا ۖ وَمَا يُمْسِكْ فَلَا مُرْسِلَ لَهُ مِن بَعْدِهِ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
लोगों के वास्ते जब (अपनी) रहमत (के दरवाजे) ख़ोल दे तो कोई उसे जारी नहीं कर सकता और जिस चीज़ को रोक ले उसके बाद उसे कोई रोक नहीं सकता और वही हर चीज़ पर ग़ालिब और दाना व बीना हकीम है
3يَا أَيُّهَا النَّاسُ اذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ ۚ هَلْ مِنْ خَالِقٍ غَيْرُ اللَّهِ يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۚ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
लोगों खुदा के एहसानात को जो उसने तुम पर किए हैं याद करो क्या खुदा के सिवा कोई और ख़ालिक है जो आसमान और ज़मीन से तुम्हारी रोज़ी पहुँचाता है उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं फिर तुम किधर बहके चले जा रहे हो
4وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كُذِّبَتْ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
और (ऐ रसूल) अगर ये लोग तुम्हें झुठलाएँ तो (कुढ़ो नहीं) तुमसे पहले बहुतेरे पैग़म्बर (लोगों के हाथों) झुठलाए जा चुके हैं और (आख़िर) कुल उमूर की रूजू तो खुदा ही की तरफ है
5يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۖ وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ الْغَرُورُ
लोगों खुदा का (क़यामत का) वायदा यक़ीनी बिल्कुल सच्चा है तो (कहीं) तुम्हें दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी फ़रेब में न लाए (ऐसा न हो कि शैतान) तुम्हें खुदा के बारे में धोखा दे
फातिरकुरान सूची
45आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — फातिर 3

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Monday, September 28, 2026

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