फातिर · 7/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
الَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۖ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ كَبِيرٌ ۝٧
Allazeena kafaroo lahum `azaabun shadeed; wallazeena aamanoo wa `amilus saalihaati lahum maghfiratunw wa ajrun kabeer
📖 हिंदी अर्थ
जिन लोगों ने (दुनिया में) कुफ्र इख़तेयार किया उनके लिए (आखेरत में) सख्त अज़ाब है और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनके लिए (गुनाहों की) मग़फेरत और निहायत अच्छा बदला (बेहश्त) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الَّذِينَ كَفَرُوا: जिन्होंने अल्लाह की एकता और उसके रसूलों पर ईमान नहीं लाया, और शैतान की پیروی की।
  • عَذَابٌ شَدِيدٌ: बहुत सख्त और दर्दनाक अज़ाब (यातना)।
  • مَغْفِرَةٌ: अल्लाह की ओर से गुनाहों की माफ़ी और उन्हें ढक देना।
  • أَجْرٌ كَبِيرٌ: बहुत बड़ा इनाम, जो जन्नत है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने दो फ़रीक़ों (समूहों) का साफ़-साफ़ फ़ैसला बयान कर दिया है, ताकि हर इंसान अपना रास्ता खुद चुन ले।

पहला फ़रीक़ा उन लोगों का है जिन्होंने कुफ़्र किया—यानी अल्लाह की वहदानियत (एकता) को नकारा, उसके रसूलों को झुठलाया, और शैतान की پیروی को अपनी ज़िंदगी का उसूल बना लिया। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने सख्त से सख्त अज़ाब तैयार किया है, जो क़यामत के दिन उन्हें मिलेगा। यह अज़ाब सिर्फ़ एक पल का नहीं, बल्कि हमेशा रहने वाला है, और उसकी सख्ती का अंदाज़ा हमारे दिमाग़ से बाहर है।

दूसरा फ़रीक़ा उन लोगों का है जो ईमान लाए—यानी अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर दिल से यक़ीन किया, और फिर उस ईमान के तक़ाज़े के मुताबिक़ अच्छे काम किए। उन्होंने नमाज़ पढ़ी, रोज़ा रखा, ज़कात दी, लोगों की मदद की, और अल्लाह की रज़ा के लिए नेकियाँ कीं। ऐसे लोगों के लिए दो चीज़ें हैं:

  1. मग़फिरत: अल्लाह उनके गुनाहों को माफ़ कर देगा और उन्हें ढक देगा, यानी उनकी बुराइयाँ क़यामत के दिन ज़ाहिर नहीं होंगी। यह अल्लाह का बहुत बड़ा फज़ल है, क्योंकि इंसान से गुनाह होते ही रहते हैं, लेकिन अल्लाह की रहमत उन्हें मिटा देती है।
  2. अज्र-ए-कबीर (बड़ा इनाम): यह इनाम जन्नत है, जो हर नेकी का सबसे बेहतरीन बदला है। जन्नत में वो चीज़ें हैं जो किसी आँख ने नहीं देखीं, किसी कान ने नहीं सुनीं, और किसी दिल ने नहीं सोची।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें साफ़ पैग़ाम देती है कि आज का फ़ैसला हमारे हाथ में है। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी, समझ दी, और रसूल भेजे, ताकि हम सही रास्ता चुन सकें। कुफ़्र का रास्ता तबाही की तरफ़ ले जाता है, जबकि ईमान और नेक अमल का रास्ता उस खुशी की तरफ़ ले जाता है जो कभी ख़त्म नहीं होती।

अल्लाह की रहमत इतनी वसी (विस्तृत) है कि वो हर गुनाह माफ़ कर सकता है, बशर्ते हम सच्चे दिल से तौबा करें और अपने अमल को सुधारें। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को ईमान और नेकियों से भर दें, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से हों जिनके लिए मग़फिरत और बड़ा इनाम है। याद रखिए, यह दुनिया कुछ दिनों की है, लेकिन आख़िरत हमेशा रहने वाली है। समझदार वही है जो इस फ़ानी दुनिया में आख़िरत की तैयारी कर ले। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 5-9 — फातिर

5يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۖ وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ الْغَرُورُ
लोगों खुदा का (क़यामत का) वायदा यक़ीनी बिल्कुल सच्चा है तो (कहीं) तुम्हें दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी फ़रेब में न लाए (ऐसा न हो कि शैतान) तुम्हें खुदा के बारे में धोखा दे
6إِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمْ عَدُوٌّ فَاتَّخِذُوهُ عَدُوًّا ۚ إِنَّمَا يَدْعُو حِزْبَهُ لِيَكُونُوا مِنْ أَصْحَابِ السَّعِيرِ
बेशक शैतान तुम्हारा दुश्मन है तो तुम भी उसे अपना दुशमन बनाए रहो वह तो अपने गिरोह को बस इसलिए बुलाता है कि वह लोग (सब के सब) जहन्नुमी बन जाएँ
7الَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۖ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ كَبِيرٌ
जिन लोगों ने (दुनिया में) कुफ्र इख़तेयार किया उनके लिए (आखेरत में) सख्त अज़ाब है और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनके लिए (गुनाहों की) मग़फेरत और निहायत अच्छा बदला (बेहश्त) है
8أَفَمَن زُيِّنَ لَهُ سُوءُ عَمَلِهِ فَرَآهُ حَسَنًا ۖ فَإِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۖ فَلَا تَذْهَبْ نَفْسُكَ عَلَيْهِمْ حَسَرَاتٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِمَا يَصْنَعُونَ
तो भला वह शख्स जिसे उस का बुरा काम शैतानी (अग़वॉ से) अच्छा कर दिखाया गया है औ वह उसे अच्छा समझने लगा है (कभी मोमिन नेकोकार के बराबर हो सकता है हरगिज़ नहीं) तो यक़ीनी (बात) ये है कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है राहे रास्त पर आने (की तौफ़ीक़) देता है तो (ऐ रसूल कहीं) उन (बदबख्तों) पर अफसोस कर करके तुम्हारे दम न निकल जाए जो कुछ ये लोग करते हैं ख़ुदा उससे खूब वाक़िफ़ है
9وَاللَّهُ الَّذِي أَرْسَلَ الرِّيَاحَ فَتُثِيرُ سَحَابًا فَسُقْنَاهُ إِلَىٰ بَلَدٍ مَّيِّتٍ فَأَحْيَيْنَا بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ كَذَٰلِكَ النُّشُورُ
और ख़ुदा ही वह (क़ादिर व तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो हवाएँ बादलों को उड़ाए-उड़ाए फिरती है फिर हम उस बादल को मुर्दा (उफ़तादा) शहर की तरफ हका देते हैं फिर हम उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके मर जाने के बाद शादाब कर देते हैं यूँ ही (मुर्दों को क़यामत में जी उठना होगा)
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अनुवाद — फातिर 7

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Wednesday, August 19, 2026

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