फातिर · 8/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
أَفَمَن زُيِّنَ لَهُ سُوءُ عَمَلِهِ فَرَآهُ حَسَنًا ۖ فَإِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۖ فَلَا تَذْهَبْ نَفْسُكَ عَلَيْهِمْ حَسَرَاتٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِمَا يَصْنَعُونَ ۝٨
Afaman zuyyina lahoo sooo`u `amalihee fara aahu hasanaa; fa innal laaha yudillu mai yashaaa`u wa yahdee mai yahaaa`u falaa tazhab nafsuka `alaihim hasaraat; innal laaha `aleemun bimaa yasna`oon
📖 हिंदी अर्थ
तो भला वह शख्स जिसे उस का बुरा काम शैतानी (अग़वॉ से) अच्छा कर दिखाया गया है औ वह उसे अच्छा समझने लगा है (कभी मोमिन नेकोकार के बराबर हो सकता है हरगिज़ नहीं) तो यक़ीनी (बात) ये है कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है राहे रास्त पर आने (की तौफ़ीक़) देता है तो (ऐ रसूल कहीं) उन (बदबख्तों) पर अफसोस कर करके तुम्हारे दम न निकल जाए जो कुछ ये लोग करते हैं ख़ुदा उससे खूब वाक़िफ़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • زُيِّنَ لَهُ: उसके लिए सुंदर बना दिया गया / उसे सजा-सजाकर दिखाया गया
  • سُوءُ عَمَلِهِ: उसका बुरा कर्म / उसका गलत कार्य
  • فَرَآهُ حَسَنًا: तो उसने उसे अच्छा देखा / उसे भला समझा
  • حَسَرَاتٍ: अत्यधिक दुख, पछतावा, मलाल
  • يَصْنَعُونَ: वे करते हैं / वे बनाते हैं

विस्तृत तफसीर:

क्या वह व्यक्ति जिसके लिए उसका बुरा कर्म सुंदर बना दिया गया हो और वह उसे अच्छा समझने लगा हो, उस व्यक्ति के समान हो सकता है जिसे अल्लाह ने हिदायत दी हो और वह सत्य को सत्य और असत्य को असत्य पहचानता हो? हरगिज़ नहीं! यह दोनों कभी बराबर नहीं हो सकते।

यहाँ अल्लाह तआला उस स्थिति का वर्णन कर रहे हैं जब शैतान किसी इंसान के बुरे कर्मों को उसकी नज़र में खूबसूरत बना देता है। वह इंसान गुनाह करता है, लेकिन उसे लगता है कि वह अच्छा काम कर रहा है। वह शिर्क, कुफ्र और नाफ़रमानी में डूबा होता है, फिर भी उसे अपने किए पर गर्व होता है। उसका दिल अंधा हो चुका होता है, इसलिए वह सच्चाई को देख नहीं पाता।

अल्लाह तआला फरमाते हैं कि यह अल्लाह ही की इच्छा और उसकी हिकमत से होता है — वह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है हिदायत देता है। यह उसका न्याय और उसकी बुद्धि है। कोई उसके फैसले को टाल नहीं सकता और न ही उसके हुक्म में कोई दखल दे सकता है। यह उसकी सुन्नत (व्यवस्था) है कि जो सत्य को ठुकराए और जिद पर अड़ा रहे, उसे वह उसके हाल पर छोड़ देता है, और जो सच्चाई की तलाश करे, उसे वह सीधा रास्ता दिखा देता है।

इसके बाद अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हैं और फरमाते हैं: "तो तुम अपने आप को इन लोगों पर पछतावे और दुख में मत डालो।" यानी ऐ नबी! इन काफिरों के कुफ्र और इनके हिदायत न पाने पर इतना दुखी मत होओ कि तुम्हारी जान निकल जाए। तुम्हारा काम केवल पहुँचाना है, हिदायत देना तुम्हारे बस में नहीं। यह अल्लाह का काम है।

फिर अल्लाह तआला फरमाते हैं: "बेशक अल्लाह उस सब कुछ को जानता है जो वे करते हैं।" उनके सारे कर्म, उनकी नीयतें, उनके छिपे और खुले सब काम अल्लाह के इल्म में हैं। उनमें से कोई भी चीज़ उससे छिपी नहीं है। वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा — बुराई का बुरा बदला और अच्छाई का अच्छा बदला। यह अल्लाह का न्याय है, और वह कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करता।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। हमें अपने कर्मों की जाँच करते रहना चाहिए कि कहीं हम भी उन लोगों में से तो नहीं जिन्हें शैतान ने धोखा दिया है और हम अपने बुरे कर्मों को अच्छा समझ रहे हैं। हमें अल्लाह से हिदायत की दुआ माँगते रहना चाहिए, क्योंकि हिदायत अल्लाह के हाथ में है। और हमें अपने उन भाइयों पर दया करनी चाहिए जो गुमराही में हैं, उनके लिए दुआ करनी चाहिए और उन्हें सच्चाई की तरफ बुलाना चाहिए, लेकिन उनके कुफ्र पर इतना दुखी नहीं होना चाहिए कि हम अपनी जान ही दे दें। अल्लाह सब कुछ जानता है और वही सबसे अच्छा न्याय करने वाला है।



📜 आयत 6-10 — फातिर

6إِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمْ عَدُوٌّ فَاتَّخِذُوهُ عَدُوًّا ۚ إِنَّمَا يَدْعُو حِزْبَهُ لِيَكُونُوا مِنْ أَصْحَابِ السَّعِيرِ
बेशक शैतान तुम्हारा दुश्मन है तो तुम भी उसे अपना दुशमन बनाए रहो वह तो अपने गिरोह को बस इसलिए बुलाता है कि वह लोग (सब के सब) जहन्नुमी बन जाएँ
7الَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۖ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ كَبِيرٌ
जिन लोगों ने (दुनिया में) कुफ्र इख़तेयार किया उनके लिए (आखेरत में) सख्त अज़ाब है और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनके लिए (गुनाहों की) मग़फेरत और निहायत अच्छा बदला (बेहश्त) है
8أَفَمَن زُيِّنَ لَهُ سُوءُ عَمَلِهِ فَرَآهُ حَسَنًا ۖ فَإِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۖ فَلَا تَذْهَبْ نَفْسُكَ عَلَيْهِمْ حَسَرَاتٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِمَا يَصْنَعُونَ
तो भला वह शख्स जिसे उस का बुरा काम शैतानी (अग़वॉ से) अच्छा कर दिखाया गया है औ वह उसे अच्छा समझने लगा है (कभी मोमिन नेकोकार के बराबर हो सकता है हरगिज़ नहीं) तो यक़ीनी (बात) ये है कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है राहे रास्त पर आने (की तौफ़ीक़) देता है तो (ऐ रसूल कहीं) उन (बदबख्तों) पर अफसोस कर करके तुम्हारे दम न निकल जाए जो कुछ ये लोग करते हैं ख़ुदा उससे खूब वाक़िफ़ है
9وَاللَّهُ الَّذِي أَرْسَلَ الرِّيَاحَ فَتُثِيرُ سَحَابًا فَسُقْنَاهُ إِلَىٰ بَلَدٍ مَّيِّتٍ فَأَحْيَيْنَا بِهِ الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ كَذَٰلِكَ النُّشُورُ
और ख़ुदा ही वह (क़ादिर व तवाना) है जो हवाओं को भेजता है तो हवाएँ बादलों को उड़ाए-उड़ाए फिरती है फिर हम उस बादल को मुर्दा (उफ़तादा) शहर की तरफ हका देते हैं फिर हम उसके ज़रिए से ज़मीन को उसके मर जाने के बाद शादाब कर देते हैं यूँ ही (मुर्दों को क़यामत में जी उठना होगा)
10مَن كَانَ يُرِيدُ الْعِزَّةَ فَلِلَّهِ الْعِزَّةُ جَمِيعًا ۚ إِلَيْهِ يَصْعَدُ الْكَلِمُ الطَّيِّبُ وَالْعَمَلُ الصَّالِحُ يَرْفَعُهُ ۚ وَالَّذِينَ يَمْكُرُونَ السَّيِّئَاتِ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۖ وَمَكْرُ أُولَٰئِكَ هُوَ يَبُورُ
जो शख्स इज्ज़त का ख्वाहाँ हो तो ख़ुदा से माँगे क्योंकि सारी इज्ज़त खुदा ही की है उसकी बारगाह तक अच्छी बातें (बुलन्द होकर) पहुँचतीं हैं और अच्छे काम को वह खुद बुलन्द फरमाता है और जो लोग (तुम्हारे ख़िलाफ) बुरी-बुरी तदबीरें करते रहते हैं उनके लिए क़यामत में सख्त अज़ाब है और (आख़िर) उन लोगों की तदबीर मटियामेट हो जाएगी
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अनुवाद — फातिर 8

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Tuesday, August 18, 2026

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