अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- زُيِّنَ لَهُ: उसके लिए सुंदर बना दिया गया / उसे सजा-सजाकर दिखाया गया
- سُوءُ عَمَلِهِ: उसका बुरा कर्म / उसका गलत कार्य
- فَرَآهُ حَسَنًا: तो उसने उसे अच्छा देखा / उसे भला समझा
- حَسَرَاتٍ: अत्यधिक दुख, पछतावा, मलाल
- يَصْنَعُونَ: वे करते हैं / वे बनाते हैं
विस्तृत तफसीर:
क्या वह व्यक्ति जिसके लिए उसका बुरा कर्म सुंदर बना दिया गया हो और वह उसे अच्छा समझने लगा हो, उस व्यक्ति के समान हो सकता है जिसे अल्लाह ने हिदायत दी हो और वह सत्य को सत्य और असत्य को असत्य पहचानता हो? हरगिज़ नहीं! यह दोनों कभी बराबर नहीं हो सकते।
यहाँ अल्लाह तआला उस स्थिति का वर्णन कर रहे हैं जब शैतान किसी इंसान के बुरे कर्मों को उसकी नज़र में खूबसूरत बना देता है। वह इंसान गुनाह करता है, लेकिन उसे लगता है कि वह अच्छा काम कर रहा है। वह शिर्क, कुफ्र और नाफ़रमानी में डूबा होता है, फिर भी उसे अपने किए पर गर्व होता है। उसका दिल अंधा हो चुका होता है, इसलिए वह सच्चाई को देख नहीं पाता।
अल्लाह तआला फरमाते हैं कि यह अल्लाह ही की इच्छा और उसकी हिकमत से होता है — वह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है हिदायत देता है। यह उसका न्याय और उसकी बुद्धि है। कोई उसके फैसले को टाल नहीं सकता और न ही उसके हुक्म में कोई दखल दे सकता है। यह उसकी सुन्नत (व्यवस्था) है कि जो सत्य को ठुकराए और जिद पर अड़ा रहे, उसे वह उसके हाल पर छोड़ देता है, और जो सच्चाई की तलाश करे, उसे वह सीधा रास्ता दिखा देता है।
इसके बाद अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हैं और फरमाते हैं: "तो तुम अपने आप को इन लोगों पर पछतावे और दुख में मत डालो।" यानी ऐ नबी! इन काफिरों के कुफ्र और इनके हिदायत न पाने पर इतना दुखी मत होओ कि तुम्हारी जान निकल जाए। तुम्हारा काम केवल पहुँचाना है, हिदायत देना तुम्हारे बस में नहीं। यह अल्लाह का काम है।
फिर अल्लाह तआला फरमाते हैं: "बेशक अल्लाह उस सब कुछ को जानता है जो वे करते हैं।" उनके सारे कर्म, उनकी नीयतें, उनके छिपे और खुले सब काम अल्लाह के इल्म में हैं। उनमें से कोई भी चीज़ उससे छिपी नहीं है। वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा — बुराई का बुरा बदला और अच्छाई का अच्छा बदला। यह अल्लाह का न्याय है, और वह कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करता।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। हमें अपने कर्मों की जाँच करते रहना चाहिए कि कहीं हम भी उन लोगों में से तो नहीं जिन्हें शैतान ने धोखा दिया है और हम अपने बुरे कर्मों को अच्छा समझ रहे हैं। हमें अल्लाह से हिदायत की दुआ माँगते रहना चाहिए, क्योंकि हिदायत अल्लाह के हाथ में है। और हमें अपने उन भाइयों पर दया करनी चाहिए जो गुमराही में हैं, उनके लिए दुआ करनी चाहिए और उन्हें सच्चाई की तरफ बुलाना चाहिए, लेकिन उनके कुफ्र पर इतना दुखी नहीं होना चाहिए कि हम अपनी जान ही दे दें। अल्लाह सब कुछ जानता है और वही सबसे अच्छा न्याय करने वाला है।
📜 आयत 6-10 — फातिर
अनुवाद — फातिर 8
सूरा फातिर आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो भला वह शख्स जिसे उस का बुरा काम शैतानी…सूरा आयत 8/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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