फातिर · 6/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
إِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمْ عَدُوٌّ فَاتَّخِذُوهُ عَدُوًّا ۚ إِنَّمَا يَدْعُو حِزْبَهُ لِيَكُونُوا مِنْ أَصْحَابِ السَّعِيرِ ۝٦
Innash shaitaana lakum `aduwwun fattakhizoohu `aduwwaa; innamaa yad`oo hizbahoo liyakoonoo min ashaabis sa`eer
📖 हिंदी अर्थ
बेशक शैतान तुम्हारा दुश्मन है तो तुम भी उसे अपना दुशमन बनाए रहो वह तो अपने गिरोह को बस इसलिए बुलाता है कि वह लोग (सब के सब) जहन्नुमी बन जाएँ

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अदुव्वुन (عدو): शत्रु, दुश्मन
  • फ़त्तख़िज़ूहु (فاتخذوه): उसे शत्रु ही समझो, उससे दुश्मनी रखो
  • हिज़्बहु (حزبه): उसके अनुयायी, उसके साथी, उसकी पार्टी के लोग
  • अस्हाबिस स'ईर (أصحاب السعير): भड़कती हुई आग (नरक) वाले, जहन्नम में जलने वाले

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ लोगों! अल्लाह तआला आपको साफ़-साफ़ ख़बर दे रहा है कि शैतान (इब्लीस) आपका पुराना और पक्का दुश्मन है। यह दुश्मनी कोई आज की नहीं, बल्कि आदम (अलैहिस्सलाम) के ज़माने से चली आ रही है। जब उसने आदम को सजदा करने से इनकार किया और उन्हें धोखा देकर जन्नत से निकलवाया, तभी से उसने आदम की औलाद से दुश्मनी ठान ली है। यह कोई मामूली दुश्मन नहीं, बल्कि ऐसा दुश्मन है जो दिन-रात आपके पास आता है, आपके दिलों में वसवसे डालता है, आपको गुनाह की तरफ़ रास्ता दिखाता है और आपको अल्लाह की राह से भटकाने की कोशिश करता रहता है।

इसलिए अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस तरह शैतान ने आपको अपना दुश्मन बना रखा है, उसी तरह आप भी उसे अपना दुश्मन समझो और उसकी हर बात, हर इशारे और हर बुलावे से बचो। उसकी बातों पर अमल मत करो, उसके कहे हुए रास्ते पर मत चलो। उसकी दुश्मनी का सबूत यह है कि आप उसकी नाफ़रमानी करो और अल्लाह की इताअत (आज्ञा) को अपनाओ।

फिर अल्लाह तआला हमें शैतान की असलियत से आगाह करता है कि शैतान अपने अनुयायियों को किस चीज़ की तरफ़ बुलाता है? वह उन्हें गुमराही, कुफ्र, शिर्क और गुनाह की तरफ़ बुलाता है। वह उन्हें वादे दिखाता है, झूठी उम्मीदें देता है, लेकिन उसका आख़िरी मक़सद यही है कि वह अपने साथियों को जहन्नम की भड़कती हुई आग में ले जाए। वह उन्हें दुनिया में मज़े और आज़ादी का लालच देता है, लेकिन उसकी मंज़िल उन्हें नरक की आग तक पहुँचाना है।

यह बड़ी हैरत की बात है कि इंसान अपने उस दुश्मन की बात मानता है जो उसे जहन्नम की तरफ़ ले जाना चाहता है, और अपने उस रब की बात नहीं मानता जो उसे जन्नत की तरफ़ बुलाता है। अल्लाह तआला हम पर बड़ा मेहरबान है कि उसने हमें अपने दुश्मन से आगाह कर दिया, ताकि हम उसके जाल में न फँसें।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें शैतान से हमेशा सावधान रहना चाहिए। उसकी पहचान यह है कि वह हमें अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल करता है, नमाज़ से दूर करता है, गुनाह की तरफ़ ले जाता है, और हमें बुरे कामों पर उभारता है। जब भी दिल में किसी गुनाह का ख़याल आए, तो समझ लीजिए कि यह शैतान की तरफ़ से है। उस वक़्त अल्लाह से पनाह माँगिए और उसके दुश्मन होने का सबूत दीजिए।

याद रखिए, शैतान की दुश्मनी का सबसे बड़ा इलाज अल्लाह की इताअत है। जो बंदा अल्लाह के करीब रहता है, शैतान उसके पास फटकने की हिम्मत नहीं करता। अल्लाह तआला हम सबको शैतान के शर से महफ़ूज़ रखे और हमें उसके धोखे से बचाए। आमीन।



📜 आयत 4-8 — फातिर

4وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كُذِّبَتْ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
और (ऐ रसूल) अगर ये लोग तुम्हें झुठलाएँ तो (कुढ़ो नहीं) तुमसे पहले बहुतेरे पैग़म्बर (लोगों के हाथों) झुठलाए जा चुके हैं और (आख़िर) कुल उमूर की रूजू तो खुदा ही की तरफ है
5يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۖ وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّهِ الْغَرُورُ
लोगों खुदा का (क़यामत का) वायदा यक़ीनी बिल्कुल सच्चा है तो (कहीं) तुम्हें दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी फ़रेब में न लाए (ऐसा न हो कि शैतान) तुम्हें खुदा के बारे में धोखा दे
6إِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمْ عَدُوٌّ فَاتَّخِذُوهُ عَدُوًّا ۚ إِنَّمَا يَدْعُو حِزْبَهُ لِيَكُونُوا مِنْ أَصْحَابِ السَّعِيرِ
बेशक शैतान तुम्हारा दुश्मन है तो तुम भी उसे अपना दुशमन बनाए रहो वह तो अपने गिरोह को बस इसलिए बुलाता है कि वह लोग (सब के सब) जहन्नुमी बन जाएँ
7الَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۖ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ كَبِيرٌ
जिन लोगों ने (दुनिया में) कुफ्र इख़तेयार किया उनके लिए (आखेरत में) सख्त अज़ाब है और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए उनके लिए (गुनाहों की) मग़फेरत और निहायत अच्छा बदला (बेहश्त) है
8أَفَمَن زُيِّنَ لَهُ سُوءُ عَمَلِهِ فَرَآهُ حَسَنًا ۖ فَإِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۖ فَلَا تَذْهَبْ نَفْسُكَ عَلَيْهِمْ حَسَرَاتٍ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِمَا يَصْنَعُونَ
तो भला वह शख्स जिसे उस का बुरा काम शैतानी (अग़वॉ से) अच्छा कर दिखाया गया है औ वह उसे अच्छा समझने लगा है (कभी मोमिन नेकोकार के बराबर हो सकता है हरगिज़ नहीं) तो यक़ीनी (बात) ये है कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है राहे रास्त पर आने (की तौफ़ीक़) देता है तो (ऐ रसूल कहीं) उन (बदबख्तों) पर अफसोस कर करके तुम्हारे दम न निकल जाए जो कुछ ये लोग करते हैं ख़ुदा उससे खूब वाक़िफ़ है
फातिरकुरान सूची
45आयत
मक्कीRevelation
6आयत

अनुवाद — फातिर 6

सूरा फातिर आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक शैतान तुम्हारा दुश्मन है तो तुम भी उसे अपना…

सूरा आयत 6/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए