यासीन · 22/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
وَمَا لِيَ لَا أَعْبُدُ الَّذِي فَطَرَنِي وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ ۝٢٢
Wa maa liya laaa a`budul lazee fataranee wa ilaihi turja`oon
📖 हिंदी अर्थ
और मुझे क्या (ख़ब्त) हुआ है कि जिसने मुझे पैदा किया है उसकी इबादत न करूँ हालाँकि तुम सब के बस (आख़िर) उसी की तरफ लौटकर जाओगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَطَرَنِي: मुझे पैदा किया, मुझे अस्तित्व में लाया।
  • تُرْجَعُونَ: तुम लौटाए जाओगे, तुम्हें (अपनी ओर) लौटना है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वही नेक इंसान है जो अपनी क़ौम को समझा रहा था। उसने अपनी बात को एक सवाल के अंदाज़ में पेश किया ताकि लोगों के दिलों पर गहरा असर पड़े। उसने कहा: "मुझे क्या हो गया है? कौन सी चीज़ मुझे रोक रही है कि मैं उस मालिक की इबादत न करूं जिसने मुझे पैदा किया है? जिसने मुझे अस्तित्व दिया, मुझे आकार दिया, मुझे ज़िंदगी दी और मुझे तमाम नेअमतों से नवाज़ा।"

यह सवाल दरअसल तर्क और दलील की ज़ुबान है। जब इंसान ये सोचे कि उसे किसने बनाया, किसने पाला, किसने उसे सुनने और देखने की ताकत दी, किसने उसे समझने की अक्ल दी — तो क्या उसके लिए ये ज़रूरी नहीं कि वो उसी का शुक्र अदा करे? और शुक्र अदा करने का सबसे बड़ा तरीका इबादत है।

फिर उसने ये भी कहा: "और तुम सब उसी की तरफ लौटाए जाओगे।" यानी मौत के बाद तुम्हें उठाया जाएगा और तुम अपने रब के सामने हाज़िर होगे। वो दिन आएगा जब हर इंसान से पूछा जाएगा कि उसने अपनी ज़िंदगी कैसे गुज़ारी, अपनी नेअमतों का शुक्र कैसे अदा किया। जो लोग उसकी इबादत से भागे, वो शर्मिंदा होंगे और जो उसकी इबादत में जुटे रहे, वो कामयाब होंगे।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है। हमें खुद से सवाल करना चाहिए: क्या वाकई हमारे लिए ये मुनासिब है कि हम उस रब को भूल जाएं जिसने हमें पैदा किया? क्या हमारी ज़िंदगी का मकसद सिर्फ खाना, पीना और दुनिया के कामों में लगे रहना है? नहीं! हमारा असली मकसद अपने रब की इबादत है। जिसने हमें बनाया, उसी की तरफ हमें लौटना है। ये ईमान वाले की पहचान है कि वो अपने रब को कभी नहीं भूलता, हर हाल में उसका शुक्र अदा करता है और उसी से डरता है।

ये आयत हमें ये भी सिखाती है कि नेक इंसान अपनी क़ौम को भलाई की तरफ बुलाता है और उन्हें अंजाम से डराता है। वो सिर्फ अपनी नजात की फिक्र नहीं करता बल्कि दूसरों को भी राहत की राह दिखाना चाहता है। यही अच्छाई की दावत है — कि हम लोगों को उस रब की इबादत की तरफ बुलाएं जो हमारा खालिक है और जिसकी तरफ हमें लौटना है।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — यासीन

20وَجَاءَ مِنْ أَقْصَى الْمَدِينَةِ رَجُلٌ يَسْعَىٰ قَالَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُوا الْمُرْسَلِينَ
और (इतने में) शहर के उस सिरे से एक शख्स (हबीब नज्जार) दौड़ता हुआ आया और कहने लगा कि ऐ मेरी क़ौम (इन) पैग़म्बरों का कहना मानो
21اتَّبِعُوا مَن لَّا يَسْأَلُكُمْ أَجْرًا وَهُم مُّهْتَدُونَ
ऐसे लोगों का (ज़रूर) कहना मानो जो तुमसे (तबलीख़े रिसालत की) कुछ मज़दूरी नहीं माँगते और वह लोग हिदायत याफ्ता भी हैं
22وَمَا لِيَ لَا أَعْبُدُ الَّذِي فَطَرَنِي وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और मुझे क्या (ख़ब्त) हुआ है कि जिसने मुझे पैदा किया है उसकी इबादत न करूँ हालाँकि तुम सब के बस (आख़िर) उसी की तरफ लौटकर जाओगे
23أَأَتَّخِذُ مِن دُونِهِ آلِهَةً إِن يُرِدْنِ الرَّحْمَٰنُ بِضُرٍّ لَّا تُغْنِ عَنِّي شَفَاعَتُهُمْ شَيْئًا وَلَا يُنقِذُونِ
क्या मैं उसे छोड़कर दूसरों को माबूद बना लूँ अगर खुदा मुझे कोई तकलीफ पहुँचाना चाहे तो न उनकी सिफारिश ही मेरे कुछ काम आएगी और न ये लोग मुझे (इस मुसीबत से) छुड़ा ही सकेंगें
24إِنِّي إِذًا لَّفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
(अगर ऐसा करूँ) तो उस वक्त मैं यक़ीनी सरीही गुमराही में हूँ
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अनुवाद — यासीन 22

सूरा यासीन आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मुझे क्या (ख़ब्त) हुआ है कि जिसने मुझे पैदा…

सूरा आयत 22/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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