यासीन · 21/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
اتَّبِعُوا مَن لَّا يَسْأَلُكُمْ أَجْرًا وَهُم مُّهْتَدُونَ ۝٢١
Ittabi`oo mal-laa yas`alukum ajranw-wa hum muhtadoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐसे लोगों का (ज़रूर) कहना मानो जो तुमसे (तबलीख़े रिसालत की) कुछ मज़दूरी नहीं माँगते और वह लोग हिदायत याफ्ता भी हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अज्रन (أجرًا): बदला, पारिश्रमिक, मेहनताना।
  • मुह्तदून (مهتدون): हिदायत पाए हुए, सीधे रास्ते पर चलने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में उस नेक इंसान का ज़िक्र है जो क़ौम के लोगों को नसीहत कर रहा था। वह उनसे कह रहा है: "ऐ मेरी क़ौम! उन लोगों की पैरवी करो जो तुमसे कोई बदला नहीं माँगते।" यानी वे रसूल जो अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाने के बदले तुमसे न कोई माल चाहते हैं, न कोई एहसान माँगते हैं, न ही कोई दुनियावी मंज़िल रखते हैं। उनकी दावत बिल्कुल ख़ालिस और निस्वार्थ है — वे सिर्फ तुम्हारी भलाई चाहते हैं।

फिर फ़रमाया: "और वे खुद हिदायत पर हैं।" यानी वे जिस रास्ते की तरफ बुलाते हैं, खुद उसी पर चल रहे हैं। उनका अमल उनके क़ौल की तस्दीक करता है। वे अंधेरे में टटोलने वाले नहीं, बल्कि रोशनी में चलने वाले हैं। जो इंसान खुद हिदायत पा चुका हो, वही दूसरों को सही रास्ता दिखा सकता है।

इस आयत में एक बड़ी निशानी बताई गई है कि सच्चे दावत देने वाले की पहचान यह है कि वह लोगों से दुनियावी मतलब नहीं रखता। उसका नफा और नुकसान लोगों के साथ जुड़ा नहीं होता। वह सिर्फ अल्लाह की रज़ा चाहता है। ऐसे लोगों की बात मानना और उनका साथ देना अक्लमंदी है, क्योंकि उनमें कोई धोखा या फरेब नहीं होता।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें भी अपनी ज़िंदगी में ऐसे लोगों की पैरवी करनी चाहिए जो खुद सच्चे हों, जिनका दीन और दुनिया में कोई स्वार्थ न हो, और जो हमें अल्लाह की तरफ बुलाएँ। साथ ही यह भी सबक है कि जब हम किसी को अच्छी बात की दावत दें, तो हमें भी निस्वार्थ होकर देना चाहिए — बिना किसी उम्मीद के, सिर्फ अल्लाह की खुशी के लिए। यही सच्चे मुसलमान की पहचान है।



📜 आयत 19-23 — सूरा यासीन

19قَالُوا طَائِرُكُم مَّعَكُمْ ۚ أَئِن ذُكِّرْتُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ مُّسْرِفُونَ
पैग़म्बरों ने कहा कि तुम्हारी बद शुगूनी (तुम्हारी करनी से) तुम्हारे साथ है क्या जब नसीहत की जाती है (तो तुम उसे बदफ़ाली कहते हो नहीं) बल्कि तुम खुद (अपनी) हद से बढ़ गए हो
20وَجَاءَ مِنْ أَقْصَى الْمَدِينَةِ رَجُلٌ يَسْعَىٰ قَالَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُوا الْمُرْسَلِينَ
और (इतने में) शहर के उस सिरे से एक शख्स (हबीब नज्जार) दौड़ता हुआ आया और कहने लगा कि ऐ मेरी क़ौम (इन) पैग़म्बरों का कहना मानो
21اتَّبِعُوا مَن لَّا يَسْأَلُكُمْ أَجْرًا وَهُم مُّهْتَدُونَ
ऐसे लोगों का (ज़रूर) कहना मानो जो तुमसे (तबलीख़े रिसालत की) कुछ मज़दूरी नहीं माँगते और वह लोग हिदायत याफ्ता भी हैं
22وَمَا لِيَ لَا أَعْبُدُ الَّذِي فَطَرَنِي وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और मुझे क्या (ख़ब्त) हुआ है कि जिसने मुझे पैदा किया है उसकी इबादत न करूँ हालाँकि तुम सब के बस (आख़िर) उसी की तरफ लौटकर जाओगे
23أَأَتَّخِذُ مِن دُونِهِ آلِهَةً إِن يُرِدْنِ الرَّحْمَٰنُ بِضُرٍّ لَّا تُغْنِ عَنِّي شَفَاعَتُهُمْ شَيْئًا وَلَا يُنقِذُونِ
क्या मैं उसे छोड़कर दूसरों को माबूद बना लूँ अगर खुदा मुझे कोई तकलीफ पहुँचाना चाहे तो न उनकी सिफारिश ही मेरे कुछ काम आएगी और न ये लोग मुझे (इस मुसीबत से) छुड़ा ही सकेंगें
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीRevelation
21आयत

अनुवाद — यासीन 21

सूरा यासीन आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐसे लोगों का (ज़रूर) कहना मानो जो तुमसे (तबलीख़े रिसालत…

सूरा आयत 21/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, September 8, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए