अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अज्रन (أجرًا): बदला, पारिश्रमिक, मेहनताना।
- मुह्तदून (مهتدون): हिदायत पाए हुए, सीधे रास्ते पर चलने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में उस नेक इंसान का ज़िक्र है जो क़ौम के लोगों को नसीहत कर रहा था। वह उनसे कह रहा है: "ऐ मेरी क़ौम! उन लोगों की पैरवी करो जो तुमसे कोई बदला नहीं माँगते।" यानी वे रसूल जो अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाने के बदले तुमसे न कोई माल चाहते हैं, न कोई एहसान माँगते हैं, न ही कोई दुनियावी मंज़िल रखते हैं। उनकी दावत बिल्कुल ख़ालिस और निस्वार्थ है — वे सिर्फ तुम्हारी भलाई चाहते हैं।
फिर फ़रमाया: "और वे खुद हिदायत पर हैं।" यानी वे जिस रास्ते की तरफ बुलाते हैं, खुद उसी पर चल रहे हैं। उनका अमल उनके क़ौल की तस्दीक करता है। वे अंधेरे में टटोलने वाले नहीं, बल्कि रोशनी में चलने वाले हैं। जो इंसान खुद हिदायत पा चुका हो, वही दूसरों को सही रास्ता दिखा सकता है।
इस आयत में एक बड़ी निशानी बताई गई है कि सच्चे दावत देने वाले की पहचान यह है कि वह लोगों से दुनियावी मतलब नहीं रखता। उसका नफा और नुकसान लोगों के साथ जुड़ा नहीं होता। वह सिर्फ अल्लाह की रज़ा चाहता है। ऐसे लोगों की बात मानना और उनका साथ देना अक्लमंदी है, क्योंकि उनमें कोई धोखा या फरेब नहीं होता।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें भी अपनी ज़िंदगी में ऐसे लोगों की पैरवी करनी चाहिए जो खुद सच्चे हों, जिनका दीन और दुनिया में कोई स्वार्थ न हो, और जो हमें अल्लाह की तरफ बुलाएँ। साथ ही यह भी सबक है कि जब हम किसी को अच्छी बात की दावत दें, तो हमें भी निस्वार्थ होकर देना चाहिए — बिना किसी उम्मीद के, सिर्फ अल्लाह की खुशी के लिए। यही सच्चे मुसलमान की पहचान है।
📜 आयत 19-23 — यासीन
अनुवाद — यासीन 21
सूरा यासीन आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐसे लोगों का (ज़रूर) कहना मानो जो तुमसे (तबलीख़े रिसालत…सूरा आयत 21/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 19–23. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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