यासीन · 23/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
أَأَتَّخِذُ مِن دُونِهِ آلِهَةً إِن يُرِدْنِ الرَّحْمَٰنُ بِضُرٍّ لَّا تُغْنِ عَنِّي شَفَاعَتُهُمْ شَيْئًا وَلَا يُنقِذُونِ ۝٢٣
A-attakhizu min dooniheee aalihatan iny-yuridnir Rahmaanu bidurril-laa tughni `annee shafaa `atuhum shai `anw-wa laa yunqizoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या मैं उसे छोड़कर दूसरों को माबूद बना लूँ अगर खुदा मुझे कोई तकलीफ पहुँचाना चाहे तो न उनकी सिफारिश ही मेरे कुछ काम आएगी और न ये लोग मुझे (इस मुसीबत से) छुड़ा ही सकेंगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَتَّخِذُ: मैं अपनाऊँ / बनाऊँ
  • آلِهَةً: पूज्य देवता (बहुवचन)
  • يُرِدْنِ: मुझे पहुँचाना चाहे
  • بِضُرٍّ: किसी कष्ट या हानि से
  • تُغْنِي: कुछ काम आना / दूर करना
  • شَفَاعَتُهُمْ: उनकी सिफ़ारिश
  • يُنقِذُونِ: मुझे बचा सकें

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत उस सच्चे मोमिन की ज़ुबानी है जो अपनी क़ौम को सीधे रास्ते पर लाने के लिए निहायत मुहब्बत और हिकमत के साथ पेश आ रहा था। वह कहता है: क्या मैं अल्लाह को छोड़कर ऐसे देवताओं को अपना लूँ जो न मुझे फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न नुक़्सान से बचा सकते हैं? यह तो सरासर बेवक़ूफ़ी और गुमराही है। अगर रहमान (अल्लाह) मुझ पर कोई मुसीबत या तकलीफ़ डालना चाहे, तो ये तथाकथित देवता न तो अपनी सिफ़ारिश से उसे टाल सकते हैं, न ही मुझे उससे बचा सकते हैं। वे तो ख़ुद मजबूर हैं, उनके पास किसी का भला-बुरा करने की कोई ताक़त ही नहीं।

यह बात दिल को छू लेने वाली है — यह आदमी अपनी आँखों से सच्चाई देख रहा है और अपनी क़ौम को उसी सच्चाई की तरफ़ बुला रहा है। वह कहता है: मैंने अपने रब पर ईमान लाया है, तुम भी मेरी बात सुनो और मेरी पैरवी करो, ताकि तुम भी उसी सच्चे रास्ते पर चल सको जो कामयाबी की तरफ़ ले जाता है। उसका अंदाज़-ए-बयान बड़ा प्यारा है — वह डाँटता नहीं, बल्कि मुहब्बत से समझाता है। वह कहता है कि अगर मैं इन झूठे देवताओं को पूजूँ, तो मैं साफ़ गुमराही में हूँ, क्योंकि ये न मुझे फ़ायदा पहुँचा सकते हैं, न नुक़्सान से बचा सकते हैं। फिर ऐसी चीज़ की पूजा करना कैसी अक़्लमंदी है?

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान वही है जो अल्लाह पर पूरा भरोसा रखे और उसी से मदद माँगे। जो इंसान अल्लाह को छोड़कर दूसरों पर भरोसा करता है, वह उस मुसाफ़िर की तरह है जो टूटी हुई नाव पर सवार होकर समंदर पार करना चाहे — यह सिर्फ़ धोखा है। अल्लाह ही वह है जो रहमत करने वाला है, और उसी की रहमत से हमें डरना भी चाहिए और उम्मीद भी रखनी चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है, और यही वह सच्चाई है जिसे क़ुरआन ने हमारे सामने रखा है ताकि हम अक़्ल से काम लें और सीधे रास्ते पर चलें।

याद रखिए — जो लोग अल्लाह के रास्ते पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी। यह मोमिन जन्नत में दाख़िल हुआ और अल्लाह की रहमत से उसे हमेशा की ख़ुशी मिली। यही है सच्चे ईमान का फल — जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है।



📜 आयत 21-25 — यासीन

21اتَّبِعُوا مَن لَّا يَسْأَلُكُمْ أَجْرًا وَهُم مُّهْتَدُونَ
ऐसे लोगों का (ज़रूर) कहना मानो जो तुमसे (तबलीख़े रिसालत की) कुछ मज़दूरी नहीं माँगते और वह लोग हिदायत याफ्ता भी हैं
22وَمَا لِيَ لَا أَعْبُدُ الَّذِي فَطَرَنِي وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और मुझे क्या (ख़ब्त) हुआ है कि जिसने मुझे पैदा किया है उसकी इबादत न करूँ हालाँकि तुम सब के बस (आख़िर) उसी की तरफ लौटकर जाओगे
23أَأَتَّخِذُ مِن دُونِهِ آلِهَةً إِن يُرِدْنِ الرَّحْمَٰنُ بِضُرٍّ لَّا تُغْنِ عَنِّي شَفَاعَتُهُمْ شَيْئًا وَلَا يُنقِذُونِ
क्या मैं उसे छोड़कर दूसरों को माबूद बना लूँ अगर खुदा मुझे कोई तकलीफ पहुँचाना चाहे तो न उनकी सिफारिश ही मेरे कुछ काम आएगी और न ये लोग मुझे (इस मुसीबत से) छुड़ा ही सकेंगें
24إِنِّي إِذًا لَّفِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
(अगर ऐसा करूँ) तो उस वक्त मैं यक़ीनी सरीही गुमराही में हूँ
25إِنِّي آمَنتُ بِرَبِّكُمْ فَاسْمَعُونِ
मैं तो तुम्हारे परवरदिगार पर ईमान ला चुका हूँ मेरी बात सुनो और मानो; मगर उन लोगों ने उसे संगसार कर डाला
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अनुवाद — यासीन 23

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सूरा आयत 23/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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