अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَتَّخِذُ: मैं अपनाऊँ / बनाऊँ
- آلِهَةً: पूज्य देवता (बहुवचन)
- يُرِدْنِ: मुझे पहुँचाना चाहे
- بِضُرٍّ: किसी कष्ट या हानि से
- تُغْنِي: कुछ काम आना / दूर करना
- شَفَاعَتُهُمْ: उनकी सिफ़ारिश
- يُنقِذُونِ: मुझे बचा सकें
विस्तृत तफ़सीर:
यह आयत उस सच्चे मोमिन की ज़ुबानी है जो अपनी क़ौम को सीधे रास्ते पर लाने के लिए निहायत मुहब्बत और हिकमत के साथ पेश आ रहा था। वह कहता है: क्या मैं अल्लाह को छोड़कर ऐसे देवताओं को अपना लूँ जो न मुझे फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न नुक़्सान से बचा सकते हैं? यह तो सरासर बेवक़ूफ़ी और गुमराही है। अगर रहमान (अल्लाह) मुझ पर कोई मुसीबत या तकलीफ़ डालना चाहे, तो ये तथाकथित देवता न तो अपनी सिफ़ारिश से उसे टाल सकते हैं, न ही मुझे उससे बचा सकते हैं। वे तो ख़ुद मजबूर हैं, उनके पास किसी का भला-बुरा करने की कोई ताक़त ही नहीं।
यह बात दिल को छू लेने वाली है — यह आदमी अपनी आँखों से सच्चाई देख रहा है और अपनी क़ौम को उसी सच्चाई की तरफ़ बुला रहा है। वह कहता है: मैंने अपने रब पर ईमान लाया है, तुम भी मेरी बात सुनो और मेरी पैरवी करो, ताकि तुम भी उसी सच्चे रास्ते पर चल सको जो कामयाबी की तरफ़ ले जाता है। उसका अंदाज़-ए-बयान बड़ा प्यारा है — वह डाँटता नहीं, बल्कि मुहब्बत से समझाता है। वह कहता है कि अगर मैं इन झूठे देवताओं को पूजूँ, तो मैं साफ़ गुमराही में हूँ, क्योंकि ये न मुझे फ़ायदा पहुँचा सकते हैं, न नुक़्सान से बचा सकते हैं। फिर ऐसी चीज़ की पूजा करना कैसी अक़्लमंदी है?
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान वही है जो अल्लाह पर पूरा भरोसा रखे और उसी से मदद माँगे। जो इंसान अल्लाह को छोड़कर दूसरों पर भरोसा करता है, वह उस मुसाफ़िर की तरह है जो टूटी हुई नाव पर सवार होकर समंदर पार करना चाहे — यह सिर्फ़ धोखा है। अल्लाह ही वह है जो रहमत करने वाला है, और उसी की रहमत से हमें डरना भी चाहिए और उम्मीद भी रखनी चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है, और यही वह सच्चाई है जिसे क़ुरआन ने हमारे सामने रखा है ताकि हम अक़्ल से काम लें और सीधे रास्ते पर चलें।
याद रखिए — जो लोग अल्लाह के रास्ते पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी। यह मोमिन जन्नत में दाख़िल हुआ और अल्लाह की रहमत से उसे हमेशा की ख़ुशी मिली। यही है सच्चे ईमान का फल — जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है।
📜 आयत 21-25 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 23
सूरा यासीन आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या मैं उसे छोड़कर दूसरों को माबूद बना लूँ अगर…सूरा आयत 23/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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