यासीन · 58/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
سَلَامٌ قَوْلًا مِّن رَّبٍّ رَّحِيمٍ ۝٥٨
Salaamun qawlam mir Rabbir Raheem
📖 हिंदी अर्थ
मेहरबान परवरदिगार की तरफ से सलाम का पैग़ाम आएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَلَامٌ - सलामती, शांति, और हर बुराई से सुरक्षा।
  • قَوْلًا - यह कहना (अर्थात यह सम्मान बिना किसी माध्यम के सीधे कहा जाएगा)।
  • مِن رَّبٍّ رَّحِيمٍ - उस रब की ओर से जो अपने बंदों पर अत्यंत दयालु और मेहरबान है।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान और अद्भुत इनाम का वर्णन कर रही है जो जन्नत के निवासियों को उनके सारे नेमतों के बाद मिलेगा। जब वे जन्नत की हर नेमत, हर सुख-सुविधा और हर तरह की खुशियों में डूबे होंगे, तो उससे भी बड़ी और अनमोल चीज़ उन्हें मिलेगी—वह है उनके रब की ओर से सीधा सलाम। यह सलाम कोई फ़रिश्ते के ज़रिए नहीं, बल्कि खुद अल्लाह रहमान-ओ-रहीम की तरफ से होगा, जो उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और इज़्ज़त है।

यह सलाम सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि इसका मतलब है कि अल्लाह उन्हें हर तरह की बुराई, हर तरह के डर, हर तरह के ग़म और हर तरह की कमी से पूरी तरह सुरक्षित कर देगा। जिसे रब खुद सलाम कहे, उसके लिए फिर कोई चिंता नहीं रहती। यह वह लम्हा होगा जब जन्नती अपने रब की रहमत और मुहब्बत को सबसे क़रीब से महसूस करेंगे, और उनके चेहरों पर खुशी और इत्मीनान की नूरानियत छा जाएगी।

इस आयत में अल्लाह ने अपने लिए "रब्बुन रहीम" (दयालु रब) का नाम चुना है, ताकि बंदों को यक़ीन हो कि यह सलाम सिर्फ़ इंसाफ़ की बिना पर नहीं, बल्कि उसकी असीम रहमत और मेहरबानी की बिना पर है। यह उनके लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है कि उनका रब उनसे राज़ी है और उन्हें अपने करीब बुला रहा है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके हुक्म मानते हैं और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाते हैं, उनके लिए यही सलाम उनकी सारी मेहनत का सिला होगा। यह सलाम उन्हें हमेशा-हमेशा के लिए खुशियों और सुकून से भर देगा।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की रहमत के हक़दार बनने की कोशिश करें। उसके हुक्मों पर अमल करें, उसके रास्ते पर चलें, और उससे यही दुआ करें कि हमें भी उस दिन उसके सलाम का मुस्तहिक़ बनाए। यही सबसे बड़ी कामयाबी है, और यही वह चीज़ है जो हमें दुनिया की हर मुश्किल और हर आज़माइश में सब्र और हिम्मत दे सकती है।



📜 आयत 56-60 — यासीन

56هُمْ وَأَزْوَاجُهُمْ فِي ظِلَالٍ عَلَى الْأَرَائِكِ مُتَّكِئُونَ
वह अपनी बीवियों के साथ (ठन्डी) छाँव में तकिया लगाए तख्तों पर (चैन से) बैठे हुए हैं
57لَهُمْ فِيهَا فَاكِهَةٌ وَلَهُم مَّا يَدَّعُونَ
बेिहश्त में उनके लिए (ताज़ा) मेवे (तैयार) हैं और जो वह चाहें उनके लिए (हाज़िर) है
58سَلَامٌ قَوْلًا مِّن رَّبٍّ رَّحِيمٍ
मेहरबान परवरदिगार की तरफ से सलाम का पैग़ाम आएगा
59وَامْتَازُوا الْيَوْمَ أَيُّهَا الْمُجْرِمُونَ
और (एक आवाज़ आएगी कि) ऐ गुनाहगारों तुम लोग (इनसे) अलग हो जाओ
60۞ أَلَمْ أَعْهَدْ إِلَيْكُمْ يَا بَنِي آدَمَ أَن لَّا تَعْبُدُوا الشَّيْطَانَ ۖ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
ऐ आदम की औलाद क्या मैंने तुम्हारे पास ये हुक्म नहीं भेजा था कि (ख़बरदार) शैतान की परसतिश न करना वह यक़ीनी तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है
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अनुवाद — यासीन 58

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सूरा आयत 58/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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