यासीन · 57/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
لَهُمْ فِيهَا فَاكِهَةٌ وَلَهُم مَّا يَدَّعُونَ ۝٥٧
Lahum feehaa faakiha tunw-wa lahum maa yadda`oon
📖 हिंदी अर्थ
बेिहश्त में उनके लिए (ताज़ा) मेवे (तैयार) हैं और जो वह चाहें उनके लिए (हाज़िर) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاكِهَةٌ: मीठे फल, जैसे अंगूर, अंजीर, अनार आदि।
  • مَا يَدَّعُونَ: जो कुछ वे चाहेंगे या इच्छा करेंगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में जन्नत के उस अनमोल इनाम का वर्णन कर रहे हैं जो उनके नेक बंदों के लिए तैयार किया गया है। जन्नत में उनके लिए हर प्रकार के स्वादिष्ट और उत्तम फल होंगे – अंगूर, अंजीर, अनार और ऐसे और भी फल जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। ये फल न केवल खाने में लज़ीज़ होंगे बल्कि उनकी खुशबू, रंग और स्वाद भी इस दुनिया के फलों से कहीं बेहतर होंगे।

इसके अलावा, अल्लाह तआला का फ़ज़ल यह है कि जन्नत में मोमिनीन को वह सब कुछ मिलेगा जो वे चाहेंगे। जिस चीज़ की भी वे इच्छा करेंगे, वह तुरंत उनके सामने हाज़िर होगी। कोई रुकावट नहीं, कोई देरी नहीं – बस जो दिल चाहे, वही मिल जाए। यह अल्लाह की उस करीमी का इज़हार है कि वह अपने बंदों को उनकी पूरी ख्वाहिशों से भी बढ़कर अता करता है।

यह आयत हमें याद दिलाती है कि जन्नत की नेअमतें सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वहाँ हर तरह की खुशी, सुकून और इत्मिनान होगा। जो लोग दुनिया में अल्लाह के हुक्मों पर चले और उसकी राह में सब्र किया, उनके लिए यही अनमोल इनाम है।

आओ, हम सब इस आयत पर ग़ौर करें और अपने अमल को सुधारें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हो सकें जिनके लिए यह खुशखबरी है। अल्लाह तआला हम सबको जन्नत की नेअमतें हासिल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 55-59 — यासीन

55إِنَّ أَصْحَابَ الْجَنَّةِ الْيَوْمَ فِي شُغُلٍ فَاكِهُونَ
बेहश्त के रहने वाले आज (रोजे क़यामत) एक न एक मशग़ले में जी बहला रहे हैं
56هُمْ وَأَزْوَاجُهُمْ فِي ظِلَالٍ عَلَى الْأَرَائِكِ مُتَّكِئُونَ
वह अपनी बीवियों के साथ (ठन्डी) छाँव में तकिया लगाए तख्तों पर (चैन से) बैठे हुए हैं
57لَهُمْ فِيهَا فَاكِهَةٌ وَلَهُم مَّا يَدَّعُونَ
बेिहश्त में उनके लिए (ताज़ा) मेवे (तैयार) हैं और जो वह चाहें उनके लिए (हाज़िर) है
58سَلَامٌ قَوْلًا مِّن رَّبٍّ رَّحِيمٍ
मेहरबान परवरदिगार की तरफ से सलाम का पैग़ाम आएगा
59وَامْتَازُوا الْيَوْمَ أَيُّهَا الْمُجْرِمُونَ
और (एक आवाज़ आएगी कि) ऐ गुनाहगारों तुम लोग (इनसे) अलग हो जाओ
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अनुवाद — यासीन 57

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Tuesday, August 18, 2026

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