अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَلَامٌ – शांति, सलामती और रहमत
- عَلَىٰ – पर
- إِلْ يَاسِينَ – इसका अर्थ है 'इलियास' (अलैहिस्सलाम), और कुछ मुफ़स्सिरीन के अनुसार यह 'आल-ए-यासीन' (इलियास की संतान और उनके अनुयायी) भी हो सकता है।
तफ़सीर:
यह आयत पैग़म्बर इलियास (अलैहिस्सलाम) के सम्मान में एक दिव्य घोषणा है। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि इलियास (अलैहिस्सलाम) पर सलामती और रहमत हो। यह सलाम केवल एक साधारण अभिवादन नहीं है, बल्कि यह स्वयं अल्लाह की ओर से उनके प्रिय नबी पर विशेष कृपा और सम्मान है।
इलियास (अलैहिस्सलाम) उन महान पैग़म्बरों में से थे जिन्होंने अपनी क़ौम को एकेश्वरवाद (तौहीद) की ओर बुलाया और उन्हें मूर्तिपूजा से रोका। उन्होंने अल्लाह के आदेशों का पालन करते हुए सब्र और स्थिरता का परिचय दिया। अल्लाह ने उनके इसी समर्पण और ईमान के कारण उन्हें यह अमर सम्मान दिया कि उनका ज़िक्र क़यामत तक के लिए सुरक्षित कर दिया।
यहाँ "إِلْ يَاسِينَ" का उल्लेख इस बात की ओर संकेत करता है कि यह सलाम केवल इलियास (अलैहिस्सलाम) तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके अनुयायियों और उनके मार्ग पर चलने वालों के लिए भी है। यह एक सामूहिक दुआ और सम्मान है जो उन सभी को शामिल करता है जो उनके पदचिह्नों पर चलते हैं।
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी भूलता नहीं है। जो लोग उसकी राह में कष्ट सहते हैं और उसके दीन की सेवा करते हैं, अल्लाह उनके नाम को अमर कर देता है और उनके लिए ऐसी यादगार छोड़ता है जो सदियों तक ज़िंदा रहती है। यह हर उस मोमिन के लिए प्रेरणा है जो अल्लाह की राह में काम करता है — उसका परिश्रम कभी बेकार नहीं जाता।
आज भी जब हम यह आयत पढ़ते हैं, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि अल्लाह की रहमत और सलाम उन्हीं को मिलती है जो ईमान, सब्र और अच्छे कर्मों के साथ जीवन जीते हैं। हमें भी इलियास (अलैहिस्सलाम) के मार्ग पर चलने की कोशिश करनी चाहिए — अल्लाह की इबादत, सच्चाई और नेकी का प्रसार — ताकि हम भी उस दिव्य सलाम के हक़दार बन सकें।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह अपने नबियों का सम्मान करता है और उनके ज़िक्र को पवित्र रखता है। हमें भी अल्लाह के पैग़म्बरों से मुहब्बत करनी चाहिए और उनके बताए रास्ते पर चलना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 128-132 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 130
सूरा अस-साफ्फात आयत 130 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि (हर तरफ से) आले यासीन पर सलाम (ही सलाम)…सूरा आयत 130/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 128–132. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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