अस-साफ्फात · 129/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ ۝١٢٩
Wa taraknaa `alaihi fil aakhireen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनका ज़िक्र ख़ैर बाद को आने वालों में बाक़ी रखा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَتَرَكْنَا: हमने छोड़ा / स्थापित किया
  • عَلَيْهِ: उन (इलियास अलैहिस्सलाम) के लिए
  • فِي الْآخِرِينَ: पिछली उम्मतों में / बाद की पीढ़ियों में

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी इलियास अलैहिस्सलाम का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हमने उनके लिए बाद की उम्मतों में एक अच्छी यादगार, सच्ची प्रशंसा और पाकीज़ा नाम छोड़ा। यानी जब भी लोगों की ज़ुबान पर उनका ज़िक्र आता है, तो वह सम्मान और महिमा के साथ आता है। यह अल्लाह की ओर से उन्हें दी गई एक विशेष इज़्ज़त है कि उनका नाम क़यामत तक के लिए अच्छाई और नेकी के साथ जुड़ा रहेगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने नेक और मुख़लिस बंदों को दुनिया में भी अच्छी शोहरत और पाकीज़ा यादगार अता करता है। जो लोग अल्लाह की इबादत में अपनी जान लगा देते हैं, अल्लाह उनके नाम को भी ज़िंदा रखता है और उनके किरदार को लोगों के दिलों में महबूब बना देता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि सच्ची कामयाबी सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा और उसकी राह में नेकी करने में है। जो इंसान दुनिया में अल्लाह के लिए जिए, अल्लाह उसकी याद को क़यामत तक ज़िंदा रखता है। यह एक ऐसा इनाम है जो दौलत और औलाद से कहीं बेहतर है — कि आपका ज़िक्र अच्छाई के साथ हो, और लोग आपको रहमत और बरकत की दुआओं के साथ याद करें।

अल्लाह तआला हम सबको अपने नेक बंदों की तरह जीने की तौफ़ीक़ दे, और हमारे नामों को भी अच्छाई और नेकी के साथ जोड़े। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 127-131 — अस-साफ्फात

127فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ
तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन (जहन्नुम) में गिरफ्तार किए जाएँगे
128إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर खुदा के निरे खरे बन्दे महफूज़ रहेंगे
129وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और हमने उनका ज़िक्र ख़ैर बाद को आने वालों में बाक़ी रखा
130سَلَامٌ عَلَىٰ إِلْ يَاسِينَ
कि (हर तरफ से) आले यासीन पर सलाम (ही सलाम) है
131إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम यक़ीनन नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
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अनुवाद — अस-साफ्फात 129

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Tuesday, August 18, 2026

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