अस-साफ्फात · 73/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ ۝٧٣
Fanzur kaifa kaana `aaqibatul munzareen
📖 हिंदी अर्थ
ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَانظُرْ – देखो, ध्यान से विचार करो
  • عَاقِبَةُ – अंजाम, परिणाम, अंतिम दशा
  • الْمُنذَرِينَ – वे लोग जिन्हें डराया गया (चेतावनी दी गई), अर्थात वे समुदाय जिनके पास पैगंबर चेतावनी लेकर आए

तफसीर:

अल्लाह तआला इस आयत में नबी करीम ﷺ को और उनके माध्यम से सभी लोगों को खुली पुकार कर रहे हैं कि ज़रा उन क़ौमों के अंजाम पर नज़र डालो जिन्हें चेतावनी दी गई थी। यानी वे समुदाय जिनके पास अल्लाह के रसूल आए, उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, सीधे रास्ते की दावत दी, लेकिन उन्होंने सुनने से इनकार किया, अपने पैगंबरों को झुठलाया और अपनी सरकशी पर अड़े रहे।

जब अल्लाह तआला कहता है "देखो", तो यह सिर्फ आँखों से देखने का आदेश नहीं है, बल्कि दिल की आँखों से, अक्ल की निगाह से ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने की तरग़ीब है। तारीख़ के वरक़ पलटिए, पुराने खंडहरों पर नज़र डालिए — नूह की क़ौम, आद, समूद, फ़िरऔन और उसके लश्कर — इन सबका क्या अंजाम हुआ? जिन्हें चेतावनी दी गई और उन्होंने नहीं मानी, उनका अंजाम यही था कि अल्लाह का अज़ाब आया, वे तबाह हो गए, और आज उनके नाम सिर्फ़ इबरत की निशानी बनकर रह गए हैं।

यह अंजाम कितना भयानक और हौलनाक था — कुछ क़ौमें ज़मीन में धँसा दी गईं, कुछ पर पत्थरों की बारिश हुई, कुछ को आँधी ने उड़ा दिया, कुछ को पानी में डुबो दिया गया। यह सब कुछ इसलिए कि उन्होंने चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया और अपने नबियों की नसीहत को ठुकरा दिया।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला हमें बताना चाहते हैं कि यह दुनिया किसी के लिए भी हमेशा नहीं रहने वाली। जो लोग अल्लाह के हुक्म से सरताबी करते हैं, वे देर-सबेर अपने किए की सज़ा पाकर रहते हैं। लेकिन साथ ही यह भी संदेश है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है — जो चेतावनी सुनकर सुधर जाए, तौबा कर ले, वह कामयाब है।

प्यारे भाइयो और बहनो! हमें इस आयत से सबक लेना चाहिए कि अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ने वालों का अंजाम बुरा होता है, और अल्लाह की बताई हुई राह पर चलने वालों के लिए जन्नत की खुशखबरी है। आज हमारे पास कुरआन और सुन्नत की शक्ल में रहनुमाई मौजूद है — हमें उस पर अमल करना चाहिए ताकि हम उन बुरे अंजामों से बचे रहें जो पिछली क़ौमों पर आए। अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 71-75 — अस-साफ्फात

71وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ الْأَوَّلِينَ
और उनके क़ब्ल अगलों में से बहुतेरे गुमराह हो चुके
72وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ
उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था
73فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ
ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ
74إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)
75وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ
और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीRevelation
73आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 73

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सूरा आयत 73/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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