Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَانظُرْ – देखो, ध्यान से विचार करो
- عَاقِبَةُ – अंजाम, परिणाम, अंतिम दशा
- الْمُنذَرِينَ – वे लोग जिन्हें डराया गया (चेतावनी दी गई), अर्थात वे समुदाय जिनके पास पैगंबर चेतावनी लेकर आए
तफसीर:
अल्लाह तआला इस आयत में नबी करीम ﷺ को और उनके माध्यम से सभी लोगों को खुली पुकार कर रहे हैं कि ज़रा उन क़ौमों के अंजाम पर नज़र डालो जिन्हें चेतावनी दी गई थी। यानी वे समुदाय जिनके पास अल्लाह के रसूल आए, उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, सीधे रास्ते की दावत दी, लेकिन उन्होंने सुनने से इनकार किया, अपने पैगंबरों को झुठलाया और अपनी सरकशी पर अड़े रहे।
जब अल्लाह तआला कहता है "देखो", तो यह सिर्फ आँखों से देखने का आदेश नहीं है, बल्कि दिल की आँखों से, अक्ल की निगाह से ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने की तरग़ीब है। तारीख़ के वरक़ पलटिए, पुराने खंडहरों पर नज़र डालिए — नूह की क़ौम, आद, समूद, फ़िरऔन और उसके लश्कर — इन सबका क्या अंजाम हुआ? जिन्हें चेतावनी दी गई और उन्होंने नहीं मानी, उनका अंजाम यही था कि अल्लाह का अज़ाब आया, वे तबाह हो गए, और आज उनके नाम सिर्फ़ इबरत की निशानी बनकर रह गए हैं।
यह अंजाम कितना भयानक और हौलनाक था — कुछ क़ौमें ज़मीन में धँसा दी गईं, कुछ पर पत्थरों की बारिश हुई, कुछ को आँधी ने उड़ा दिया, कुछ को पानी में डुबो दिया गया। यह सब कुछ इसलिए कि उन्होंने चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया और अपने नबियों की नसीहत को ठुकरा दिया।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला हमें बताना चाहते हैं कि यह दुनिया किसी के लिए भी हमेशा नहीं रहने वाली। जो लोग अल्लाह के हुक्म से सरताबी करते हैं, वे देर-सबेर अपने किए की सज़ा पाकर रहते हैं। लेकिन साथ ही यह भी संदेश है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है — जो चेतावनी सुनकर सुधर जाए, तौबा कर ले, वह कामयाब है।
प्यारे भाइयो और बहनो! हमें इस आयत से सबक लेना चाहिए कि अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ने वालों का अंजाम बुरा होता है, और अल्लाह की बताई हुई राह पर चलने वालों के लिए जन्नत की खुशखबरी है। आज हमारे पास कुरआन और सुन्नत की शक्ल में रहनुमाई मौजूद है — हमें उस पर अमल करना चाहिए ताकि हम उन बुरे अंजामों से बचे रहें जो पिछली क़ौमों पर आए। अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 71-75 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 73
सूरा अस-साफ्फात आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे…सूरा आयत 73/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


