Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِلَّا = सिवाय, परन्तु
- عِبَادَ = बंदे, दास
- اللَّهِ = अल्लाह के
- الْمُخْلَصِينَ = जिन्हें अल्लाह ने ख़ालिस (शुद्ध) कर लिया हो, चुने हुए, विशेष रूप से अपनी इबादत के लिए चुन लिए गए
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन क़ौमों पर अज़ाब आया—जैसे नूह की क़ौम, आद, समूद, और दूसरी झुठलाने वाली क़ौमें—उन सब पर तबाही और सज़ा नाज़िल हुई, मगर अल्लाह के वे बंदे जिन्हें अल्लाह ने ख़ुद अपनी इबादत के लिए चुन लिया और उनके दिलों को शिर्क और कुफ्र से पाक कर दिया, वे इस अज़ाब से महफ़ूज़ रहे।
ये लोग वही मुवह्हिद (एकेश्वरवादी) बंदे थे जिन्होंने अल्लाह की इबादत को ख़ालिस कर दिया था—न उन्होंने किसी को अल्लाह का साझी बनाया, न किसी और की इबादत की। अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से ख़ास कर दिया और उनके ईमान की सच्चाई की बदौलत उन्हें हर उस अज़ाब से बचा लिया जो उनके सामने वाली झुठलाने वाली क़ौमों पर आया।
इस आयत का ख़िताब अल्लाह के नबी ﷺ की क़ौम (क़ुरैश) से भी है—कि उन्होंने अपने से पहले की क़ौमों के हालात सुने और उनके तबाह होने के निशान देखे, फिर भी वे उन्हीं के रास्ते पर चल रहे हैं। मगर अल्लाह के मुख़लिस बंदे—जिन्होंने अपने ईमान को ख़ालिस कर लिया—वे हर उस अज़ाब से महफ़ूज़ रहेंगे जो काफ़िरों और मुन्किरों पर आएगा।
दीनी पैग़ाम:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ से बचने का एक ही रास्ता है—ईमान को ख़ालिस करना। जो लोग अपने दिल को शिर्क, रिया (दिखावे) और दुनिया की मुहब्बत से पाक कर लेते हैं, अल्लाह उन्हें अपनी ख़ास रहमत से नवाज़ता है और हर मुसीबत में उनका हाथ पकड़ता है। यही वो लोग हैं जो क़यामत के दिन भी अल्लाह के अज़ाब से निजात पाएँगे और जन्नत के वारिस होंगे। आइए हम अपने अमल और अपनी नीयत को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस करें, ताकि हम भी उन मुख़लिस बंदों में शामिल हो सकें जिनका ज़िक्र अल्लाह ने अपनी किताब में इज़्ज़त के साथ किया है।
📜 आयत 72-76 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 74
सूरा अस-साफ्फात आयत 74 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)सूरा आयत 74/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 72–76. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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