अस-साफ्फात · 74/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ ۝٧٤
Illaa `ibaadal laahil mukhlaseen
📖 हिंदी अर्थ
मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِلَّا = सिवाय, परन्तु
  • عِبَادَ = बंदे, दास
  • اللَّهِ = अल्लाह के
  • الْمُخْلَصِينَ = जिन्हें अल्लाह ने ख़ालिस (शुद्ध) कर लिया हो, चुने हुए, विशेष रूप से अपनी इबादत के लिए चुन लिए गए

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन क़ौमों पर अज़ाब आया—जैसे नूह की क़ौम, आद, समूद, और दूसरी झुठलाने वाली क़ौमें—उन सब पर तबाही और सज़ा नाज़िल हुई, मगर अल्लाह के वे बंदे जिन्हें अल्लाह ने ख़ुद अपनी इबादत के लिए चुन लिया और उनके दिलों को शिर्क और कुफ्र से पाक कर दिया, वे इस अज़ाब से महफ़ूज़ रहे।

ये लोग वही मुवह्हिद (एकेश्वरवादी) बंदे थे जिन्होंने अल्लाह की इबादत को ख़ालिस कर दिया था—न उन्होंने किसी को अल्लाह का साझी बनाया, न किसी और की इबादत की। अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से ख़ास कर दिया और उनके ईमान की सच्चाई की बदौलत उन्हें हर उस अज़ाब से बचा लिया जो उनके सामने वाली झुठलाने वाली क़ौमों पर आया।

इस आयत का ख़िताब अल्लाह के नबी ﷺ की क़ौम (क़ुरैश) से भी है—कि उन्होंने अपने से पहले की क़ौमों के हालात सुने और उनके तबाह होने के निशान देखे, फिर भी वे उन्हीं के रास्ते पर चल रहे हैं। मगर अल्लाह के मुख़लिस बंदे—जिन्होंने अपने ईमान को ख़ालिस कर लिया—वे हर उस अज़ाब से महफ़ूज़ रहेंगे जो काफ़िरों और मुन्किरों पर आएगा।

दीनी पैग़ाम:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ से बचने का एक ही रास्ता है—ईमान को ख़ालिस करना। जो लोग अपने दिल को शिर्क, रिया (दिखावे) और दुनिया की मुहब्बत से पाक कर लेते हैं, अल्लाह उन्हें अपनी ख़ास रहमत से नवाज़ता है और हर मुसीबत में उनका हाथ पकड़ता है। यही वो लोग हैं जो क़यामत के दिन भी अल्लाह के अज़ाब से निजात पाएँगे और जन्नत के वारिस होंगे। आइए हम अपने अमल और अपनी नीयत को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस करें, ताकि हम भी उन मुख़लिस बंदों में शामिल हो सकें जिनका ज़िक्र अल्लाह ने अपनी किताब में इज़्ज़त के साथ किया है।



📜 आयत 72-76 — सूरा अस-साफ्फात

72وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ
उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था
73فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ
ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ
74إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)
75وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ
और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे
76وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
74आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 74

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Saturday, October 3, 2026

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