अस-साफ्फात · 72/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ ۝٧٢
Wa laqad arsalnaa feehim munzireen
📖 हिंदी अर्थ
उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فِيهِم – उन (पिछली उम्मतों) में
  • مُنذِرِينَ – डराने वाले (पैग़म्बर), जो अल्लाह के अज़ाब से सावधान करें

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने उन पिछली क़ौमों में डराने वाले रसूल भेजे, जिन्होंने उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया और सच्चे रास्ते की तरफ़ बुलाया। ये नबी और रसूल उनके बीच ही से उठाए गए, ताकि वे उनकी ज़बान और उनके हालात को समझ सकें और उन्हें आसानी से क़बूल कर सकें। इन मुन्ज़िरों (डराने वालों) का काम सिर्फ़ डराना नहीं था, बल्कि वे खुशख़बरी भी देते थे और लोगों को अल्लाह की इबादत की तरफ़ बुलाते थे। मगर उन क़ौमों ने इन पैग़म्बरों को झुठलाया और कुफ़्र पर क़ायम रहे, जिसकी वजह से अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल हुआ।

ये आयत हमें अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ दोनों पर ग़ौर करने की तालीम देती है। अल्लाह ने किसी क़ौम को अज़ाब में पकड़ने से पहले उनके पास पैग़म्बर भेजे, ताकि उनके पास कोई बहाना न बचे। ये अल्लाह का पूरा इंसाफ़ है कि वह बिना चेतावनी दिए किसी को सज़ा नहीं देता। और हमारे लिए इस आयत में सबक़ है कि हम अपने नबी ﷺ की लाई हुई शिक्षाओं को क़बूल करें, क्योंकि हमारे पास आख़िरी पैग़म्बर आ चुके हैं और उनके बाद कोई नया पैग़म्बर नहीं आएगा। जिसने उनकी बात नहीं मानी, उसके पास कोई उज़्र (बहाना) नहीं होगा।

ये आयत हमें ये भी सिखाती है कि अल्लाह ने इंसानों को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि हर दौर में हिदायत का ज़रिया भेजा। आज हमारे लिए वो ज़रिया क़ुरआन और सुन्नत है। हमें इन पर अमल करना चाहिए और दूसरों तक इस पैग़ाम को पहुँचाना चाहिए, ताकि हम भी उन मुन्ज़िरों की कतार में शामिल हो सकें जिन्होंने लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराया और उसकी रहमत की तरफ़ बुलाया।



📜 आयत 70-74 — सूरा अस-साफ्फात

70فَهُمْ عَلَىٰ آثَارِهِمْ يُهْرَعُونَ
ये लोग भी उनके पीछे दौड़े चले जा रहे हैं
71وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ الْأَوَّلِينَ
और उनके क़ब्ल अगलों में से बहुतेरे गुमराह हो चुके
72وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ
उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था
73فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ
ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ
74إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
72आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 72

सूरा अस-साफ्फात आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था

सूरा आयत 72/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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